1 अक्तू॰ 1989 - 10 नव॰ 1989

बर्लिन में क्रांति

Robert Havemann Gesellschaft

दीवार गिरने में 40 दिन

तानाशाही में जीवन

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद साम्यवादी तानाशाही पूर्वी जर्मनी सहित पूरे केंद्रीय और पूर्वी यूरोप में स्थापित हो गई थीं.

1961 में बर्लिन की दीवार के निर्माण ने जर्मनी के विभाजन पर मुहर लगा दी.

GDR (जर्मन लोकतांत्रिक गणराज्य) में जीवन में बोलने की आज़ादी को समाप्त कर दिया गया और व्यक्तिगत अधिकारों पर प्रतिबंध लगा दिए गए. राज्य ने आलोचना का उत्तर उत्पीड़न, कारावास और देश-निकाला से दिया.

GDR की मौजूदगी में, राजकीय साम्यवादी दल, SED के शासन के प्रति विरोध और बाधा बना रहा. हालांकि, SED तानाशाही, एक क्रांति के बाद 1989 तक समाप्त नहीं हुई थी.

1980 के दशक में, शहरी पतन, पर्यावरण के विनाश और मितव्ययिता के अभाव से, GDR में अव्यवस्था का प्रसार स्पष्ट हो गया था.

ZETTEL FALTEN (कागज़ मोड़ना)

GDR में स्वतंत्र चुनाव का सिद्धांत मौजूद नहीं था.

सभी उम्मीदवार एक ही सूची पर थे जिसे "Einheitsliste" या एकीकृत सूची कहते थे. मतदाता इस सूची को स्वीकार या अस्वीकार कर सकते थे. SED की प्रमुख भूमिका, संविधान में लिखी हुई थी.

मतदान का सामान्य रूप से "कागज़ मोड़ना" (Zettel falten) के रूप में संदर्भ दिया जाता था. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, लगभग 99 प्रतिशत योग्य मतदाता अपना मत देते थे.

चुनाव परिणामों की धोखेबाजी की अफवाह लगातार बढ़ने लगी थी.

7 मई 1989 के स्थानीय चुनाव के दौरान, विपक्ष के सदस्य मत गणना की निगरानी करने के अधिकार का उपयोग करके चुनाव धोखाधड़ी का सबूत ढूंढना चाहते थे.

यह सिद्ध करने के लिए कि चुनाव में हेरा-फेरी हुई थी, अंतिम कार्यकारी परिणाम की तुलना में पूर्वी बर्लिन, ड्रेसडेन, लिप्ज़िग और देश के अन्य भागों में वोटों की गणना की गई संख्या में अंतर दिखाए गए.

गुप्त पत्रिका "Wahlfall 89" (चुनाव 89) ने चुनावी हेरा-फेरी का प्रमाण देने वाले आंकड़े प्रकाशित किए.

अधिकाधिक पूर्वी जर्मन अब इस कपट को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थे.

स्वतंत्र और लोकतांत्रिक चुनावों की मांग पहले से तेज़ हो गई और आने वाले महीनों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण चुनौतियों में से एक बन गई.

7 जून, 1989, Sophienkirche, पूर्वी बर्लिन: केवल कुछ मीटर की दूरी पर समूह को गिरफ़्तार कर लिया जाता है.

हम छोड़ना चाहते हैं!

केवल पहले वर्ष के भीतर 100,000 से अधिक लोगों ने पश्चिम छोड़ने का निवेदन किया. उन्होंने राजनीतिक नेतृत्व में अपना विश्वास खो दिया था और अब उन्हें GDR में अपना कोई भविष्य दिखाई नहीं दे रहा था.

मई 1989 में, हंगरी, ऑस्ट्रिया के साथ अपने सीमा सुरक्षा बाड़ों को तोड़ने लगा था. पश्चिमी मीडिया में इसकी रिपोर्ट की गई और इससे GDR के इतिहास में सबसे बड़ा कूच किया गया.

प्राग, बुडापेस्ट, वरसॉ और पूर्वी बर्लिन में पश्चिमी जर्मन प्रतिनिधित्व को बहुत मज़बूती मिली.

1989 की गर्मियों में लाखों लोगों ने देश छोड़ दिया.

प्राग और वरसॉ के माध्यम सामूहिक कूच पर सूचना पत्र "टेलीग्राफ़" रिपोर्ट को गैर-कानूनी रूप से प्रकाशित किया गया.
राजदूत शरणार्थियों को विशेष ट्रेनों पर GDR से पश्चिमी जर्मनी ले जाया जाता है.

AUFBRUCH 89 (पहल 89)

इस कूच ने GDR का रूप ही बदल दिया. अनेक लोग अपनी दशकों-लंबी नींद से जागे, समान-विचारों वाले लोगों की तलाश की और उन्हें स्वयं संगठित किया. नए समूह, आंदोलन और दल बनाए गए.

Neues Forum (नया फ़ोरम) नागरिक आंदोलन की उद्घाटन बैठक 9 और 10 सितंबर 1989 को बर्लिन के पास ग्रुन्हीड में हुई.

एकीकरण एक राजनीतिक संचार मंच था जिसने राष्ट्र में शांति बनाए रखने का प्रयास किया.

अक्टूबर 1989 की समाप्ति तक, देश भर के 150,000 लोग नया फ़ोरम आंदोलन से जुड़ चुके थे. 

जब नए फ़ोरम की स्थापना हुई, लगभग उसी समय एक नए सामाजिक लोकतांत्रिक दल, SDP, की भी स्थापना हुई थी. नागरिक आंदोलन जैसे "Demokratie Jetzt" (लोकतंत्र अभी), "Demokratischer Aufbruch" (लोकतांत्रिक पुनरुत्थान) और "Vereinigte Linke" (संयुक्त विपक्ष) भी शुरू किए गए.

उन्होंने स्वतंत्र भाषण और प्रेस की स्वतंत्रता वाले लोकतांत्रिक समाज की मांग की.

हालांकि, SED ने केवल अपनी मांगों को लागू करने का बचाव किया और सभी नए समूहों की स्थापना को गैर-कानूनी करार दिया. उनके संस्थापकों और समर्थकों को राजकीय सुरक्षा मंत्रालय द्वारा खोज निकाला गया.

राजकीय प्रतिबंध के बावजूद, पूर्वी जर्मन लोग हज़ारों की संख्या में नए दलों और आंदोलनों में शामिल हुए.

7 अक्टूबर 1989 को स्वांटे में SDP की आरंभिक बैठक

GDR के 40 वर्ष

"Vorwärts immer, rückwärts nimmer!" (सदैव आगे बढ़ो, पीछे कभी मत हटो) (7 अक्टूबर 1989 को SED नेता एरिच हॉनेकर)

कूच और बढ़ते विरोध आंदोलन के बावजूद, SED ने जुलूस और परेड के साथ GDR की 40वीं वर्षगांठ का उत्सव मनाया.

हालांकि, कार्यकारी उत्सव बिना किसी हंगामे के समाप्त नहीं हुआ. हज़ारों पूर्वी बर्लिन-वासी बिना किसी पूर्व तैयारी के अलेक्ज़ेंडरप्लेट्ज़ में एकत्रित हुए और Palast der Republik (गणराज्य राजमहल) पर चढ़ाई की जहां सरकार ने भोज की व्यवस्था की हुई थी. इससे पूर्वी बर्लिन में 1953 के प्रसिद्ध विद्रोह तक का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ.

शाम के दौरान, प्रदर्शनकारियों को बलपूर्वक वापस भगा दिया गया. वे शहर के प्रिंज़्लोयेर बर्ग जिले के Gethsemanekirche (गेथ्समेन चर्च) की ओर मुड़ गए.

GDR की 40वीं वर्षगांठ के उत्सव की शाम को, साम्यवादी युवा संगठन, FDJ (स्वतंत्र जर्मन युवा), ने उत्सव को मशाल की रोशनी वाले जुलूस से चिह्नित किया.

6 अक्टूबर 1989 की रात को पूर्वी बर्लिन में FDJ मशाल की रोशनी वाला जुलूस
जिस समय सरकार महल में उत्सव मना रही थी, उस समय हज़ारों लोग भवन के बाहर विरोध कर रहे थे.
Palast der Republik में बाधाएं

शांतिप्रिय प्रदर्शनकारियों को घेर लिया गया और पीटा गया. Gethsemanekirche के आस-पास की सड़कों पर खड़े बहुत सारे लोगों को गिरफ़्तार कर लिया गया, जिनमें वे नागरिक भी शामिल थे, जो इसमें सम्मिलित नहीं थे.

सुरक्षा फ़ौजें पूर्वी बर्लिन के Gethsemanekirche के आस-पास की सड़कों की निगरानी करती थीं.

कुछ प्रदर्शनकारी पुलिस से बचने के लिए भागकर Gethsemanekirche में चले गए.

प्रत्यक्ष दर्शियों और प्रत्यक्ष रूप से सम्मिलित लोगों ने 7 और 8 अक्टूबर को सड़कों पर हुई लड़ाइयों की अपनी स्मृतियों को रिकॉर्ड किया. इनमें से कुछ रिकॉर्ड को छोटी मात्राओं में गैर-कानूनी रूप से स्वयं-प्रकाशित किया गया.

बंदियों की रिहाई

अक्टूबर 1989: Gethsemanekirche, पूर्वी बर्लिन

पूर्वी बर्लिन का Gethsemanekirche, 1989 की सर्दियों में प्रतिरोध और आंदोलन का केंद्र बिंदु बन गया था.

विशेष टेलीफ़ोन लाइन के साधनों द्वारा GDR के सभी भागों के समाचार यहां पहुंचते थे. हज़ारों नागरिकों और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया को कई घटनाओं के बारे में सूचित किया गया. इस जानकारी पर आधारित पश्चिमी जर्मन मीडिया की रिपोर्ट को देश भर में पूर्वी जर्मन बैठक के कमरे में प्राप्त किया गया.

2 अक्टूबर 1989 को, विपक्ष के सदस्यों ने धार्मिक सभा बुलाई और लिप्ज़िंग में पूर्व में गिरफ़्तार किए गए प्रदर्शनकारियों की रिहाई की मांग की.

कई लोग सुरक्षा फ़ौजों की हिंसक कार्रवाइयों को लेकर गुस्सा थे और उन्होंने एकता आंदोलनों का समर्थन किया.

प्रत्येक बंदी के लिए हज़ारों मोमबत्तियां

अक्टूबर 1989: ईवेंट और नियमित संध्या चर्च सेवाओं के लिए हज़ारों लोग इकट्ठा हुए.

चर्च प्रतिदिन 3,000 से अधिक लोगों से भरा रहता था.

विशेष ईवेंट में अधिकांश युवा लोगों ने Gethsemanekirche में रात बिताई.

बंदियों के छूट जाने पर धार्मिक सभा के भागीदारों ने अपनी सफलता का उत्सव मनाया.

हम जनता हैं!

9 अक्टूबर 1989 को लीप्ज़िंग में लगभग 70,000 लोग, सोमवार प्रदर्शनों के भाग के रूप में, इकट्ठा हुए.

प्रदर्शनों को पिछले सप्ताहों में संपूर्ण GDR के कई शहरों में हिंसात्मक ढंग से समाप्त किया गया था. वातावरण तनावपूर्ण था.

कोई नहीं जानता था कि SED नेतृत्व इस विशेष दिन को शांतिपूर्ण विरोध को रोकने के लिए बल का उपयोग करेगा.

प्रदर्शनों से आवाज आई "हम जनता हैं". सभी अपेक्षाओं के विरुद्ध, सुरक्षा बलों ने हस्तक्षेप नहीं किया.

लाखों लोग अपने डर पर काबू पा कर लीप्ज़िग की सड़कों के माध्यम से विरोध यात्रा में शामिल हो गए.

सोमवार प्रदर्शनों के नेता अहिंसा चाहते थे.

इगॉन क्रेंज घोषणाएं क्रांतिकारी परिवर्तन

18 अक्टूबर 1989 को, एगन क्रेंज ने एरिक हॉनेकर से राज्य और दल के नेता के रूप में पदभार संभाला.

हाल के सप्ताहों के विरोधों के बाद, नए SED मुखिया ने बातचीत की तत्परता का झूठा बहाना बनाया. क्रेंज ने निर्देशन में परिवर्तन का वचन दिया और GDR के लिए क्रांतिकारी परिवर्तन की घोषणा की.

हालांकि, लोग अब शांत नहीं रह सके. उन्होंने क्रेंज को स्वीकार नहीं किया. वह पहले ही लंबे समय तक शक्ति सत्ता के गोपनीय दल का हिस्सा रह चुका था.

युवा पूर्वी बर्लिनवासियों ने नए राज्य और दल के नेता इगॉन क्रेंज की नियुक्ति के प्रति विरोध किया.

विरोध बढ़ गया

नए फ़ोरम की शुरुआत में, स्थानीय अभिनेताओं और कलाकारों ने 4 नवंबर 1989 को एक विशाल प्रदर्शन का आयोजन किया.

SED नेतृत्व ने प्रदर्शन को अपनी अनुमति दे दी, हालांकि अपनी ओर से खर्च उठाने की इच्छा के साथ.

लाखों लोग अलेक्ज़ेंडरप्लेट्ज़ मे एकत्रित हुए. यह GDR के इतिहास में व्यवस्था के विरुद्ध सबसे बड़ा प्रदर्शन बन गया.

कलाकार, नागरिक अधिकार सक्रिय प्रतिभागी और राज्य नेतृत्व के विशिष्ट वर्ग के सदस्य मंच पर बोले. SED के अधिकांश वक्ताओं ने निंदा की.

बैनर का संदेश स्पष्ट था – प्रदर्शनकारी इस दल को बाहर करना चाहते थे. वे GDR में लोकतंत्र चाहते थे.

दीवार गिरा दो!

लोगों का सामूहिक कूच 1989 की गर्मियों से ही जारी था. लाखों लोगों ने केवल नवंबर के पहले कुछ दिनों में ही GDR छोड़ दिया. GDR नेतृत्व के लिए परिस्थिति बहुत ही अरक्षणीय बन गई थी.

9 नवंबर 1989 को, अंतर्राष्ट्रीय प्रेस कॉन्फ़्रेंस की समाप्ति पर, गुंटर चाबॉस्की, SED पोलिटबुरो का एक सदस्य, ने नए यात्रा विनियमों की घोषणा की. अब सभी पूर्वी जर्मन-वासियों को पश्चिम में यात्रा करने की अनुमति होगी.

जब एक पत्रकार द्वारा प्रश्न किया गया, तो चाबॉस्की ने पुष्टि की कि नए विनियम तुरंत प्रभाव से और बिना देरी के लागू हो जाएंगे.

नए यात्रा विनियमों के समाचारों को पश्चिम बर्लिन मीडिया में प्रसारित किया गया और फिर संपूर्ण पूर्व में भी प्राप्त किया गया. कई पूर्वी बर्लिनवासी सीमा क्रॉसिंग में इकट्ठा हो गए और 28 दीर्घ वर्षों के बाद उन पर खोले जाने का दबाव डाला.

"Wir fluten jetzt, wir machen alles auf" ("हम भर चुके हैं, हम सभी चीज़ें खोल रहे हैं"). 9 नवंबर 1989 को रात 11:30 बजे, बॉर्न्होल्मर स्ट्रैब में इन शब्दों का उच्चारण करके एक सीमा रक्षक द्वारा पहले बैरियर को उठाने का संकेत दिया गया.

आने वाले घंटों और दिनों में अन्य सीमा क्रॉसिंग खोल दी गईं.

पूर्वी और पश्चिमी बर्लिनवासियों ने दीवार का खुलना स्वीकार किया और एक साथ उत्सव मनाया.

संपूर्ण विश्व की आंखें देख रही थीं: अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने दीवार के गिरने की लाइव रिपोर्ट दी, एक घटना जिसकी बहुत समय पहले से इच्छा की गई लेकिन जिसे लोगों ने अब असंभव मानना शुरू कर दिया था.

आभार: कहानी

Kurator, Projektleitung  — Sello, Tom (Robert-Havemann-Gesellschaft e.V.) 
Text, Umsetzung — Dr. Schäkel, Ilona (Letternleuchten Text | PR)
Unterstützung — Wir bedanken uns für die Unterstützung durch den Berliner Landesbeauftragten für die Unterlagen des Staatssicherheitsdienstes der ehemaligen DDR.

क्रेडिट: सभी मीडिया
कुछ मामलों में ऐसा हो सकता है कि पेश की गई कहानी किसी स्वतंत्र तीसरे पक्ष ने बनाई हो और वह नीचे दिए गए उन संस्थानों की सोच से मेल न खाती हो, जिन्होंने यह सामग्री आप तक पहुंचाई है.
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