1965 - 1976

स्टीव बीको: ब्लैक कॉन्शियसनेस आंदोलन

Steve Biko Foundation

SASO, BCP और BPC  वर्ष

Stephen Bantu Biko was an anti-apartheid activist in South Africa in the 1960s and 1970s. A student leader, he later founded the Black Consciousness Movement which would empower and mobilize much of the urban black population. Since his death in police custody, he has been called a martyr of the anti-apartheid movement. While living, his writings and activism attempted to empower black people, and he was famous for his slogan “black is beautiful”, which he described as meaning: “man, you are okay as you are, begin to look upon yourself as a human being”.

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"ब्लैक कॉन्शियसनेस एक स्वभाव और आचरण है, लंबे समय तक काली दुनिया से निकालने के लिए सबसे सकारात्मक निर्णय" - बीको

1666/67 नेटल विश्वविद्यालय SRC

संत फ़्रांसिस कॉलेज में अपने मैट्रिक के पूर्ण होने पर, बीको ने नेटल विश्वविद्यालय के काले लोगों के खंड से चिकित्सा डिग्री के लिए पंजीकरण किया. नेटल विश्वविद्यालय में उदारतावाद के बारे में शिक्षा दी जाती थी और वह उस परंपरा के कुछ प्रमुख बुद्धिजीवों का घर था. नेटल विश्वविद्यालय ऐसे कई पूर्व काले शिक्षकों, काले लोगों के समाज के अकादमिक रूप से कुछ सबसे सक्षम व्यक्तियों को आकर्षित करने वाले चुंबक के समान बन गया था, जिन्हें काले लोगों के कालेज से 1959 के विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत निकाल दिया गया था. नेटल विश्वविद्यालय ने देश के विभिन्न भागों और विभिन्न राजनीतिक परंपराओं से कानून और चिकित्सा के छात्रों – कुछ सबसे प्रतिभाशाली पुरुष और स्त्री – को भी आकर्षित किया. 1960 के दशक में नेटल विश्वविद्यालय में उनके अभिसरण ने विश्वविद्यालय को एक सत्य बौद्धिक केंद्र में बदल दिया, जो जीवंत राजनीतिक उपदेश की एक विविध संस्कृति चित्रित किया गया है. विश्वविद्यालय इस तरह डरबन मौमेंट के रूप में जाना जाने वाले का मुख्य आधार बन गया. 

नेटल में बीको ने तुरंत कार्य प्रारंभ कर दिया. वे तुरंत इस सक्रिय वातावरण से प्रेरित हो गए और बदले में उसे प्रेरित किया. जिस वर्ष वह वहां भर्ती हुए थे उन्हें 1966/67 के छात्र प्रतिनिधि परिषद (SRC) की सेवा करने के लिए नियुक्त किया गया था. यद्यपि उन्होंने शुरुआत में बहुजातीवाद छात्र समूह, विशेष रूप से दक्षिण अफ़्रीकी छात्र राष्ट्रीय संघ (NUSAS) का समर्थन किया, कैंपस में कई लोग NUSAS के विरुद्ध थे, जिसके माध्यम से काले छात्रों ने वर्षों तक अपनी आवाज़ उठाने का प्रयास किया लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ. श्वेत उदारवादी से ऐसी निराशा से स्टीव बीको पूरी तरह से अनजान नहीं थे, जिन्होंने वैसी निराशा का अनुभव लवडेल में किया था.

नेटल विश्वविद्यालय के चिकित्सा छात्र (बाएं से दाएं: ब्रिजेट सैवेज, रोजर्स रागावैन, बेन एगुबाने, स्टीव बीको)
वार्षिक NUSAS कॉन्फ़्रेंस में स्टीव बीको को एक SRC प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त करता पत्राचार

1967 में, बीको ने रोड्स विश्वविद्यालय में हुए वार्षिक NUSAS कॉन्फ़्रेंस में SRC प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया. कॉन्फ़्रेंस में तब एक विवाद हुआ, जब होस्ट संस्था ने जातीयता के आधार पर मिश्रित आवास को समूह क्षेत्र अधिनियम के आज्ञापालन के तहत, आपर्टाइट के अंतर्गत कानूनों में से एक, जिससे NUSAS घृणा करते थे लेकिन विरोध नहीं, निषिद्ध कर दिया. इसकी बजाय NUSAS ने दोनों रास्तों पर चलना चुना: इसने काले प्रतिनिधियों को कानून की सीमाओं में रहकर कार्य करने की चेतावनी देते हुए रोड्स विश्वविद्यालय के अधिकारियों की निंदा की. बीको के लिए यह एक और निर्णायक पल था, जिसने उन्हें संवेदनशील समस्या से सामना कराया. 

SASO, डा. सलीम बादात द्वारा भाषण, ब्लैक मैन यू आर ऑन यौर ओन के लेखक

गुस्से में प्रतिक्रिया देते हुए, बीको ने छात्र राजनीति के एकीकरण की कड़ी आलोचना की और उदारवाद विचार को उन लोगों कि खोखली आवाज़ कह कर अस्वीकार कर दिया जो यथास्थिति को आगे बढ़ाने के लिए तो प्रतिबद्ध नहीं थे, लेकिन जिन्होंने "गोरे लोगों के विशेषाधिकारों के विशेष समूह से" उनके लिए सबसे अनुकूल को ले लिया था. इससे सबसे-समर्थ विवाद उत्पन्न हुआ: क्या गोरे उदारवाद काले लोगों के विरोध के हाव और भाव को परिभाषित करने के लिए सबसे-समर्थ थे?

इस विवाद में दो बातें थी. एक ओर, इसका उद्देश्य गोरे लोगों के समाज को उनके श्रेष्ठ होने की भावना के भ्रम से निकालना और उदार संस्थापना को पीड़ित के प्रवक्ता के रूप में अपने प्रकल्पित भूमिका पर पुनर्विचार करने की चुनौती देना था. दूसरी ओर, उसे काले लोगों के समाज की समान रूप से खुलकर आलोचना के रूप में हनाया गया था, जिसका लक्ष्य उसकी निष्क्रियता थी जो काले लोगों को इतिहास में "दर्शकों" की भूमिका देती है. 7 अप्रैल, 1960 में अफ़्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस और पैन अफ़्रीकी कांग्रेस पर प्रतिबंध लगा दिया गया और मुक्ति आंदोलन के नेताओं को बंदी बना लिया गया, जिससे उदासीनता का माहौल बन गया. 

बंटु स्टीफ़ेन बीको

" हम सही मानवता की खोज में निकले हैं और कहीं दूर आकाश में हम जगमगाता पुरस्कार देख सकते हैं. चलो, साहस और विश्वास के साथ, हमारी सामान्य दुर्दशा और हमारे भाईचारे से शक्ति लेते हुए आगे बढ़ें. समय आने पर हम दक्षिण अफ़्रीका को सर्वश्रेष्ट संभावित उपहार देने की स्थिति में होंगे - कई अधिक लोग."

बीको ने यह तर्क रखा कि वास्तविक उदारवाद केवल तब संभव था जब काले लोग स्वयं ही बदलाव के कारक थे. उनके विचार में, यह एजेंसी उस नई पहचान और चेतना का कार्य थी, जो काले लोगों के समाज को त्रस्त करने वाली हीन भावना से रहित था. वास्तविक एकीकरण और गैर-जातिवाद की आशा केवल तब ही होगी जब गोरे और काले लोगों के समाज जातीयता की समस्याओं को एक साथ संबोधित करगें.   

बीको के साथ 1972 के साक्षात्कार का प्रतिलेख

1968 में स्टटरहेम में विश्वविद्यालय ईसाई आंदोलन (UCM) की बैठक में, बीको ने काले छात्रों की राजनीति में मुख्य व्यक्तियों पर लक्ष्य साध कर और एक विशेष काले आंदोलन हेतु समर्थन देकर अतिरिक्त प्रगति की. 1969 में, पीटर्सबर्ग के निकट नॉर्थ विश्वविद्यालय में और प्रमुख भूमिका निभाते हुए नेटल विश्वविद्यालय के छात्रों के साथ, अफ़्रीकी छात्रों ने केवल-काले-छात्रों-के लिए संगठन लॉन्च किया, दक्षिण अफ़्रिकी छात्र संगठन (SASO). SASO ने स्वयं को ब्लैक कॉन्शियसनेस के प्रति प्रतिबद्ध कर दिया. बीको को अध्यक्ष नियुक्त किया गया.

काले छात्रों का घोषणा पत्र

यह विचार कि ब्लैक कॉन्शियसनेस पर आधारित एक नई राजनीति और संस्कृति पहचान के माध्यम से काले लोग स्वयं को परिभाषित और व्यवस्थित कर सकें और अपना भविष्य स्वयं निर्धारित कर सकें, काले लोगों के अधिकतम कैंपस में उन लोगों के बीच उत्पन्न हुआ जिन्होंने वर्षों से गोरों के अधीन रहने की निराशा का अनुभव किया है. कम समय में, SASO घनिष्ट रूप से 'ब्लैक पावर' और अफ़्रीकी मानवता के साथ पहचाने जाने लगा और प्रवासी अफ़्रीका से उत्पन्न विचारों द्वारा प्रबलित किया गया था. महाद्वीप पर और कहीं भी सफलता, जिसमें कई देश शामिल थे, जिन्होंने अपने उपनिवेशी स्वामियों से स्वतंत्रता प्राप्त की, इनसब का भी, ब्लैक कॉन्शियसनेस की भाषा में योगदान था.

SASO की ब्लैक कॉन्शियसनेस की परिभाषा
1971 SASO समाचार पत्र का कवर

" 1968 में हमने वह बनाना प्रारंभ किया जिसे अब SASO कहा जाता है...जो कि दृढ़ता से ब्लैक कॉन्शियसनेस पर आधारित था, जिसका सार यह था कि काला व्यक्ति उन मान प्रणाली में सकारात्मकता से देख कर अपना स्थान बनाए, जो उसे सामाज में सविशेष व्यक्ति बनाती है" - बीको

1971 SASO समाचार पत्र का कवर 
1972 SASO समाचार पत्र का कवर
1972 SASO समाचार पत्र का कवर
SASO न्यूज़लेटर का कवर, 1973
1975 SASO समाचार पत्र का कवर
स्टीव बीको BCM पर बात करते हैं

द ब्लैक पीपल्स कन्वेंशन

1971 तक, SASO का प्रभाव तिगुने शिक्षा कैंपस से परे फैल चुका था. लोगों की बढ़ती संख्या जो SASO के भाग थे, वह भी विश्वविद्यालय सिस्टम से बाहर निकल रहे थे और उन्हें एक राजनीतिक घर चाहिए था. SASO के लीडर अपने संगठन के उस नए खंड के संस्थापन हेतु आगे बढ़े जो व्यापक नागरिक समाज को अपनाएगा. बस इसी उद्देश्य के साथ ब्लैक पीपल्स कन्वेंशन (BPC) 1972 में लॉन्च किया गया था. BPC ने तुरंत उन काले कार्यकर्ताओं की समस्याओं को संबोधित किया, जिनके संघ अभी तक कानून द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं थे. इसके कारण नया संगठन स्थिरता से सुरक्षा बलों के साथ संघर्ष पथ में स्थापित किया गया. हालांकि, माना जाता है कि वर्ष के अंत तक इकतालीस शाखाएं बना दी गई थीं. गिरजाघर के काले लीडर, कलाकार, संगठित श्रमिक और अन्य तेज़ी से राजनीतिक रंग में ढलते जा रहे थे और 1973 के आंदोलन में कुछ प्रमुख व्यक्तियों पर प्रतिरोध लगने के बावजूद, ब्लैक कॉन्शियसनेस प्रतिनिधि गोरे लोगों की श्रेष्ठता की अवज्ञा में सबसे स्पष्टवादी, साहसी और उत्तेजक हो गया.  

BPC सदस्यता कार्ड
ब्लैक पीपल कन्वेंशन की पहली मीटिंग के मिनट

1974 में SASO और BPC के नौ नेताओं को अशांति पैदा करने का आरोप लगा था. आरोपियों ने सत्रह-महीने की सुनवाई का उपयोग सुनवाई में ब्लैक कॉन्शियसनेस की स्थिति बताने के प्लेटफ़ॉर्म के रूप में किया जिसे विचारों की सुनवाई के रूप में जाना जाता है. उन्हें दोषी करार दिया गया और कारावास के विभिन्न अवधियों तक की सजा सुनाई गई, हालांकि वे क्रांतिकारी षड्यंत्र का भाग होने के मुख्य आरोप से बरी कर दिए गए थे.  

SASO/BPC परीक्षण कवरेज
SASO/BPC परीक्षण कवरेज
BPC सदस्य
SASO/BPC कवरेज
1974 विवा फ़्रेलिमो रैली से पोस्टर

उनकी धारणा ने ब्लैक कॉन्शियसनेस आंदोलन को मज़बूत बनाया, बढ़ते प्रभाव के कारण दक्षिण अफ़्रीकी छात्र आंदोलन (SASM) का गठन हुआ, जो कि उच्च स्कूल स्तर को लक्षित और पर आयोजित था. SASM को 1976 के छात्र विद्रोह में केंद्रीय भूमिका निभानी थी. 

बार्नी पिट्याना, संस्थापक SASO सदस्य

1972 में, BPC के गठन का वर्ष, बीको को चिकित्सा स्कूल से निकाल दिया गया था. उनकी राजनीतिक गतिविधियां उनकी पढ़ाई पर हावी हो गई थीं. हालांकि, सबसे महत्वपूर्ण यह था कि उनके मित्र और सहयोगी बार्नी पिट्याना के अनुसार, "ज्ञान की उनकी व्यापक खोज चिकित्सा के क्षेत्र से परे थी". बीको बाद में दक्षिण अफ़्रीका विश्वविद्यालय के माध्यम से कानून की पढ़ाई के लिए जाने वाले थे.

स्टीव बीको का विधि पाठ्यपुस्तकों के लिए आदेश फ़ॉर्म

विश्वविद्यालय छोड़ते समय, बीको ने ब्लैक पीपल्स कन्वेंशन के विकास खंड, काला समुदाय प्रोग्राम (BCP) के डर्बन कार्यालय में बेन खोआपा के अंदर कर्मचारी के रूप में शामिल हुए. काला समुदाय प्रोग्राम, कई समुदाय-आधारित प्रोजेक्ट से जुड़े हुए थे और काली समीक्षा नामक वार्षिकी प्रकाशित करते थे, जो देश में राजनीतिक रूझान का विश्लेषण प्रदान करता था. 

काला समुदाय प्रोग्राम पुस्तिका 
BCP का सक्षिप्त विवरण
BCP प्रमुख, बेन खोआपा
86 बीट्रीस स्ट्रीट, BCP का पूर्व मुख्यालय 

"मुझे सही ढंग से समझने के लिए आपको यह मानना होगा कि कोई भय व्यक्त नहीं किए गए"

- बीको

बेन खोआपा, बीट्रीस स्ट्रीट सिर्का 2007
बीको का प्रतिबंध आदेश

जब मार्च 1973 में खोआपा, पिट्याना और अन्यों के साथ बीको को प्रतिबंधित किया गया, तब उन्हें डरबन से उनके गृहनगर, किंग विलियम टाउन निर्वासित किया गया था. SASO, BPC और BCP के कई अन्य नेताओं को सुनसान और पृथक स्थानों पर पुनर्स्थापित किया गया था. संगठनों की कार्य करने की क्षमता पर हमला करने के अलावा, प्रतिबंध लगाने का अभिप्राय एकल नेताओं की भावना को तोड़ना भी था, जिनमें से कई साथ लगे प्रतिबंध द्वारा अक्रीय हो जाएंगे और अंतः बेकार हो जाएंगे. 

उनपर लगे प्रतिबंध के बाद, बीको ने उन स्थानीय जैविक बुद्धिजीवी पर लक्ष्य साधा जिनके साथ वे उतने ही जोश के साथ जुड़े थे. जितना वह नेटल विश्वविद्यालय में अधिक अकादमिक बुद्धिजीवियों के साथ जुड़े थे. केवल इस बार फ़ोकस उन विकास के BC विचारों के व्यावहारिक आयाम की गहराई पर था, जो SASO और BPC के अंतर्गत बना था. उन्होंने काला समुदाय प्रोग्राम कार्यालय का किंग विलियम टाउन कार्यालय स्थापित किया (No 15 Leopold Street) जिसके वे शाखा कार्यकारी बने. संगठन का फ़ोकस स्वास्थ्य, शिक्षा, नौकरी रिक्तियां और समुदाय विकास के अन्य क्षेत्र पर था.

सं 15 लिओपोल्ड स्ट्रीट , BCP का पूर्व किंग विलियमस टाउन कार्यालय Town Offices of the BCP

बहुत समय नहीं बीता था जब उन्हें BCP के साथ कोई भी अर्थपूर्ण संबंध रखने से प्रतिबंध करने के लिए उनपर रोक लगाने का आदेश लागू किया गया था. बीको एक समय पर एक से अधिक व्यक्ति से नहीं मिल सके. वह किंग विलियम टाउन के आधिकारिक क्षेत्र से पुलिस की अनुमति के बिना नहीं निकल सके. व ह सार्वजनिक कार्यों में भाग नहीं ले सके और न ही उन्हें प्रकाशित या उद्धरित किया जा सका.

जैनेम्पिलो क्लिनिक, BPC क्लिनिक

उनपर और BCM के अन्य लोगों पर ये प्रतिबंध तथा उनके नियमित गिरफ्तारियों ने संगठन की प्रफुल्लता बढ़ाने के लिए संगठन के भीतर नेतृत्व की स्तरों की विविधता के विकास को बढ़ावा दिया. चुनौतियों के होते हुए भी, स्थानीय काला समुदाय प्रोग्राम कार्यालय ने ज़ानेम्पिलो क्लिनिक बनाने और संचालित करने के लिए अन्य उपलब्धियों सहित बिना सार्वजनिक निधिकरण के अपने समय का सबसे उन्नत समुदाय स्वास्थ्य केंद्र बनाना प्रबंधित करने में अच्छा प्रदर्शन किया. डां रामफ़ेले के अनुसार, “यह, यह दर्शाने हेतु कथन था कि हमारे लोगों के लिए सबसे मूल सेवाएं प्रदान करने के लिए सही योजना और संगठन से कितनी कम मेहनत लगती है.” डा. रामफ़ेले और डा. सोलोमबेला ने ज़ानेम्पिलो क्लिनिक में डाक्टर के रूप में कार्य किया था.

न्जवाक्सा से समुदाय सदस्य

बीको के कार्यालय के अंतर्गत अन्य प्रोजेक्ट में न्जवाक्सा लेदरवर्क प्रोजेक्ट, एक सामुदायिक शिशु - गृह और कई अन्य प्रस्ताव शामिल हैं. बीको 1975 में ज़िमेल न्यास निधि संस्थापित करने में भी सहायक थे, जिसे राजनीतिक कैदियों और उनके परिवारों की सहायता करने के लिए सेट किया गया था. ज़िमेल न्यास पार्टी संबद्धता के आधार पर भेदभाव नहीं करता था. इसके अतिरिक्त, बीको ने काले छात्रों की सहायता करने के लिए गिंस्बर्ग शिक्षा न्यास सेट किया था. यह न्यास भी उस समुदाय में पुनः निवेश करता था जिसने कभी उनकी शिक्षा में उनका साथ दिया था. 

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आभार: कहानी

Steve Biko Foundation:
Nkosinathi Biko, CEO
Y. Obenewa Amponsah, Director International Partnerships
Donna Hirscshson, Intern
S. Dibuseng Kolisang, Communications Officer
Consultants
Ardon Bar-Hama, Photographer
Marie Human, Researcher

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