जादुई प्रणियों की देखभाल

The British Library

बहुत पुराने समय से लोग जादुई प्रणियों के अस्तित्व को मानते आए हैं. मध्य युग की बेस्टियरी में यूनिकॉर्न, ड्रैगन और फ़ीनिक्स जैसे कई जानवरों की अनूठी विशेषताओं के बारे में बताया गया है. इन तस्वीरों को देखना कुछ सुकून भरा है क्योंकि यह इंसान की कल्पना करने और असाधारण (कभी-कभी खतरनाक) विशेषताओं वाले जानवरों में विश्वास करने की शक्ति की याद दिलाती हैं.

‘कोई भी जादुई घर बिना खूंखार जानवरों की किताब के अधूरा है.’
प्रोफ़ेसर डंबलडोर, फ़ैंटास्टिक बीस्ट एंड व्हेयर टू फ़ाइंड देम

क्या दानव होते हैं

ज़मीन के नीचे रहने वाला दानव
अथनसियस किर्चर को '17वीं सदी के विद्वानों के बीच एक दानव' के जैसा बताया गया है. ये सच है कि अपनी किताब मंडस सबटेरैनियस (‘द अंडरग्राउंड वर्ल्ड’) में, उन्होंने बताया कि 14वीं सदी में सिसिलियन की गुफ़ा में एक बड़ा कंकाल मिला था.

यह दानव 90 मीटर लंबा था. इसे आम आदमी, बाइबल के दानव गोलियाथ, एक स्विस दानव और एक मॉरिशियन दानव के साथ तुलना करके दिखाया गया है.

मोहिनियां और जलपरियां

जादुई मोहिनी
ग्रीस की पौराणिक कथाओं में, मोहिनी का सिर औरत का और शरीर पक्षी का होता है. वे नाविकों को अपने गाने और आकर्षक शरीर से लुभाती हैं और उनका मांस खाने के लिए उन्हें जहाज़ों से घसीट कर ले जाती हैं. फ़्रेंच भाषा में उनका नाम (साइरन) जलपरी से मिलता है, जिनकी मछली-जैसी पूंछ होती है, जैसा कि फ़्रांस में बनाए गए इस मध्य युग के इस लेख में दिखाया गया है.

On the shore stands an onocentaur, with the body of a man as far as the navel, and the body of an ass below.

अ गेम बुक मर्मेड
यह दिलचस्प छोटी 'गेम बुक' शायद प्यार की निशानी के रूप में बनाई गई थी. इस गेम बुक के हिसाब से काल्पनिक और असली जानवरों के शरीर के हिस्सों के बहुत सारे टुकड़ों का इस्तेमाल करके अलग-अलग प्राणी बनाए जा सकते हैं.

इसमें एक जलपरी है, जिसमें पैर जोड़कर एक औरत बना सकते हैं या एक आदमी का सिर जोड़कर जलमानव बनाया जा सकता है.

‘सभी जादुई प्राणियों में से ड्रैगन शायद सबसे ज़्यादा मशहूर हैं. इन्हें छिपाना सबसे ज़्यादा मुश्किल है.’
फ़ैंटास्टिक बीस्ट एंड व्हेयर टू फ़ाइंड देम

इथियोपियन ड्रैगन
यूलिसे अल्ड्रोवंडी को ड्रैगनों का इस हद तक शौक था कि उन्होंने द हिस्ट्री ऑफ़ सर्पेंट्स एंड ड्रैगन्स नाम की सबसे ज़्यादा बिकने वाली किताब लिखी. अल्ड्रोवंडी के पास एक 'राक्षसी ड्रैगन' था, जो 1572 में इटली के बोलोनिया के पास मिला था. उनके निजी म्यूज़ियम में इसका शरीर संभालकर रखा गया था, जिसे 100 साल से ज़्यादा वक्त बीतने के बाद आज भी वहां देखा जा सकता है.

ये पेज दो तरीके के इथियोपियन ड्रैगन दिखाते हैं, जिनके बीच उनके पीठ के उभारों के आधार पर ही फ़र्क किया जा सकता है.

मकड़ियां

पक्षी खाने वाली मकड़ियां
मारिया सिबेला मेरियन एक अभूतपूर्व प्रकृति विज्ञानी थीं. वे पहली महिला थीं, जिन्होंने सन्1699-सन्1701 में 'सूरीनाम' के लिए एक वैज्ञानिक अभियान चलाया.

इसी सफ़र में उन्होंने पक्षी खाने वाली इस विशाल मकड़ी का पता लगाया. अफ़सोस की बात है कि उनके कुछ पुरुष साथियों उन पर कल्पनावादी होने का इल्ज़ाम लगाते रहे, जब तक कि सन् 1863 में यह साबित नहीं हो गया कि ऐसी मकड़ी सचमुच होती है.

एरेगॉग
'जिम के' की इस शुरुआती पेंटिंग में उन्होंने एरेगॉग के बारे में हर डरावनी बात बताई है. यह वही नरभक्षी मकड़ी है, जिससे हैरी पॉटर और रॉन वीज़्ली अंधेरे जंगल में मिले थे.

इसके पीछे सैकड़ों मकड़ियों के पैर दिखाए गए हैं, जिन्हें उनके आस-पास के नुकीले पेड़ों से अलग करना मुश्किल है.

मकड़ी के जाले के धागे हैरी की छड़ी की रोशनी में चांदी जैसे चमक रहे हैं.

गरुड़अश्व

एक योद्धा और उसका गरुड़अश्व
लुडोविको एरियोस्तो अपने महाकाव्य ऑरलैंडो फ़्यूरियोसो (सन् 1516) में गरुड़अश्व के बारे में बताने वाले पहले व्यक्ति थे.

इस तस्वीर में एक योद्धा रुज्जेरो ने अपना गरुड़अश्व एक पेड़ पर रस्सी से बांध रखा है. उन्हें पता नहीं था कि वह पेड़ भी एक योद्धा है, जिसे एक शैतानी जादूगरनी ने पेड़ में बदल दिया था.

बकबीक
'जिम के' की इस खूबसूरत पेटिंग में गरुड़अश्व बकबीक को हैग्रिड के बिस्तर पर लेटे हुए दिखाया है. उसके पंजों के नीचे मरे हुए नेवले हैं, जो उसका खाना है. डर्बीशायर के कॉल्के एबी में एक माली की झोपड़ी से प्रभावित होकर ही 'जिम के' ने हैग्रिड के केबिन का अंदरूनी हिस्सा बनाया है.

चमकीला नीला रंग कॉल्के के जंगलों में उगे हुए ब्लूबेल के फूलों की छाया दिखाता है.

‘हंस के आकार का बैंगनी-लाल रंग का एक पक्षी दिखाई दिया … इसकी चमकीली सुनहरी पूंछ थी, जो किसी मोर की पूंछ जितनी लंबी थी और सुनहरे पंजे …’
हैरी पॉटर और रहस्यमयी तहखाना

लपटों से निकलना
13वीं सदी की इस बेस्टियरी में 'फ़ीनिक्स' के बारे में खूब सारी जानकारी दी गई है. इस लेख के मुताबिक, इस पौरणिक पक्षी को यह इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसका रंग फ़िनिशियन बैंगनी है. यह मूल रूप से अरब से है और 500 साल तक जी सकता है.

पुराने ज़माने में ऐसा कहा जाता था कि फ़ीनिक्स टहनियों और पत्तियों से अपनी खुद की चिता तैयार करता है और अपने पंखों से उसकी लपटों को हवा देता है, ताकि आग उसे निगल जाए. नौवें दिन के बाद, यह अपनी ही राख में से फिर से पैदा होता है.

फ़्रेंच फ़ीनिक्स
क्या आप जानते थे कि फ़्रेंच लेखक गाय डी ला गार्डे ने फ़ीनिक्स पर पूरा एक अध्ययन किया था, जिसका नाम ला हिस्टॉयर एट डिसक्रिप्शन डू फ़ीनिक्स था? इस किताब की एक कॉपी ब्रिटिश लाइब्रेरी ने खास तौर पर चमड़े के क़ाग़ज़ पर प्रकाशित की थी. इसमें फ़ीनिक्स की एक हाथ से रंगी हुई तस्वीर है, जिसमें उसे जलते हुए पेड़ से निकलते हुए दिखाया गया है.

सिमर्ग
परंपरागत रूप से, सिमर्ग का सिर कुत्ते जैसा, कान नुकीले और पूंछ एक 'मोर' के जैसी बताई जाती है. फ़ारसी साहित्य में, इसे ज़्यादातर घूमते हुए पूंछ के शानदार पंखों के साथ उड़ान भरते हुए दिखाया गया है. बेस्टियरी में, लेखक ने सिमर्ग को इतना मज़बूत बताया है कि वो एक हाथी को भी उड़ा कर ले जा सकता है. ऐसा कहा जाता है कि यह 300 साल में एक बार अंड़ा देता है.

जिम के' का फ़ीनिक्स
'जिम के' के इस शुरुआती अध्ययन में फ़ीनिक्स के पंखों के शानदार रंगों को दिखाया गया है. ऐसा लगता है, जैसे यह तस्वीर पेज की सतह पर उड़ रही हो.

इस पेंटिंग में अंडे, आंख और फ़ीनिक्स के एक पंख के बारे में भी जानकारी दी गई है. इन सबसे कलाकार को तस्वीर पूरी करने में मदद मिली.

'यूनिकॉर्न इतना सफ़ेद था कि उसके चारों तरफ़ की बर्फ़ भूरी दिख रही थी.'
हैरी पॉटर और आग का प्याला

शेर जैसा यूनिकॉर्न
पौराणिक कथाओं में, यूनिकॉर्न सभी आकारों में मिलता है.

बायज़ेनटाइन लेखक मैनुअल फ़ाइल्स की एक कविता में यूनिकॉर्न को एक जंगली जानवर बताया था, जिसका काटना जानलेवा होता है: इसकी पूंछ सूअर जैसी और मुंह शेर जैसा था.

यूनिकॉर्न की पांच प्रजातियां
एक फ़ारसी फ़ार्मासिस्ट पियरे पॉमेट ने यूनिकॉर्न की कम से कम पांच प्रजातियों को पहचाना, जिसमें कैम्फ़र (अरेबिया का एक सींग वाला गधा) और पिरास्सोइपी (दो सींग वाला यूनिकॉर्न, साधारण यूनिकॉर्न के विपरीत) भी शामिल हैं. पॉमेट ने कहा कि यूनिकॉर्न का सींग 'अपनी खास विशेषताओं के कारण काफ़ी इस्तेमाल होता है, खास तौर पर ज़हर के ख़िलाफ़'.

यूनिकॉर्न का शिकार
लंबे समय से यूनिकॉर्न के खून, उसके बाल और सींग को इलाज करने की ताकत के लिए जाना जाता है. दो सींग वाले यूनिकॉर्न 'पिरास्सोइपी' को मारने और खाल उतारने की यह तस्वीर फ़्रांस के शाही परिवार के सर्जन एम्ब्रोस पैरे के एक अध्ययन में मिलती है. पैरे के कई सारे शौक थे. इस किताब के बाकी हिस्सों में मिस्त्र के ममी और ज़हरों के बारे में बताया गया है.

...उल्लू बोलने लगे, बिल्लियां म्याऊं करने लगीं और नेविल का पालतू मेंढक उसकी हैट के नीचे से ज़ोर-ज़ोर से टर्राने लगा.
हैरी पॉटर और अज़्काबान का कैदी

धूर्त बिल्ली
बिल्लियों को लंबे समय से जादू से जोड़कर देखा जाता है. 16वीं सदी के एक स्विस प्रकृतिवादी कॉनरैड गेस्नर ने बताया कि उनमें 'धूर्तता' होती है और 'ऐसा माना जाता है कि बिल्ली की तरफ़ एक बार देखने से इंसान बेहोश भी हो सकता है.' गेस्नर के काम का अंग्रेज़ी में सबसे पहले अनुवाद करने वाले एडवर्ड टॉप्सल ने बताया, 'जादूगरनियों की गुलाम आत्माएं ज़्यादातर बिल्लियों के आकार में होती हैं, इसीलिए इस जानवर को आत्मा और शरीर के लिए खतरनाक माना जाता है.'

शानदार उल्लू
हाथ से रंगी हुई यह तस्वीर जिसमें सफ़ेद उल्लुओं के जोड़े को दिखाया गया है, बर्ड्स ऑफ़ अमेरिका नाम की एक विशाल किताब में मिलती है. यह उत्तरी अमेरिका में मिलने वाले पक्षियों का असली आकार दिखाती है. यह किताब 3¼ फ़ीट (1 मीटर) लंबी है और नीलामी में बिकने वाली सबसे महंगी छपी हुई किताब है. सफ़ेद उल्लू ज़्यादातर उत्तरी अमेरिका और यूरेशिया के आर्कटिक इलाकों में पाए जाते हैं.

इस तस्वीर के सामने वाले हिस्से पर दिखाई गई मादा उल्लू के काले पंखों पर ज़्यादा धब्बे हैं

ज़हरीला मेंढक
सदियों से मेंढकों को जादुई कहानियों में शामिल किया जाता रहा है. उनका इस्तेमाल अच्छी किस्मत से लेकर मौसम की भविष्यवाणी करने के लिए किया जाता है. आम तौर पर घरेलू नुस्खों में भी उनके इस्तेमाल के बारे में बताया जाता है: उदाहरण के लिए, ऐसा कहा जाता था कि किसी मस्से पर मेंढक को रगड़ने से वह ठीक हो जाता है, लेकिन सिर्फ़ तब, जब आप मेंढक को कोंचते हैं और उसे मरने के लिए छोड़ देते हैं.

यहां दिखाया गया कूबड़ वाला मेंढक बहुत बड़ा है और उसे उसके बिना जुड़े हुए हाथों और पैरों से पहचाना जा सकता है. इसकी ज़हर ग्रंथियों से सफ़ेद रंग का ज़हर निकलता है.

आभार: कहानी
क्रेडिट: सभी मीडिया
कुछ मामलों में ऐसा हो सकता है कि पेश की गई कहानी किसी स्वतंत्र तीसरे पक्ष ने बनाई हो और वह नीचे दिए गए उन संस्थानों की सोच से मेल न खाती हो, जिन्होंने यह सामग्री आप तक पहुंचाई है.
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