1905

शाही साम्राज्य की झलकियां

Freer and Sackler Galleries

पूर्व एशियाई शासकों की फ़ोटोग्राफ़िक पोर्ट्रेट 
1905 टाफ़्ट मिशन से एशिया तक फ़ोटोग्राफ़ का एलिस रूज़वेल्ट लॉन्गवर्थ संग्रह

एशिया के शाही अदालतों में जाने के दौरान, एलिस रूज़वेल्ट लॉन्गवर्थ ने फ़ोटोग्राफ़िक पोर्ट्रेट की श्रृंखला एकत्रित की, जो उन्हें आधिकारिक राजनयिक उपहारों के रूप में दिया गया.  अपनी 1933 की आत्मकथा में, एलिस ने प्रत्येक उपहार के आस-पास की घटना को विस्तृत रूप से बताया, जिसने शाही चित्रकला के उपयोग में बहुमूल्य अंतर्दृष्टि प्रदान की.  इसके अतिरिक्त, हर शासक के भिन्न चित्र का परीक्षण, उनके युग के राजनयिक संदर्भ को समझने में शिक्षाप्रद थे.

"दोपहर के भोजन के एक दिन बाद, महारानी ने मुझे एक बहुत महीन कारीगरी वाली स्क्रीन दी, सुनहरे रंग का कपड़ा जिसपर सफेद गुलदाउदी से कारीगरी की हुई थी, एक लैकर बॉक्स और उनकी एक फ़ोटोग्राफ़ दी. अपनी जवानी के दिनों में की इन यात्राओं पर, उपहार देना एक नियम लगा करता था और उन्हें पाने का मुझे लालच सा हो गया था—इसमें बहुत मज़ा आता था. बल्कि, मैं बिल्कुल बेशरम हो गई थी. मुझे अपने "लूट" के सामान, जैसा कि परिवार में कहा जाता था, बहुत पसंद था. जापान में मुझे शाही उपहारों के साथ-साथ हर प्रकार के परिधान और प्रशंसक तथा शाही चिह्न दिए गए."

—एलिस रूज़वेल्ट लॉन्गवर्थ के क्राउडेड हार्स से कथन, (न्यूयॉर्क और लंदन: चार्ल्स स्क्रिब्नर्स सन्स, 1933) 

टोक्यो में एलिस का किया गया स्वागत उनकी यात्रा का सबसे खर्चीला स्वागत था. जापान ने पिछले वर्ष सैन्य जल और थल युद्ध में रूस को कड़ी शिकस्त दी, यह किसी पश्चिमी शक्तिशाली देश की किसी एशियाई देश द्वारा पहली हार थी. जापानी लोगों का संभ्रमित अभिमान था, यहां तक कि राष्ट्रपति थियोडोर रुज़वैल्ट ने स्वयं ही पोर्टस्माउथ में दोनों देशों के बीच शांति वर्ता रखी थी.

जापानी लोगों के पास हर वह कारण था जिससे उन्हें यह लगे कि रुज़वैल्ट उनकी ओर से हैं और उसका समर्थन शांति वार्ता के सफल नतीजे के लिए महत्वपूर्ण था. जापानी इसलिए विश्व स्तर पर वैश्विक शाक्तियों के साथ खड़े होने की अपनी क्षमता को साबित करने के लिए आमदा थे. एलिस को उपहार में दी गई छवियां इसलिए उचित पश्चिमी सैन्य पोशाक, यूरोपियाई कोर्ट के लिए शानदार गाउन के अनुकूल और जापानी सजावटी तत्व के निशान के बिना प्रबुद्ध लेकिन दृढ़ शासक दर्शाना चाहती थीं.

सभ्य व्यवहार के पश्चिमी विचार के अनुसार, फ़ोटो एक जोड़ी के रूप में उपहार में दी गई हैं, यह बताने के लिए कि जापानी लोगों ने एक संगमन की ईसाई अवधारणा को अपना लिया है. संक्षेप में, राष्ट्रपति की बेटी ने शासक की तस्वीर उपहार में दी थी जिन्होने अमरिका के मूल्यों को साझा किया और आश्रित राजनयिक सहयोगी हो सकती है.

"महारानी का चरित्र और शक्ति स्पष्ट थी और जब हम उनसे मिले, तब वह सत्तर वर्ष से अधिक होने पर भी आकर्षक थीं। किसी भी प्रकार से अपनी आयु की नहीं लगती थीं, उनकी छोटी, चमकदार और काली आंखें सचेत और तेज थीं; उनका दयाहीन सा लगने वाला, पतला मुँह एक कोने से ऊपर की ओर उभरा था, जो दूसरी ओर थोड़ा झुका हुआ था, जिससे उनका चेहरा जीवंत और यादगार लगता था।"

"अगली सुबह दो राजगृह अधिकारी प्रतिनिधि मंडल में आए और उन्होनें मुझे महारानी द्वारा भिजवाया गया छोटा काला कुत्ता भेंट स्वरूप दिया और दोपहर में उनकी तस्वीर आयी। वह उत्कृष्ट तस्वीर है, बिल्कुल "ऐतिहासिक बुद्ध" की तरह। ऐसा विचार उस समय मेरे मन में आया जब उनका चेहरा मेरे ज़हन में बिल्कुल तरोताज़ा था और और अब भी इसे देखने पर महल का वह गर्मी भरा दिन फिर से मेरे मन में ताजा हो जाता है। घुड़सवार सेना सीढ़ियों से खड़खड़ाहट की आवाज़ के साथ प्रतिनिधि मंडल तक पीले रंग की शाही कुर्सी पर रखी, वह तस्वीर लेकर पहुंची। वह किसी साधारण से पश्चिमी चमकदार फ़्रेम में थी, लेकिन जिस बक्से में वह रखी गई थी, वह धारीदार था और पीले रंग के शाही जरी वस्त्र के वस्त्र में लिपटा हुआ था, और उस तस्वीर को लिए हुए वे दो अधिकारी, उस कुत्ते को लाने वाले अधिकारियों से उच्च श्रेणी के थे।"

—एलिस रोसवेल्ट लॉगवॉर्थ, व्यस्त घंटे (न्यू यॉर्क और लंदन चार्ल्स स्क्रीबनर के बेटे, 1933) से उद्धरण

उनकी 1933 आत्मकथा के अनुसार, एलिस की साम्राज्ञी राजमाता के साथ औपचारिक बैठक अपेक्षाकृत शांत रही. अगले दिन सिक्सी की फ़ोटो का प्रदर्शन अधिक प्रभावी होगा लग रहा था. यह नाटकीय प्रस्तुति यह बताती है कि महज़ निजी निशानी के बजाय फ़ोटो सिक्सी की शाही उपस्थिति के विस्तार के अभिप्रेत था. किंग कोर्ट शाही निभृति के परंपरागत मानक और उनके प्रसंग के साथ सार्वजनिक रूप से निर्धारित पहुंच योग्य स्वतंत्र की नई

उम्मीद के बीच मार्गनिर्देशन करने का प्रयास करता था. कूटनीतिक उपहार देने की बाध्यता के बजाय कवर की गई पालकी में सिक्सी की तस्वीर का वितरण यह दर्शाता है कि कोर्ट सार्वजनिक रूप से शाही झलक का प्रदर्शन करने को तैयार नहीं था. सिक्सी की प्राथमिकता किसी भी कीमत पर गोपनीयता का प्रदर्शन - उन महिला की अद्वितीय चुनौती जिन्हे चीन और विदेश में अन्यायपूर्ण तरीके से उपपत्नी बनाकर रखा गया - बनाए रखना था. तस्वीर में, पारंपरिक किंग चित्रित तस्वीर के अनुकूल सिक्सी को जबरन सामने की मुद्रा में दिखाया गया है.

फ़ोटोग्राफ़र ने नाटकीय रूप से उसके नैन-नक्श को इस प्रकार दिखाया कि उसकी लगभग 70 वर्ष की आयु को कई दशक कम दिखाया जा सके. सिक्सी का उपहार अमेरिकी राष्ट्रपति की बेटी को रूज़वेल्ट पर यह प्रभाव डालने के लिए दिया कि बॉक्सर क्रांति के बाद चीन को मुआवज़ा देकर अलग कर दिया जाए. यूएस को चीन की स्थिति के प्रति अधिक संवेदनशील और आठ-देशों के संघ का वह सदस्य जो कि चीन के आर्थिक व्यवस्था को क्षतिग्रस्त करने वाला मुआवज़ा माफ करने वाले देशों में से एक माना जाता था. दिलचस्प रूप से, रूज़वेल्ट को 1908 में कांग्रेस ने हर्ज़ाने में कमी करने को कहा था, यही वह वर्ष था जब सिक्सी की मृत्यु हुई थी. 

सम्राट और उसके बेटे, जो अंतिम सम्राट बने, हमारे प्रतिनिधि मंडल के साथ-साथ उनके महल में एक रहस्यमय मौजूदगी.. हमारे आने के कुछ दिन बाद, हमने वहां यूरोपीय भाग की बिल्डिंग में उनके साथ दोपहर का भोजन किया. हमारा ऊपर के कमरे में स्वागत किया गया था और फिर झुक हुए सम्राट ने अपना हाथ नहीं लेकिन मेरा हाथ लिया और हम एकसाथ जल्दी से बहुत संकरी सीढी से उपेक्षा योग्य, छोटे से भोजन कक्ष में गए. हमने शाही मुकुट से अंलकृत कोरियाई बर्तनों और कटोरियों में परोसा गया कोरियाई भोजन किया. जिसका मैंने उपयोग किया उसके बाद मुझे उपहार में दिए गए और विदाई में सम्राट और मुकुट धारी राजकुमार ने मुझे अपनी फ़ोटो दी. वे दोनों में बहुत कम शाही अंदाज़ से कई ज्यादा दयनीय, भावहीन व्यक्ति थे.

—एलिस रोसवेल्ट लॉगवॉर्थ, व्यस्त घंटे (न्यू यॉर्क और लंदन चार्ल्स स्क्रीबनर के बेटे, 1933) से उद्धरण 

यात्रा में पहले, जब एलिस का टोकयो में खुले हाथों से स्वागत किया जा रहा था, तब वार विलियम हॉवर्ड टाफ़्ट के सचिव जापान के प्रधानमंत्री कतसुरा के साथ निजी विचार-विमर्श कर रहे थे, बातचीत मूल रूप से कोरिया पर जापान के मुक्त शासन और बदले में हवाई और फ़िलिपिन्स पर अमरीका की गतिविधियों को लेकर जापान के किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप को हटाने पर केंद्रित थी। एलिस की सिओल की यात्रा के दो महीनों के भीतर, जापानी सरकार ने 1905 संरक्षण संधि जारी की, जो प्रभावी रूप से कोरिया को अपने स्वयं के कूटनीतिक नीतियों का निर्णय लेने से रोकती थी। शासन करने का यह प्रयास 1910 में जापान द्वारा कोरिया को अधिकृत करने और शासक गोजोंग के पद से हटाने तक जारी रहा।  

अमरीकी राष्ट्रपति को जिन्हें वे जापान के बढ़ते हस्तक्षेप और प्रभाव के बीच एक मात्र रक्षक मानते थे, भेंट की गईं, यह दो तस्वीरें कोरिया की सरकार द्वारा अपनी परंपरागत शासन करने की छवि -जिसमें अभी भी उपुयक्त उत्तराधिकारी हैं- को दर्शाने का एक अंतिम आशाहीन प्रयास था। दुर्भाग्यवश इस समय तक अमरीकियों ने कोरिया के भाग्य को अपने प्रशांत वाले क्षेत्र की महत्वकांक्षा के साथ देखना शुरू कर दिया था। एलिस की 1933 की समृति भी निजी कूटनीति को लेकर सम्राट के प्रयास के प्रति अपनी उदासीनता नहीं छुपाती। शायद पश्च-दृष्टि में यह अमेरिका द्वारा उनकी दीर्घ-वर्णित कूटनीतिक प्रतिबद्धताएँ त्यागने को उचित सिद्ध करने का प्रयास था।

आभार: कहानी

Archivist — David Hogge
Research Assistant — Shelby Conley

क्रेडिट: सभी मीडिया
कुछ मामलों में ऐसा हो सकता है कि पेश की गई कहानी किसी स्वतंत्र तीसरे पक्ष ने बनाई हो और वह नीचे दिए गए उन संस्थानों की सोच से मेल न खाती हो, जिन्होंने यह सामग्री आप तक पहुंचाई है.
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