मई घटनाक्रम

May Events Archive

"मौलिक कल्पना शक्ति"
मई 1968

1968: छात्रों द्वारा विद्रोह का वर्ष

अधिकांश विश्वविद्यालय शिक्षा प्रजातंत्रवादी युवा संस्कृति के साथ 1960 में आई. वियतनाम में हुए युद्ध ने दुनिया भर में युवा सक्रियतावाद को ट्रिगर कर दिया. अमेरिका और यूरोप में बड़े-बड़े प्रदर्शन हज़ारों युवाओं को सड़कों पर ले आया. विश्वविद्यालयों को भी चुनौती दी गई. बर्केले में, 1964 में छात्रों ने युद्ध और कैंपस में जातीय भेदभाव का विरोध करने के अधिकार की मांग की. फ़्रांस पूर्णतया शांत था, लेकिन अचानक 3 मई 1968 को विश्वविद्यालयों में विस्फोट हुआ. सोरबोन के मुख्य भवन पर हुए एक छोटे प्रदर्शन को पुलिस द्वारा दबा दिया गया और विश्वविद्यालय को बंद कर दिया गया. एक महीने तक प्रदर्शन बढ़ते रहे और उसके बाद हड़तालें हुईं. शीघ्र ही, पहली और आखरी बार नई शेष छात्र क्रांति ने एक सामान्य हड़ताल की प्रेरणा दी. पूरे देश के लगभग एक करोड़ लोग इस हड़ताल में शामिल हुए. शासन इस क्रांतिकारी लहर से डर गया. 

सोरबोन्ने बंद

सोरबोन्ने पर पुलिस ने कब्ज़ा कर लिया है. छात्र कक्षाओं में वापस जाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. पुलिस के डंडे विद्रोह करने वालों को सबक सिखा रहे हैं. छात्रों ने पेरिस की गलियों पर बिछे पत्थरों (गोलाश्मिकाओं) के क्रांतिकारी उपयोग का तरीका ढूंढ निकाला है. कई घायल हो गए हैं, लेकिन हर रोज लड़ाई में और अधिक शामिल हो रहे हैं.

सोरबोन्ने

नाकाबंदी की रात

10 मई की रात को, छात्रों, जिनके साथ अब उपनगरों से आए हुए कई युवा कार्यकर्ता शामिल हो गए हैं, संपूर्ण लैटिन क्वार्टर में पत्थरों से नाकाबंदी की. दमन इतना हिंसक था कि पूरा राष्ट्र सदमे में आ गया.

सोरबोन्ने में वापसी

सरकार पीछे हटती है और सोरबन्ने को पुनः खोलती है. छात्र वापस आते हैं लेकिन कक्षाओं में नहीं. एक बड़े ऑडिटोरियम में "महासभा" के लगातार सत्र हो रहे हैं. डेनियल कोह्न-बेंडिट नेता की भूमिका को अस्वीकार करते हैं लेकिन हर कोई उनकी बात नेता समझ कर ही सुनता है.

सॉरबोन में कोहन-बेंडिट बोलते हुए
युवा लोगों ने आवाज़ उठाई
ग्राफ़िटी हर जगह दिखाई देता है

खामोशी का टूटना

भाषण और लेखों का अचानक होने ने पेरिस में क्रांतिकारी संदेश को व्यापक रूप से फैला दिया. दीवारें चित्रों और पोस्‍टरों से भर गईं, गलियों में हजारों की संख्‍या में पर्चे बंटने लगे, नए समाचार पत्र और पत्रिकाएं आ गईं, और सबसे महत्‍वपूर्ण,लोगो सड़कों पर खड़े हो कर बात करने लगे, जहां गैसोलीन समाप्त होने के कारण कारें खड़ी थीं.

एक उत्सव के रूप में क्रांति: सोरबोन्ने के आंगन में एक पियानो

सामान्य हड़ताल आरंभ हो गई थी

छात्रों ने संघों और शेष राजनैतिक पार्टियों के साथ एक विरोध मार्च का आयोजन किया. 13 मई को आयोजित, इस विरोध मार्च ने लाखों पेरिस वासियों को गतिशील बनाया. छात्र क्रांति सरकार का सिरदर्द बन गई, जैसा कि नए छात्र समाचारपत्र "एक्शन" के कवर पर दिखाया गया है.

कर्मियों का विद्रोह

मई 13 के प्रदर्शन के बाद कर्मियों ने वापस काम पर जाने से इंकार कर दिया. वे सैकड़ों कारखानों में धरना देने लगे, दरवाजों में ताले लगा दिए गए और लाल झंडे लगा दिए गए. अर्थव्‍यवस्‍था ढह गई और देश में अव्‍यवस्‍था फैल गई.

आत्‍म-प्रबंधन

आंदोलन एकीकृत नहीं है और इसके नेताओं या विचारधाराओं का कोई एक समूह नहीं है. पड़ोस और कारखानों में कार्रवाई समितियां बन गईं हैं. उनके दीर्घकालीन लक्ष्‍य स्‍पष्ट रूप से परिभाषित नहीं हैं. लेकिन प्रबंधन और व्यवस्थापन के निर्रथक समाजिक पदानुक्रमों से असंतुष्टि एक आम विषय है. हर जगह पूंजीवाद और सोवियत साम्यवादी की उन्नतिशील विकल्प के रूप में समाजवादी आत्‍म-प्रबंधन पर चर्चा हो रही है.

कार्यकारी समितियां
संघ संघर्ष में शामिल हुए
इकोले डेस बिउक्स कला छात्रों की हड़ताल को दिखा रहे पोस्टर
24 मई का प्रदर्शन

द चारलेटी मीटिंग

सप्ताह भर चले प्रदर्शनों और दंगों के बाद, विपक्षों, संघों और छात्रों ने 27 मई को चारलेटी स्टेडियम में एक बहुत बड़ी राजनीतिक बैठक बुलाई. जैसे-जैसे सरकारी मंत्री हड़ताल में शामिल होते जा रहे थे, वैसे-वैसे राज्य की प्रणालियां बंद हो जा रही थीं. सरकारी की सेवा में केवल पुलिस और राज्य द्वारा नियंत्रित टेलीविज़न शेष रह गए थे.

जनता की शक्ति
रैट्स अबैनडन डे गौले
चार्ल्टे की बैठक

डी गौल्‍ल की वापसी

डी गौल्‍ल के सामने दो विकल्‍प था: या तो इस्‍तीफा दें या सत्ता में बने रहने के लिए जनयुद्ध की धमकी दें. 29 मई को, वे पेशेवर सेना की सहायता लेने के लिए जर्मनी गए. 30 मई को, वे वापस लौटे और एक भाषण दिया जिसमें उन्‍होंने गणराज्‍य के शत्रुओं से "गणराज्‍य के बचाव" का संकल्प लिया. उनके समर्थकों ने एक विशाल जवाबी प्रदर्शन करते हुए खुशी मनाई.

प्रतिक्रिया

डी गॉल ने दमन की धमकी दी, लेकिन यह भी वचन दिया कि लोगों की मांग को पूरा करने के लिए सुधार किए जाएंगे. गॉलिस्ट युवा आंदोलन ने डी गॉल के नेतृत्व में क्रांति को जारी रखने का दावा किया. साम्यवादी पार्टी और मुख्य यूनियन फ़ेडरेशन, CGT, ने अब हड़तालों को समाप्त करने के लिए कार्य किया.  

गौलिस्ट युवा पत्रक
नए सहयोगी: यूनियन + डे गौले
फ्लिंस में पुलिस चार्ज़
छात्रों का क्षेत्रों में पलायन

आंदोलन अंत

सरकार और संगठनों के संयुक्त दबाव के बावजूद जून में कुछ सबसे बड़ी उग्रवादी हड़तालें जारी रहीं. 9 जून को पेरिस के निकट ग्रामीण क्षेत्र, फ़्लिन में पुलिस ने विशाल रेनॉल्‍ट फ़ैक्‍ट्री में धरना देने वालों पर हमला कर दिया. छात्र संयंत्र बचाने के लिए पेरिस से आए थे, पर उनका आना व्‍यर्थ रहा. हाथापाई में एक हाई स्‍कूल के छात्र की मृत्‍यु हो गई. जल्‍दी ही अंतिम हड़ताल भी समाप्त हो गई. सरकार ने नए चुनावों की तैयारी की, जिसे वह आसानी से जीत गई. 1968 की मई की घटना समाप्त हो गई थी.

परिणाम

फ्रांस के लिए मई घटनाक्रम एक विशाल ऐतिहासिक क्रांतिकारी बदलाव था. हालांकि यह हारी हुई बाजी थी, लेकिन इसके कारण सांस्कृतिक बदलाव की पहल हुई, जिसने अधिक खुले और प्रगतिशील समाज की नींव रखी. 1981 में समाजवादी फ्रेंकोइस मिटरैंड का राष्ट्रपति के रूप में चुनाव इन बदलावों का दीर्घकालिक परिणाम था.

फ़्रैंकोइस मिटरैंड
आभार: कहानी

Creator — Andrew Feenberg

क्रेडिट: सभी मीडिया
कुछ मामलों में ऐसा हो सकता है कि पेश की गई कहानी किसी स्वतंत्र तीसरे पक्ष ने बनाई हो और वह नीचे दिए गए उन संस्थानों की सोच से मेल न खाती हो, जिन्होंने यह सामग्री आप तक पहुंचाई है.
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