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गोवा: भागदौड़ भरी ज़िंदगी से दूर एक अलग दुनिया

अतुल्य भारत!

भारत के दक्षिण-पूर्वी तट पर बसा छोटा सा राज्य गोवा, दुनिया भर से आने वाले सैलानियों की पसंदीदा जगह है. उन्हें यहां का गर्मी वाला मौसम, रात को होने वाली पार्टियां और घूमना-टहलना, सफ़ेद और चमचमाते समुद्री किनारे, पानी में होने वाले खेल और आरामदायक ज़िंदगी अपनी ओर खींचती है. इस इलाके के समृद्ध इतिहास की वजह से, यह राज्य वास्तुकला का एक खज़ाना है.

गोवा समुद्र से घिरा हुआ है और समुद्र ने ही हमेशा इसकी किस्मत का फैसला किया है. शुरुआत से ही, गोवा एक व्यापारिक बंदरगाह रहा है. चीन के हान साम्राज्य के साथ-साथ भारत, रोम और अफ़्रीकी और मध्य-पूर्वी देशों के पुराने साम्राज्यों से भी कारोबारी गोवा में आते रहे.

पूरे भारत की तरह ही गोवा के आम लोगों के जीवन पर भी हज़ारों साल से चली आ रही परंपराओं की झलक दिखाई देती है. यहां रहने वाले कई लोग, अपने पूर्वजों की तरह ही मछलियां पकड़ते हैं, खेती करते हैं, कारोबार करते हैं और समुद्री यात्रा करते हैं. हालांकि, आजकल नावों पर यहां के लोगों के बजाय सैलानी ज़्यादा नज़र आते हैं.

‘आवर लेडी ऑफ़ गुड होप चर्च’ के दो मीनार, गोवा के कैंडोलिम बीच के आसमान को छूते हैं. इस जगह पर पहला कैथलिक चर्च 1560 में बना था. इस चर्च की इमारत 1667 में बनकर तैयार हुई थी.

यूनेस्को की विश्व धरोहरों में से एक, ‘बासिलिका ऑफ़ बॉम जीज़स (1605)’ चर्च गोवा में मौजूद है. इस चर्च में रोमन कैथलिक पादरी, सेंट फ़्रांसिस ज़ेवियर का शव दफ़नाया गया है. 16वीं सदी में, इन्होंने एशिया में ईसाई धर्म अपना लिया था.

‘बासिलिका ऑफ़ बॉम जीज़स’ चर्च के आस-पास का इलाका देखने के लिए, छवि को चारों ओर ले जाएं.

‘बासिलिका ऑफ़ बॉम जीज़स’ के अंदर, सुनहरे रंग की एक मेज़ है जिसने पूजा करने की जगह को घेरा हुआ है. यह मेज़ सेंट फ़्रांसिस ज़ेवियर के शव की सुरक्षा भी करती है. चर्च की शानदार बारोक बनावट में, न सिर्फ़ कैथलिक ईश्वर भक्ति, बल्कि पुर्तगालियों की ताकत और समृद्धि भी झलकती है.

‘बासिलिका ऑफ़ बॉम जीज़स’ का अंदरूनी हिस्सा देखने के लिए, छवि को चारों ओर ले जाएं.

एशिया के मसालों के कारोबार ने पुर्तगालियों को भारत की ओर खींचा और इसी वजह से वे लंबे समय तक यहां रहे. आज भी, उनके कुछ वंशज मसालों का कारोबार करते हैं. गोवा के कई लोगों के नाम पुर्तगाली हैं और उनके रहन-सहन में भारतीय, यूरोपीयाई, अफ़्रीकी और दक्षिण-पूर्व एशियाई संस्कृतियों का मिला-जुला रूप दिखाई देता है.

गोवा का व्यंजन भारत, एशिया और भूमध्यसागरीय क्षेत्रों से मजबूत प्रभाव के साथ अपनी संस्कृति के रूप में विश्वव्यापी है। आधुनिक सुपरमार्केट के साथ रंगीन खुले हवा के बाजार मौजूद हैं।

गोवा अपने चमकते रंगों और परिधानों, इसकी समृद्ध परंपराओं, भाषाओं के बहुभाषी और जीवन के तरीकों में भारत के समान ही अपील करता है. लेकिन गोवा में यूरोपीय बारोक आर्किटेक्चर, 1960 के काउंटरकल्चर और आधुनिक पर्यावरण-पर्यटन की अतिरिक्त परतें हैं जो इसे भारत या दुनिया में किसी अन्य स्थान के विपरीत बनाती हैं.

गोवा ईसाई तीर्थयात्रियों और भारत में ईसाई धर्म का एक महत्वपूर्ण केंद्र के लिए एक गंतव्य है. यद्यपि ईसाई धर्म अब बहुमत नहीं है, फिर भी अधिकांश चर्च पूजा के लिए खुले हैं.

मारियो मिरांडा द्वारा यह भित्तिचित्र खुशी से आज के गोवा की ऊर्जा और आशावाद को दर्शाता है. इसकी राजनीतिक और धार्मिक परंपराओं ने एक युवा, शिक्षित आबादी के साथ एक बहुसांस्कृतिक समाज बनाया है जो दुनिया तक पहुंचने के लिए जारी है.

अतुल्य भारत!
क्रेडिट: सभी मीडिया
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