1976 - 2011

स्टीव बीको: विरासत

Steve Biko Foundation

"सेसोथो में एक कहावत है 'मोत्जेका सेदिबा हा आ से न्वे' ('जो कुआं खोदता है वह उससे पानी नहीं पीता'). केवल वही उसके ठंडे पानी से अपनी प्यास बुझा सकते हैं जो उसके बाद आते हैं. जब पूर्वजों ने यह कहावत लिखी थी, उनके मन में स्टीव बीको थे, तब भी जब वे पूर्व-निर्माण की दुनिया में निर्माण होने की प्रतीक्षा में थे"
- ज़ेक्स म्दा 

आज स्टीव बिको की विरासत दक्षिण अफ्रीका और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में कई संस्थानों के कार्यों द्वारा जीवंत है, जिसमें स्टीव बिको फाउंडेशन, ब्राज़िलीयन स्टीव बिको सांस्कृतिक संस्थान और स्टीव बिको हाउसिंग एसोसियेशन पर आधारित लीवरपूल इंग्लैंड भी शामिल हैं. ये संस्थान बिको के दृष्टिकोण को अधिक-से-अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए बिको की परंपरा के अनुसार न केवल घर, शिक्षा और स्वास्थय जैसी भौतिक समस्याओं का ध्यान रखते हैं बल्कि इतिहास, संस्कृति और परंपरा से संबंधित मामलों का भी रखरखाव करते हैं.

स्टीव बीको की मृत्यु के 30 वर्ष बाद , श्रीमति ट्सिकी बीको और वकील जॉर्ज बिज़ोस, विटवॉटर्सरैंड विश्वविद्यालय के स्टीव बीको जैवनैतिकता केंद्र के उद्घाटन में उपस्थित हुए
स्वर्गीय आपर्टाइट-विरोधी कार्यकर्ता स्टीव बिको को श्रद्धांजलि देने के लिए पीटर गैबरीयल द्वारा 1980 में लिखा गया गीत

स्टीव बीको को स्टीव बीको मेमोरियल लेक्चर द्वारा वार्षिक रूप से भी श्रद्धांजलि दी जाती है, केप टाउन विश्वविद्यालय के सहयोग में आयोजित SBF का एक प्रोग्राम.  उसके तेहरवें वर्ष में, 21वीं सदी के कुछ दूरदर्शी नेताओं द्वारा लेक्चर दिया गया था.

" सभी सामाजिक प्रक्रियाओं की तरह, अफ़्रीकी पुनः जागरुकता भी अव्यवस्थित पर फिर भी एक सृजनात्मक घटना थी, पूर्वानुमानित नियमों और विनियमों के विभाग के अधीन होना तो दूर, यह एक राजनीतिक प्रोग्राम बन कर रह जाने वाला भी नहीं है."

- जाबुलो डेबेले, पहला वार्षिक स्टीव बीको मेमोरियल लेक्चर, 12 सितंबर 2000

प्रोफ़ेसर जाबुलो डेबेले और श्री एनकोसिनाथी बीको, SBF CEO

"बीको के बच्चों में निवेश करना दक्षिण अफ़्रीका के भविष्य में निवेश करना है, क्योंकि वे इस देश को नहीं छोड़ कर जाएंगे. यह उनकी विरासत है."

- ज़ेक्स म्दा, दूसरा वार्षिक स्टीव बीको मेमोरियल लेक्चर - 12 सितंबर 2001

प्रोफ़ेसर ज़ैकेस म्दा

"तेज़ बुद्धि और संगठन तथा नेतृत्व के प्रति विशिष्ट योग्यता वाले युवा, बीको ने काले लोगों के गिरते मनोबल को उठाने, उनकी चेतना और आत्म-सम्मान को बढ़ाने की आवश्यकता को जाना, उनके शब्दों में कहें तो, 'काले लोगों को गोरों द्वारा किए जाने वाले मनोवैज्ञानिक उत्पीड़न से निकालना.’ "

– चिनुआ ऐचेबे, तीसरा वार्षिक स्टीव बीको मेमोरियल लेक्चर, 12 सितंबर 2002

प्रोफ़ेसर चिनुआ ऐचेबे

"स्टीव बीको, जिनका हम सम्मान करते हैं, उन महान लोगों में से हैं जिनके कार्य और निष्ठा ने पड़ोसी राज्यों के पार भी लोगों को प्रभावित किया है और जिनके कारण हमारे लिए वर्तमान के सम्राज्यों के उपनिवेशवादी की राख से बाहर नए अफ़्रीका के संभावनाओं के बारे में वार्तालाप करना संभव हुआ."

– गूगी वा थियोंगो, चौथा वार्षिक स्टीव बीको मेमोरियल लेक्चर, 12 सितंबर 2003

प्रोफ़ेसर एनगुगी वा थियोंगो

"और अब जब हम अफ़्रीकी पुनः जागरुकता के बारे में अधिक बात करते और कार्य करते हैं, तो स्टीव बीको का जीवन, कार्य, शब्द, विचार और उदाहरण उतनी ही दृढ़ता से प्रासंगिकता और जीवंतता से अपनाते हैं जितना कि उस समय अपनाया जाता था जब वह जीवित थे. उनकी क्रांति का एक सरल लेकिन बेहततरीन शक्तिशाली आयाम था जो स्वयं ही कार्य करता गया – अर्थात लोगों की चेतना को मूलतः बदलना. अफ़्रीकी पुनः जागरुकता इस जैसे चेतना का मूलभूत बदलाव करता है और ठीक उनके लिए स्थापित है: स्वयं की चेतना, दुनिया में हमारा स्थान, इतिहास बदलने की हमारी क्षमता और एक-दूसरे से तथा शेष मानवता से हमारे संबंध."

- नेल्सन मंडेला, पांचवां वार्षिक स्टीव बीको मेमोरियल लेक्चर, 10 सितंबर 2004

राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला

"उस स्वतंत्रा में, जिसका आज हम आनंद उठाते हैं, बंटू स्टीफ़ेन बीको का मुख्य योगदान मुत्यु के भय से हमें मुक्त करना है, जिसके कारण हम पूर्ण रूप से वह बन पाए जिसके लिए हम बने थे – स्वयं के इतिहास के कर्ता. "

– माफ़ेला रामफ़ेले, छठा वार्षिक स्टीव बीको मेमोरियल लेक्चर, 12 सितंबर 2005

डा. माफ़ेला रामफ़ेले

"यह आश्चर्यजनक है कि स्टीव के पास अपने शिक्षण का प्रचार करने का ज्यादा समय नहीं था और सही मायने में, अभी तक गुमनामी में खो जाना चाहिए था...उनके पास कोई चमकदार गाड़ी या आलीशान घर नहीं था. वह एक बस्ती में रहते थे. उनके पास किसी विश्वविद्यालय की डिग्री भी नहीं थी और सही मायने में, उन्हें सभी महत्वहीन लोगों के लिए आरक्षित गुमनामी में छोड़ देना चाहिए था. लेकिन क्या यह सच था?”

- डेस्मंड टूटू, सातवां वार्षिक स्टीव बीको मेमोरियल लेक्चर, 26 सितंबर 2006

आर्कबिशप एमेरिटस डेस्मंड टूटू

"स्टीव बीको यह समझ गए थे कि अपनी स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए हमें उस धारणा का विरोध करना होगा कि हम एक समस्या हैं और यह कि हमें अब मात्र इसके लिए रोना नहीं है कि: भगवान ने मुझे मेरे ही घर में बाहरी और अजनबी क्यों बनाया?; तथा यह कि हमें अब औरों की नज़र से स्वयं को देखना और दुनिया की उन नज़रों से अपनी आत्माओं को मापना बंद करना चाहिए, जो मज़े से हमें अपमान और दया की दृष्टि से देखती है. "

– थाबो बेकी, आठवां वार्षिक स्टीव बीको मेमोरियल लेक्चर, 12 सितंबर 2007

राष्ट्रपति थाबो बेकी

“बीको की रचनाएं नस्लवादी शासकों के प्रति उनके व्यवहार के बारे में कम तथा पीड़ितों के मानोविज्ञान और चेतना के बारे में अधिक बात करती हैं. वह इस बात को तब समझ गए थे जिसे हमें अब समझना चाहिए कि गरीबों की चेतना और उनके जीवन में बदलाव के कारकों के रूप में उनकी सक्रीय सहभागीता, लोकतांत्रिक परिवर्तन की कुंजी है. इन विचारों के लिए, बीको ने अपना जीवन स्वतंत्रता और लोकतंत्रता के नाम कर दिया. इसके लिए, हम उनके कृतज्ञ हैं और वह निसंदेह हमारी सामूहिक स्मृतियों में अपने सही स्थान के पात्र हैं."

- ट्रेवर मैनुअल, नोवां वार्षिक स्टीव बीको मेमोरियल लेक्चर, 11 सितंबर 2008

मंत्री ट्रेवर मैनुअल 

“एक लोकतंत्र सामाज के आदर्श के लिए सब कुछ देने हेतु इच्छुक, स्टीव बीको, 1994 में लागू हुए लोकतंत्रता के बाद से देश में हुई प्रगति को बेहद रुचि के साथ देखते.  यहां तक कि, वह उससे भी ज़्यादा करते:  वह निसंदेह देखने की बजाय नेतृत्व कर रहे होते, घटनाओं से प्रभावित होने की बजाय उन्हें प्रभावित कर रहे होते.” 

-टीटो बोवेनी, दसवां वार्षिक स्टीव बीको मेमोरियल लेक्चर, 10 सितंबर 2009

श्री एनकोसिनाथी बीको, SBF CEO और रिज़र्व बैंक गवर्नर टिटो बोवेनी

अत्याचार पर काम करते-करते इस समस्या के बारे में कई में से एक चीज़ जो मैं समझने लगी वह यह थी कि अत्याचारी – चाहे वह कोई भी हो – हमारी सभी चीज़ों को कैसे प्रसन्नता से चोरी कर लेते हैं, लेकिन वे स्वयं को दी गई हमारी पीड़ा को हमारे पास ही छोड़ जाते हैं. वे खुशी-खुशी हमारे घाव के निशान हमारे पास छोड़ देंगे. और फिर वे अन्य लोगों को हमें उन घाव और निशान द्वारा परिभाषित करने में सहायता करेंगे जो हमने स्वयं को दिए हैं...स्टीव बीको दक्षिण अफ़्रीका में अश्वेत जागृति के जनक के रूप में जाने जाते हैं. उन्होंने सीख दी कि काले लोगों को अन्य लोगों के उनके बारे में विचार पर ध्यान दिए बिना अपने अस्तित्व का अन्वेषण और उसे सत्यापित करना चाहिए; उन्हें अपनी मेधा की तपती रोशनी में स्वयं को देखना होगा - वह अद्वितीय उपहार, जिसके साथ वे दुनिया में सभी मानव जाति को देने के लिए आते हैं; उन्हें यह विश्वास रखना होगा कि वे उस ईश्वरीय एकल भाव के लिए पूर्णतः बने हैं जोकि वह स्वयं हैं. यह कारण है कि लोग स्टीव बीको का सम्मान करते हैं, क्योंकि, कम शब्दों में कहें तो, वह पूरी तरह से समझते थे कि किसी भी वास्तव मुक्ति, किसी भी वास्तव मुक्ति की बुनियाद स्वयं से प्रेम करना है.

- ऐलिस वॉकर, ग्यारहवां वार्षिक स्टीव बीको मेमोरियल लेक्चर, 12 सितंबर 2010

प्रोफ़ेसर ऐलिस वॉकर

"खोज के बाद मैंने उनकी कुछ रचनाएं पढ़ीं.  हाल ही में मैंने उनमें से कुछ को फिर से पढ़ा है.  तीस वर्षों के बाद, आज भी मूलतः बदलते समाज में उनकी शक्ति असामान्य है.  आपको उनमें वाग्मिता, अंतर्दृष्टि, राजनीतिक जुनून और राजनीतिक व्यावहारिकता का संयोजन मिलता है."

- सर सिडनी केंट्रीज, बारहवां वार्षिक स्टीव बीको मेमोरियल लेक्चर, 12 सितंबर 2011

सर सिडनी केंट्रीज
आभार: कहानी

Steve Biko Foundation:
Nkosinathi Biko, CEO
Y. Obenewa Amponsah, Director International Partnerships
Donna Hirschson, Intern
S. Dibuseng Kolisang, Communications Officer
Consultants:
Ardon Bar-Hama
Marie Human

क्रेडिट: सभी मीडिया
कुछ मामलों में ऐसा हो सकता है कि पेश की गई कहानी किसी स्वतंत्र तीसरे पक्ष ने बनाई हो और वह नीचे दिए गए उन संस्थानों की सोच से मेल न खाती हो, जिन्होंने यह सामग्री आप तक पहुंचाई है.
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