दीवार का गिरना

Peter Millar

"The Wall will still be here in 50, or even 100 years"
पूर्वी जर्मनी के नेता ऐरिक होनेक्कर, 19 जनवरी 1989 (बर्लिन दीवार गिरने के 10 महीने पहले)
पश्चिम से दृश्य
'डेथ स्ट्रीप' 

13 अगस्त 1961 से जब पूर्वी बर्लिन की सैन्य टुकड़ी ने अधिग्रहित बर्लिन के सोवियत क्षेत्र को अलाइट क्षेत्र से अगल करने के लिए दीवार खड़ी करना शुरू किया, तब शहर दो असमान आधे हिस्सों में बंट गया. उन दोनों को एक 'डेथ स्ट्रीप' द्वारा अलग किया गया था जिसकी पहरेदारी पूर्वी जर्मन सीमा सुरक्षाकर्मी करते थे, जिन्हें आदेश दिया गया था कि अपने नागरिकों को अधिक समृद्ध पश्चिम की ओर भागने से रोकने के लिए अगर आवश्यकता पड़े तो वे घातक बलों का उपयोग करें.

पूर्वी जर्मनी के नेता ऐरिक होनेक्कर ने दीवार की ज़िम्मेदारी ली और दावा किया कि आवश्यकता होने पर दीवार सदी तक बनी रहेगी.

1989 की शुरुआत में, मास्को में मिखाइल गोर्बाचेव के सामाजिक और आर्थिक सुधार ने सोवियत खंड में असर दिखाना शुरू कर दिया, जहां हंगरी में उदारीकरण और पोलैंड में स्वतंत्र चुनाव हुए, जिसमें पूर्व में प्रतिबंधित एकजुटता आंदोलन बहुमत से जीता. अगस्त में हंगरी में छुट्टियां मना रहे पूर्वी जर्मनवासी खुले सीमा पारगमन से भाग कर ऑस्ट्रिया चले गए और पश्चिम जर्मनी की नागरिकता प्राप्त कर ली. बाद के महीनों में पूर्वी जर्मनवासियों ने पश्चिम जर्मन दूतावासों से प्राग और वॉरसॉ में शरण-स्थल की मांग की, जबकि पूर्वी जर्मन में आर्थिक और सामाजिक स्वतंत्रता के लिए ज़ोर-शोर से प्रदर्शन हो रहे थे. लीप्ज़िग में हर सोमवार को बड़े पैमाने पर जुलूस होने लगे.

एकजुटता के लिए चुनाव 'हाई नून' (सबसे उन्नत चरण) का प्रतिनिधित्व करते थे
वॉरसॉ में हुई गोलमेज बातचीत के परिणामस्वरूप पोलैंड में सुधार हुआ और एकता सरकार बनी
पूर्व सोवियत नेता लियोनिद ब्रेज़नेव के साथ होनेक्कर के मधुर संबंध, यहां दीवार के पश्चिमी ओर पर ग्राफ़िटी के रूप में पैरोडी की गई, सुधारवादी मिखाइल गोर्बाचेव के साथ उनके संबंध समान नहीं थे.

हंगरी वॉरसॉ संधि का पहला देश था जिसने पश्चिमी जर्मनी के लिए अपने दरवाज़े खोले. अपने 'समाजवादी पड़ोसी' क्षेत्र में छुट्टियां मना रहे सैकड़ों पूर्वी जर्मनवासियों ने मौके का फ़ायदा उठाया और ऑस्ट्रिया के रास्ते से पश्चिमी जर्मनी भाग गए. चेकोस्लोवाक सरकार ने हंगरी के लिए सरहद बंद कर दिए, जिसके कारण सैकड़ों पूर्वी जर्मनवासियों ने प्राग में पश्चिमी जर्मन दूतावास में शरण ले ली. समान घटना वॉरसॉ में भी तब तक होती रही जब तक अंततः पूर्वी बर्लिन सरकार ने नरम रुख अपनाया और 'देशद्रोहियों' (या विश्वासघातियों) को पश्चिमी जर्मनी भेजने के लिए विशेष सीलबंद रेलगाड़ियों की अनुमति दे दी. समस्या यह थी कि उन रेलगाड़ियों को पूर्वी जर्मनी के क्षेत्र से गुज़रना था. यह सब यह दिखाने के लिए था कि उन लोगों को उनके देश से 'निकाला' जा रहा है, लेकिन इसके परिणामस्वरूप लोगों में हंगामा मच गया और रेलगाड़ियों के गुज़रने वाले शहरों के स्टेशनों पर गुज़रती रेलगाड़ियों में छलांग मार कर चढ़ने की उम्मीद में लोगों की भीड़ इकट्ठी हो गई.

शरणार्थी रेलगाड़ी के ड्रेस्डेन पर रुकने और लोगों द्वारा उसपर छलांग लगाकर चढ़ने का प्रयास करने पर पूर्वी जर्मन परिवहन पुलिस की रिपोर्ट.
6 अक्टूबर, 1989 को, पूर्वी जर्मनी के 40वें वर्षगांठ की पूर्वसंध्या पर, कम्युनिस्ट पार्टी ने निष्ठा का प्रदर्शन करने के रूप में युवा सदस्यों की एक परेड का आयोजन किया, लेकिन सच्चाई कुछ और थी.
शहर के असंतुष्ट युवा चर्च के बाहर डेरा डाल कर बैठ गए...
...जिसकी पुलिस कड़ी निगरानी कर रही थी और स्टासी घुसपैठ कर रहे थे.
जहां होनेक्कर ने पैलेस्ट डेर रिपब्लिक में वॉरसॉ संधि नेताओं की मेजबानी की, वहीं नाराज़ लोगों की बाहर इकट्ठा हुई भीड़ 'गोर्बी, हमारी मदद करो' के नारे लगाने लगी.
सोवियत नेता ने होनेक्कर से कहा था कि 'जो देर से प्रतिक्रिया देते हैं, वह इतिहास में खो जाते हैं. लेकिन होनेक्कर ने यह नहीं सुना.
पुलिस और स्टासी भीड़ के साथ हिंसक से पेश आए.
पूर्वी बर्लिनवासियों के हिसाब से गोर्बाचेव उनके संभावित रक्षक थे.

अक्टूबर 6 के विरोध प्रदर्शन ने होनेक्कर शासन के अंत की शुरुआत की. बहाव का रुख बदल गया था.

अक्टूबर 9 को परिवर्तन के लिए 'नया मंच' का संविधान बड़े पैमाने पर नागरिकों का आंदोलन लिखने के लिए नाराज़ लोगों का एक समूह केट्जे हेवमेन, मानव अधिकारों के प्रचारक रोबर्ट की विधवा, के घर इकट्टा हुआ.
17 अक्टूबर को होनेक्कर ने इस्तीफ़ा दे दिया, लेकिन उनके लंबे समय से नामांकित उत्तराधिकारी इगॉन क्रेंज़ ने नाराज़ लोगों को शांत करने के लिए कुछ खास नहीं किया.
नाराज़ समूह के नए मंच ने बड़े पैमाने पर विरोध किया 
4 नवंबर को हज़ारो लोग सड़कों पर उतर आए
कुल मिलाकर 5 लाख से अधिक लोगों ने अधिक से अधिक नागरिक स्वतंत्रताओं के पक्ष में विरोध किया, लेकिन किसी ने भी दीवार के गिरने की बात नहीं सोची थी

इस दौरान लीप्ज़िग में, हर सोमवार विरोध जारी रहा, जिसमें शहर के अंदर के क्षेत्र के रिंग रोड के चारो ओर चक्कर लगाकर विरोध करने के लिए दसियो हज़ारों लोग अब सड़क पर उतर आए. उन्होंने घृणा किए जाने वाले स्टासी के विरुद्ध नारे लगाए और लोकतांत्रिक बदलाव और अनिवार्य सैन्य सेवा के अंत की मांग की. भीड़ में प्रमुख महत्व रखने वाले प्रसिद्ध व्यक्ति कर्ट मासूर थे, जो लिप्ज़िग के अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध कॉन्सर्ट हॉल गेवान्ढॉस के संगीत निर्देशक थे. होनेक्कर ने यहां तक कि मिखाइल गोर्बाचेव से नज़दीकी सोवियत बेस से सैनिक भेजने के लिए कहा. गोर्बाचेव ने इंकार कर दिया.

लिप्ज़िग में हर सोमवार 70,000 लोग सुधार की मांग करते हुए लेकिन इस डर के साथ सड़क पर उतर आए कि किसी भी समय उन्हें सोवियत टैंक कुचल सकता है
लोथर कोइंग, नए मंच लोकतांत्रीय विरोध आंदोलन के सदस्य ने अनिश्चितता पर विचार किया कि उनके विरुद्ध सशस्त्र बल का उपयोग किया जाएगा या नहीं
4 नवंबर को दसियों हज़ारो लोग पूर्वी बर्लिन के केंद्र में सुधार, गुप्त पुलिस और लोकतांत्रीय चुनावों की मांग करने के लिए एकत्रित हुए. फिर भी किसी ने जर्मन एकीकरण की बात तो दूर, दीवार का उल्लेख करने का भी साहस नहीं किया.

9 नवंबर की रात को, पूर्वी बर्लिन में एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में, पोलित-ब्यूरो के सदस्य गंथर स्कारनोबोसकी ने पश्चिम में यात्रा करने के लिए लिए गए निर्णय को गलत पढ़ लिया. बात वीज़ा और पासपोर्ट की थी लेकिन अपने बातों से दुविधा में फंस चुके गंथर ने अपने बातों को और बिगाड़ दिया और जो संदेश दुनिया के पास पहुंचा, पश्चिमी बर्लिन के टेलीविज़न और रेडियो के द्वारा पूर्वी बर्लिन में प्रसारित किया गया, वह यह था कि सीमाएं तुरंत खोली जाए, सेकड़ो फिर हज़ारो पूर्वी बर्लिनवासी बोर्नहोमर स्ट्रास चेकपॉइंट पर टूट पड़े. सीमा पहरेदार, जिनके पास उस आदेश के विपरीत होने का संदेश नहीं पहुंच पाया था, उन्होंने उन लोगों को सीमा पार करने दिया. बांध टूट गया था.

पश्चिमी बर्लिनवासी दीवार पर चढ़ गए और पूर्वी जर्मन सीमा पहरेदारों का मज़ाक उड़ाया. हज़ारो की भीड़ ज़िंदगी में एक बार होने वाले उत्सव के लिए पश्चिम क्षेत्र में चले गए.

दीवार पर उत्सव.
पश्चिमी बर्लिनवासियों की भीड़ ने पूर्वी बर्लिनवासियों का चेकपॉइंट चार्ली पर स्वागत किया. रातों-रात यह स्पष्ट हो गया कि दीवार में की गई दरार अब कभी भी भरी नहीं जाएगी.
पूर्वी बर्लिनवासियों ने सचमुच औज़ारों के साथ भविष्य अपने हाथों में ले लिया.
पूर्वी जर्मन सीमा पहरेदारों ने दीवार गिरानी शुरू कर दी 
1986 के क्रिसमस के दिन ब्रांडेनबर्ग द्वार पर और उसके आसपास बहुत बड़ा उत्सव मनाया गया, जहां पूर्वी और पश्चिमी बर्लिनवासियों ने अपने शहर के पुनरेकीकरण की खुशियां मनाई
आभार: कहानी

Curator — Peter Millar
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कुछ मामलों में ऐसा हो सकता है कि पेश की गई कहानी किसी स्वतंत्र तीसरे पक्ष ने बनाई हो और वह नीचे दिए गए उन संस्थानों की सोच से मेल न खाती हो, जिन्होंने यह सामग्री आप तक पहुंचाई है.
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