अप्रैल 1942 - जुलाई 1943

उनके विनाश से पहले ...

Auschwitz-Birkenau State Museum

यहूदियों का ज़ैग्लेबी डाब्रोस्की से ऑशविट्ज़ में निर्वासन

स्वतंत्रता के बाद बिर्केनाउ के खंडहरों से अद्वितीय फ़ोटोग्राफ़ी संग्रह वाला एक बक्सा मिला, संभावित रूप से उस क्षेत्र से जिसे कनाडा के रूप में जाना जाता है, जहां गैस चैम्बर में कत्ल किए गए यहूदियों का सामान रखा गया था. सैंकड़ों चेहरे: मुस्कुराते हुए, प्रसन्न, गहरे विचार में खोए, आनंदित, उदास. परिवार और मित्रों के साथ विवाह, जन्म के लिए छुट्टियां. वह दुनिया जो फ़िल्म पर हमेशा के लिए अमर हो गई थी. होलोकॉस्ट से पहले पोलिश यहूदियों की दुनिया. लगभग 2,400 फ़ोटो में से अधिकांश ने ज़ैग्लेबी के यहूदियों के परिवारों को अमर कर दिया: बेड्ज़िन, सोस्नोविक और आस-पास के क्षेत्रों से. उनमें से अधिकतम फ़ोटो लोगों की अलग-अलग स्थानों, विभिन्न परिस्थितियों, वर्ष के विभिन्न समय में प्रियजनों और मित्रों के साथ ली गई फ़ोटोग्राफ़ हैं. वहां शौकिया फ़ोटो और किसी पेशेवर फ़ोटोग्राफ़र द्वारा ली गईं फ़ोटो हैं. स्नैपशॉट और पोस्टकार्ड. फ़ोटोग्राफ़र ने वह बनाए रखा जिसे वह याद रखना चाहते थे: एक हनीमून, परिवार का इकट्ठा होना, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण दृश्य प्रतिदिन के जीवन से थे – सड़क पर चलना, खेलते हुए बच्चे और इत्मीनान के क्षणों का लुत्फ. यह संभव है कि फ़ोटो को शिविर में किसी एक ही परिवार या यहां तक कि एक घर में रहने वाले लोगों द्वारा और निश्चित रूप से ऐसे लोगों द्वारा लाया गया हो जिन्हें एक ही परिवहन में एक साथ निर्वासित कर दिया गया था. इस बात की अधिकतम संभावना है कि 'कनाडा' में कार्यरत कैदियों ने उन्हें किसी बक्से या सूटकेस में डाल दिया और उन्हें बस भुला दिया गया था.

ब्रोडर और कोह्न परिवार

अपने छः बच्चों – ब्रोंका, लेज्ब, ऐली एरॉन, हडासा, चेनोक और इड्का – के साथ ब्रोडर बेड्ज़िन में 52 मालाचोस्कीगो स्ट्रीट पर रहते थे. यही वह स्थान है जहां उनका स्टेशनरी और फ़ार्मेसी/तंबाकू स्टोर स्थित था.

1920 के दशक में, ब्रोडर फ़िलिस्तीन की यात्रा की योजना बना रहे थे."हमारे पिता की जाफ़ा में भट्टी थी. हमें हर चीज़ तैयार मिलती थी. हालांकि, जाने से कुछ समय पहले ही हमारी मां को हमारे पिता का एक टेलिग्राम मिला - कि जब वह कार्य कर रहे थे, तब एक लोहे का पीपा उनके पांव पर गिर गया और वे गंभीर रूप से घायल हो गए. उन्हें छः सप्ताह तक तेल अवीव में एक अस्पताल में रहना पड़ा." - ऐली ब्रोडर ने याद किया, जो यहूदियों के सर्वनाश के बाद जीवित अकेले पारिवारिक सदस्य हैं.

फ़ाज्ला ब्रोडर और बच्चे बेड्ज़िन में रहे. उनके पिता ने जाफ़ा में अपना व्यवसाय बेच दिया और वापस पोलैंड लौट गए.

1930 के दशक के प्रारंभ में, सबसे बड़ी बेटी, ब्रोंका का विवाह मेजर कोह्न से हुआ, जिनके अभिभावकों, नाहुम और डिना कोह्न का सोस्नोविक में मोड्ज़ेदोवस्का स्ट्रीट पर महिला परिधान स्टोर था. वे प्रायः अपनी छुट्टियां क्रायनिका में बीताते थे.

ब्रोंका और मेजर कोह्न के दो बच्चे थे: डेविड और रेनिया. बच्चों का जीवन छुट्टियों में शहर क चारों ओर घूमते हुए ली गई फ़ोटो की श्रृंखला में अमर हो गया. हालांकि, उनमें किसी पेशेवर फ़ोटोग्राफ़र द्वारा ली गई कोई भी फ़ोटो शामिल नहीं है. ऐली ब्रोडर, जिन्होंने अपने परिवार की कहानी सुनाई, वे एक उत्साही फ़ोटोग्राफ़र हैं. 2,400 फ़ोटोग्राफ़ के संपूर्ण एकत्रण में, उन्हें वे फ़ोटो मिलीं, जो उन्होंने स्वयं ली थीं. उन्होंने कहा: "मैंने बहुत-सी फ़ोटोग्राफ़ ली हैं. मेरे पास वोकलैंडर कैमरा था, फिर लीका कैमरा. काम से घर लौटते समय हुडका (हडासा) और ब्रोंका के बच्चों से मिलने पर मैंने उनकी फ़ोटो ली. मैंने उसे घर पर डेवलप किया और वह उन्हें दे दी." ब्रोडर और कोह्न के धार्मिक परिवार थे और उनके बच्चे बेड्ज़िन में यहूदी स्कूल में पढ़ने जाते थे. ऐली ब्रोडर अपना बचपन याद करते है: "जब तक मैं अपने परिवार के साथ रहता था, मैं धार्मिक था और येशिवा में पढ़ता था. लेकिन अपने अभिभावकों के साथ मेरे संबंध अच्छे नहीं थे. मेरे पिता बहुत सख्त थे. एक बार मैंने आइस स्केट्स को स्नानघर के नीचे छिपा दिया और जब मेरे पिता को वे मिले, जब उन्होंने वे किसी अन्य लड़के को दे दिए."

बच्चों को धार्मिक परिवारों में पालन-पोषण का उद्देश्य आध्यात्मिक जीवन व्यतीत करना था. बेटों से उनके पिता की परंपराओं को जारी रखने और ऐसे स्कूलों में पढ़ाई करने की अपेक्षा की जाती थी, जहां वे संतों का चरित्र सीखें और धार्मिक नियमों के अनुसार जीवन व्यतीत करने के लिए तैयार हों. ऐली ब्रोडर एक उत्साही साइकलिस्ट थे, हालांकि खेल-कूद और व्यायाम किसी कट्टरपंथी पालन-पोषण के आदर्शों से संबंधित नहीं थे. ऐली याद करते हैं कि यही प्रायः उनके और उनके सख्त पिता के बीच विवाद का कारण होता था.

1937 में, ऐली ब्रोडर का विवाह हो गया. उनके अभिभावक इस विवाह के खिलाफ थे. उनकी पत्नी एक रईस परिवार की नहीं थीं और उनके भाई साम्यवादी थे.

पोलैंड पर जर्मनी के हमले के बाद, ऐली ब्रोडर और उनकी पत्नी भागकर सोवियत संघ आ गए.

उनका परिवार बेड्ज़िन में रहा. उनके भाई, लेज्ब ब्रोडर, का युद्ध के आरंभ में फ़ैज्ला रिपज़टैन से विवाह हुआ. 1941 में, हडासा ब्रोडर का डेविड स्ज़्लेज़िन्गियर से हुआ.

1941 में, नाहुम और मेजर कोह्न को सोस्नोविक में बाज़ार के चौराहे पर फांसी दे दी गई थी.

लेज्ब ब्रोडर को 22 और 26 जून 1943 के बीच यहूदी बस्ती के समापन के दौरान SS के सदस्यों द्वारा गोली मार दी गई. डेविड स्ज़्लेज़िन्गियर को श्रमिक शिविर में भेजकर उनकी हत्या कर दी गई. परिवार के अन्य सदस्यों को ऑशविट्ज़ भेज दिया गया. यहूदियों के सर्वनाश में कोई भी नहीं बचा.

ऐली ब्रोडर और उनकी पत्नी इज़राइल में रहते हैं.

फ़ाज्ला ब्रोडर और उनके बच्चे: हडासा, फ़ाज्ला, इडका, लेज्ब, चेनॉक और ऐली. यह फ़ोटो फ़िलिस्तीन की नियोजित यात्रा से पहले पासपोर्ट के लिए ली गई थी. पहले से विवाहित सबसे बड़ी बेटी, ब्रोंका फ़ोटोग्राफ़ में नहीं है. बेड्ज़िन, 1926.
डिना और नाहुम कोह्न. क्रायनिका, 20 का दशक.
डिना और नाहुम कोह्न. क्रायनिका, 20 का दशक.
अपनी बेटियों के साथ नाहुम कोह्न. पोलैंड, 30 का दशक.
सोस्नोविक में मोड्ज़ेजोवस्का स्ट्रीट पर अपने अभिभावकों के स्टोर के सामने मेजर कोह्न. सोस्नोविक, 30 का दशक.
रेनिया और डेविड कोह्न. राजक्ज़ा, 1939.
डेविड कोह्न. पोलैंड, 1936.

"मैंने बहुत-सी फ़ोटोग्राफ़ ली हैं. मेरे पास वोकलैंडर कैमरा, फिर लीका कैमरा. काम से घर लौटते समय हुडका (हडासा) और ब्रोंका के बच्चों से मिलने पर मैंने उनकी फ़ोटो ली. मैंने उसे घर पर डेवलप किया और वह उन्हें दे दी."

ऐली ब्रोडर, जो यहूदियों के सर्वनाश के बाद परिवार के एकमात्र जीवित बचे सदस्य हैं

ऐली ब्रोडर द्वारा परिवार की अंतिम फ़ोटो. बाईं ओर से पहली पंक्ति: डेविड कोह्न, हडेसा ब्रोडर, रेनिया कोह्न; दूसरी पंक्ति: ब्रोंका कोह्न और बच्चों की आया. बेड्ज़िन, 1939.
फ़ाज्ला रिपज़टैन और लेज्ब ब्रोडर का विवाह. बाईं ओर से पहली पंक्ति: हडासा ब्रोडर, डेविड कोह्न, रेनिया कोह्न, फ़ाज्ला ब्रोडर, इडका ब्रोडर; दूसरी पंक्ति: ब्रोंका कोह्न और फ़ाज्ला ब्रोडर. बेड्ज़िन, 1941. फ़ोटोग्राफ़र जे. गोल्डक्वाज
हडासा ब्रोडर और डेविड स्ज़्लेज़िन्गियर की मंगनी की फ़ोटोग्राफ़. बेड्ज़िन, 1939 के बाद.

मलाख परिवार

चाना पेशिया और एरॉन जोसेफ़ मलाख, मकाओ माज़ोविकी से आए थे – जो वॉरसॉ के पास बसा एक छोटा-सा कस्बा है – जिसे उन्होंने 1905 में अपने आठ बेटों के साथ छोड़ा था और बेड्ज़िन आ गए थे. वहां उनके तीन बेटों ने एक फ़ैक्टरी लगाई जो पोलिश के मामूली सामान के उत्पादकों के लिए गोमांस आंतों से सॉसेज स्किन बनाती थी.

चौथा बेटा, वेल्वेल गोंद उत्पादन के लिए कच्चे माल का व्यापार करता था. इसमें गाय का रक्त शामिल था, जिसे वह कसाईखाने से खरीदकर अन्य उत्पादकों को बेचता था. युद्ध से पहले, दो भाई फ़िलिस्तीन चले गए. 1939 में, उनमें से एक वापस पोलैंड लौट आया, क्योंकि वह फ़िलिस्तीन में पेशेवर रूप से सफल नहीं हुआ था.

चाना पेशिया और एरॉन जोसेफ़ मलाख के आठ बेटों में से अगला राफ़ेल मलाख का उसकी कज़िन मल्का रचल ब्लम से विवाह हुआ. साथ में, वे बेड्ज़िन से डाब्रोवा गोर्निक्ज़ा चले गए, जो उस क्षेत्र के आस-पास का औद्योगिक शहर था, जहां निष्कर्षण उद्योग की प्रधानता थी. वहां अपने मित्र के साथ राफ़ेल मलाख ने अपने भाइयों की तरह एक समान 'किश्के' की फ़ैक्टरी लगाई, हालांकि कंपनी दिवालिया हो गई और राफ़ेल अपने पारिवारिक व्यवसाय में वापस आ गया. राफ़ेल और मल्का रचल मलाख के सात बच्चे थे: इछाक, ज़िस्ज़, फ़्रायमेट, साइमा, एस्टेरा, वोल्फ़ (अब ज़ीव) और अब्राहम.

ज़ीव मलाख, जो वर्तमान में इज़राइल में रहता है, अपने परिवार की कहानी सुनाता है: "हमारे परिवार में बहुत-से बच्चे थे. जब हम अपनी दादी, चाना पेशिया के पास पुरिम अवकाश में मिले थे, तब वहां हममे से बहुत से लोग मौजूद थे. दादी ने परिवार पर एक तानाशाह की तरह शासन किया. उन्होंने सुनिश्चित किया कि समृद्ध भाई मेरे पिता जैसे गरीब या दरिद्र भाइयों की सहायता करें. रोज़ शाम को पूरा परिवार बेड्ज़िन में हमारी मां के पास एकत्रित होता था. मेरे पिता सप्ताह में तीन से चार बार उनके पास पैदल चलकर आते थे. मेरे दादा जी स्वस्थ थे; रास्ची चश्मे के बिना पढ़ते थे, अभी तक उनके सभी दांत साबुत थे और वे रोज़ाना नहाते थे. बस उनके बाल कुछ सफेद हो गए थे. मिक्वेह के बाद, उन्होंने मछली खाई और उसके साथ वोडका पिया. उससे उन्हें पूरी संतुष्टि मिली."

राफ़ेल और मल्का के सबसे बड़ बेटे, ज़िस्ज़ और इछाक बहुत-ही प्रतीभावान घरेलू हरफनमौला थे. ज़ीव ने बताया कि युद्ध से पहले इछाक ने विभिन्न पुर्ज़ों से स्वयं एक फ़ोटो कैमरा बनाया था. संभवतः, उन्होंने बहुत सी पारिवारिक फ़ोटो भी लीं.

सभी भाई-बहन विभिन्न राजनीतिक संगठनों के सदस्य थे: इछाक और ज़िस्ज़ साम्यवादी थे, ऐस्टेरा, हास्कोमर हकायर से संबंधित थीं, फ़्रायमेट, गॉर्डोनिया में सक्रिय था, साइमा बुंद में और ज़ीव हास्कोमर हदाती में. ज़ीव बताता है: "घर में हमारी पांच पार्टियां थीं, लेकिन इसके बावजूद हम तब भी एक परिवार थे और हमारे बीच कोई भी आंतरिक सैद्धांतिक युद्ध नहीं थे." कुछ भाई-बहनों का उनकी राजनीतिक भागीदारी के कारण पोलिश अधिकारियों के साथ विवाद हो गया था. इछाक मलाख को एक बार लाल ध्वज दिखाने के कारण हिरासत में ले लिया गया था. 1937 में, साइमा को अपने पति डेविड क्रौज़े – डाब्रोवा गोर्निक्ज़ा में एक सक्रिय साम्यवादी – के साथ पोलैंड से भागना पड़ा क्योंकि उसे हिरासत में लिए जाने का खतरा था. वे दो वर्षों तक फ़्रांस में गैर-कानूनी ढंग से रहे. 1934 में, इछाक मलाख का सारा रूडा से विवाह हुआ और वे बेड्ज़िन चले गए.

1937 में उनके बेटे अब्राहम का जन्म हुआ.

सारा का परिवार वॉरसॉ का था, जहां उसके पिता यहूदी क्वार्टर में मछली के व्यापारी थे.

सारा मलाख एक दाई थीं और बेड्ज़िन में 'बिकुर कोलिम' यहूदी अस्पताल में काम करती थीं.

आरंभ में, इछाक मलाख ने अपने चाचा आबा की प्रिंटिंग स्थापना में कार्य किया, फिर अपने साले के साथ उसने अपनी स्वयं की कंपनी स्थापित की. ज़ीव ने बताया: "मेरे लिए, मेरे पिता मुझे व्यापारी बनाना चाहते थे. मैंने 14 वर्ष की आयु से कपड़े के स्टोर में कार्य किया, लेकिन मुझे वह पसंद नहीं आया इसलिए मैंने स्टोर में सभी ज़िपर व्यवस्थित करने प्रारंभ कर दिए. मुझे रंगों की भी बहुत अच्छी समझ थी. जब महिलाएं स्टोर में आती थीं, तो उन्हें सलाह देने के लिए मुझे बुलाया जाता था. उसके बाद, अपने चाचा की प्रिंट शॉप में कार्य किया." युद्ध समाप्त होने के थोड़े समय बाद ही ज़ीव का इटका से विवाह हुआ और वे सोवियत संघ चले गए.

इछाक, सारा और अब्राहम मलाख बेड्ज़िन में ही रहे और होलोकॉस्ट (यहूदियों के संहार) से नहीं बच पाए.

दादी, चाना पेशिया, की युद्ध से पहले मृत्यु हो गई और एरॉन जोसेफ़ की 1939 के बाद हत्या कर दी गई थी. स्थान अज्ञात है.

युद्ध से कुछ समय पहले, सायमा मलाख और डेविड क्रौज़ को फ़्रांस से निकालकर पोलैंड भेज दिया गया था और फिर वे सोवियत संघ चले गए. ज़ीव ने कहा: "1943 में अस्थानिक गर्भावस्था के कारण सायमा ने समरकैंड में मेरी बाहों में दम तोड़ा. जर्मन से भागते समय इटका और मैं साइबेरिया में तास्चकुमीर पहुंचें. वहां मैंने एक खान में काम किया. जब मुझे पता चला कि सायमा बीमार है, मैंने छुट्टी ली और बहुत बड़ा खतरा उठाकर उससे मिलने गया. समरकैंड में सायमा की मृत्यु हो गई और उसे वहीं दफनाया गया."

1939 में, ज़िस्ज़े मलाख सोवियत संघ चला गया. वह 1945 में पोलैंड वापस आया. ज़ीव, इटका और बच्चे 1946 में पोलैंड वापस आए. उन्हें वहां अपने 178-सदस्यों वाले परिवार में से केवल एक ही व्यक्ति मिला, जो ज़िस्ज़े था. उन्होंने पोलैंड को छोड़ने और फ़िलिस्तीन में बसने का निर्णय लिया.

ज़िस्ज़े की 1985 में इज़राइल में मृत्यु हुई.

ज़ीव और इटका हर्ज़लिया में रहे.

चाना और एरॉन मलाख अपने बेटों के साथ. बाईं ओर से पहली पंक्ति: जैनकील डेविड, एरॉन जोज़ेफ, चाना पेशिया, राफ़ेल हिर्स्ज़; दूसरी पंक्ति: आबा, इछाक मोर्देचाई, वेलवेल बेंजामिन, मोस्ज़े पिंकास, लाज़्ब, जेचिएल. बेड्ज़िन, 31 अक्टूबर 1928.

"हमारे परिवार में बहुत-से बच्चे थे. जब हम अपनी दादी, चाना पेशिया के पास पुरिम अवकाश में मिले थे, तब वहां हममे से बहुत से लोग मौजूद थे. दादी ने परिवार पर एक तानाशाह की तरह शासन किया. उन्होंने सुनिश्चित किया कि समृद्ध भाई मेरे पिता जैसे गरीब या दरिद्र भाइयों की सहायता करें.

रोज़ शाम को पूरा परिवार बेड्ज़िन में हमारी मां के पास एकत्रित होता था. मेरे पिता सप्ताह में तीन से चार बार उनके पास पैदल चलकर आते थे."

वोल्फ़ (अब ज़ीव) मलाख

मल्का रचल और राफ़ेल मलाख अपने बच्चों के साथ. बाईं ओर से पहली पंक्ति: वोल्फ़, अपनी गोद में अब्राहम को लिए हुए मल्का रचल, राफ़ेल हिर्स्ज़, सायमा, फ़्रामेट; दूसरी पंक्ति: एस्टेरा, इछाक, ज़िस्ज़े. पोलैंड, 1920 का दशक.

"घर में हमारी पांच पार्टियां थीं, लेकिन इसके बावजूद हम तब भी एक परिवार थे और हमारे बीच कोई भी आंतरिक सैद्धांतिक युद्ध नहीं थे." वोल्फ़ (अब ज़ीव) मलाख

इछाक, सारा और ज़िस्ज़े मलाख अपने मित्रों के साथ. सामने की ओर, बाएं से पहले इच्छे गटमैन, दूसरी सारा; पीछे की ओर, बाएं से चौथे अडेला स्कनिबर्ग और वोवा रिचकाइंड; दाईं ओर से इछाक. पोलैंड, 1920 का दशक.
अस्पताल में काम करते हुए सारा मलाख
मैटर्निटी/प्रसूति वार्ड में सारा और अब्राहम मलाख.
मलाख परिवार: गोद में अब्राहम को लिए सारा, इनके बगल में सारा के माता-पिता, राफ़ेल हिर्स्ज़ और इछाक
सारा, इछाक और अब्राहम मलाख. बेड्ज़िन, 29 दिसंबर 1942.
अब्राहम मलाख. बेड्ज़िन, 1943.

कोप्लोविच्ज़ परिवार

एरॉन कोप्लोविच्ज़ और उनकी पत्नी रायका के सात बच्चे थे. वे जूडी, मिरेले, हेल्सिया, ज़्लोमो, रोज़ा, सेशिया और सारा थे. एरॉन कोप्लोविच्ज़ एक रईस व्यापारी, बेड्ज़िन के पुराने बाज़ार के चौराहे में कपड़े की दुकान के मालिक थे. कोप्लोविच्ज़ एक धार्मिक परिवार था – एरॉन गेरेर-रब्बी चासीडिम से संबंधित थे, जो माउंट कैलवरी के ज़ैडिक से संबंधित चासीडिम का समूह है और यहूदी समुदाय के एक सम्मानीय सदस्य थे.

एरॉन और रायके के बच्चों का पालन-पोषण सख्त धार्मिक तरीके से किया गया था.

पुराने बाज़ार के चौराहे पर परिवार का स्टोर सबसे बड़ी बेटी, मिरेले चलाती थी, जिसकी युवावस्था में मृत्यु हो गई थी. उसकी अकाल मृत्यु के बाद, दुकान को ज़्लोमो चलाने लगा.

कोप्लोविच्ज़ ने नियमित रूप से कामिंस्क, क्रायनिका और राबका जैसे अपने पसंदीदा अवकाश गंतव्यों या लॉड्ज़ की यात्रा की जहां उनकी दूसरी बेटी, हेल्सिया ज़ाडमैन अपने परिवार के साथ रहती थी. चाना कोप्लोविच्ज़, एक संबंधी, को अभी उसका विवाह याद है, जो बेड्ज़िन में हुआ था. "उस समय, मैं ज़ाडमैन बहनों से बहुत ही विस्मित था, जो सुनहरे जूतों, लंबे परिधानों और बहुत सुंदर सुनहरे बालों की विग पहनकर लॉड्ज़ से विवाह में आई थीं. मुझे आज भी वे अच्छी तरह से याद हैं." एरॉन कोप्लोविच्ज़ की बेटियों ने भी अपने पिता के सख्त व्यवहार और वेशभूषा से पूरी तरह से उलट फ़ैशनेबल और मनोहर वेशभूषाएं पहनी थीं. अनेक फ़ोटोग्राफ़ में रोज़ा कोप्लोविच्ज़, एक प्रसन्न आधुनिक युवा महिला दिख रही थीं. जर्मन द्वारा पोलैंड पर कब्जा करने के बाद, सबसे बड़ी बेटी हेल्सिया ज़ाडमैन अपने पति और बच्चों के साथ बेड्ज़िन वापस लौट गई. पूरा परिवार तंग परिस्थितियों में रहा: "लगभग 30 लोगों वाला यह बड़ा परिवार घेटो में तीन छोटे कमरों में रहा. हेल्सिया और उसके बच्चे, सात बच्चों के साथ उसका बड़ा भाई जूडी और भाई-बहन सभी वहीं रहे. वह एक छोटा एक मंजिल वाला घर था." कोप्लोविच्ज़ की कपड़े की दुकान को ज़ब्त करके एक जर्मन सर्वेक्षक को दे दी गई.

यहूदी कंपनियों और दुकानों को आर्यन शैली में बदले जाने के कारण, स्वामी न केवल अपनी संपत्तियों से हाथ धो बैठे बल्कि अनेक यहूदियों ने अपनी नौकरी और आय भी खो दी. रोज़ा और सेशिया कोप्लोविच्ज़ ने एक दुकान में काम किया, जिस पर 'आर्यन' ने कब्ज़ा कर लिया था. इससे कुछ समय के लिए वे देश-निकाला से बचे रहे. चाना कोप्लोविच्ज़ ने लोगों को घेटो में रहने का प्रयास करने वाले लोगों को फिर से प्रयास करने के लिए पुनः कहना आरंभ किया: "मालाकोवकीगो स्ट्रीट पर मौजूद सर्वेक्षकों को लेखाकारों की आवश्यकता थी. मुझे अपने यहूदी पड़ोसियों में से एक का सर्वेक्षक मिला, जिसकी अपनी हार्डवेयर की दुकान थी. यह सर्वेक्षक एक सा मैन था और उसका नाम वोल्केल था. वह पांच यहूदी दुकानों के लिए ज़िम्मेदार था. मैंने इनमें से प्रत्येक दुकान में एक अलग पारिवारिक सदस्य को प्रभारी रख दिया. इस तरह, वे विदेशियों के कार्य के लिए ज़िम्मेदार विशेष SA अधिकारियों से विशेष अनुमति प्राप्त कर पाए. उन लोगों को श्रमिक शिविर में भेज दिया गया था, जिनके पास ऐसे अनुमति नहीं थी." अनेक जोड़ों का घेटो में विवाह हुआ. इसने पुरुषों को अस्थायी रूप से देश-निकाला दिए जाने से बचा लिया. उसी समय, ये विवाह उस प्रयास का प्रमाण थीं जो इन अमानवीय स्थितियों में सामान्य जीवन की एक झलक बनाने में किया गया था. रोज़ा कोप्लोविच्ज़ का विवाह 1943 के आरंभ में हुआ था. चाना का विवाह भी घेटो में हुआ था. दोनों के बच्चे हुए, लेकिन वह यहूदियों के संहार से बच नहीं सके. जब घेटो बंद किया जा रहा था, चाना और उनके पति एक बंकर में छिप गए. कुछ सप्ताह बाद उनकी भोजन आपूर्तियां समाप्त हो गई."हमने अपने गुप्तस्थान को छोड़ने का निर्णय लिया. हम उस सर्वेक्षक के सौजन्य से नहा-धोकर आराम कर पाए, जिसके लिए हमने घेटो में काम किया था. उसने हमें बताया कि रोज़ सुबह एक जर्मन रक्षक उसके घर के पास से 50-60 यहूदियों के समूह को अनाथाश्रम से घेटो लेकर जाता है. शाम को वह उन्हें वापस लेकर आता है. वे यहूदी थे जिन्होंने कथित "ऑफ़्रौमंगस्कमांडो" में काम किया और त्यागे गए घेटो को साफ करने के लिए काम किया. सर्वेक्षक ने उन्हें मेरी ओर से एक नोट दिया, जिसमें मैंने उन्हें हमें अपने समूह में स्वीकार करने के लिए कहा था. उस समय, यहूदियों की 'सफाई' के बाद, वहां दो विकल्प थे: मित्रवत गैर-यहूदी के साथ आर्यन के पक्ष में आश्रय ढूंढना या ऑफ़्रौमंगस्कमांडो में स्वीकार किया जाना. जब लोगों को घेटो ले जाया जा रहा था, तब हमें अलग से समूह में शामिल होने की सलाह दी गई थी. हमारा आगमन समन्वित किया जाना था. हमें उन लोगों का स्थान लेना था, जिन्होंने भागने का निर्णय लिया था. जर्मन सर्वेक्षकों की नामों की सूची का मिलान होना आवश्यक था – कोई भी गुम नहीं हो सकता था और कोई अतिरिक्त नाम दिखाई नहीं दे सकते थे. समय के साथ, समूह छोटा हो गया और केवल संपर्क वाले लोग शेष रह गए. मुझे श्रमिक शिविर में ले जाया गया." कोप्लोविच्ज़ परिवार के अधिकांश सदस्यों को ऑशविट्ज़ भेजकर उनकी हत्या कर दी गई थी. चाना कोप्लोविच्ज़ बताती हैं: "मेरे चाचा एरॉन कोप्लोविच्ज़ के परिवार को घेटो की सफाई के दौरान देश-निकाला दिया गया था. जिन लोगों को मैंने बाद में देखा वह केवल अपने पति और बच्चों के साथ जैलसिया थी. वे एक बंकर में छिप गए थे और मेरा उनसे ऑफ़्रौमंगस्कमांडो में काम करते हुए सामना हुआ. मुझे नहीं पता कि बाद में उनके साथ क्या हुआ. संभावित रूप से वही हुआ, जो दूसरों के साथ हुआ था. उन्हें ऑशविट्ज़ भेज दिया गया था." सेशिया एरॉन और रायका कोप्लोविच्ज़ की एकमात्र संतान थी, जो यहूदियों के संहार से बच गई थी. युद्ध के बाद वह इज़राइल जाकर बस गई और अस्सी के दशक में येरूसलेम में उसका निधन हो गया. इसी तरह, चाना कोप्लोविच्ज़ ने पोलैंड छोड़ दिया और 1997 में अपनी मृत्यु तक वह इज़राइल में रही.

रायका कोप्लोविच्ज़ और उसके बच्चे. बाईं ओर से: सेशिया, सारा और रोज़ा; दूसरी पंक्ति: ज़्लोमो, रायका, मिरेले और जेल्सिया. कामिंस्क, 1928.
बेड्ज़िन में पुराने बाज़ार के चौराहे पर कोप्लोविच्ज़ की कपड़ों की दुकान के सामने. प्रवेशद्वार पर रोज़ा कोप्लोविच्ज़. बेड्ज़िन, 30 का दशक.
रोज़ा कोप्लोविच्ज़ (बाएं से पहली) और सेशिया (बाएं से तीसरी). बच्चा संभावित रूप से जैलसिया ज़ाज्मैन के बेटों में से एक है. पोलैंड, 30 का दशक.
रायका और एरॉन कोप्लोविच्ज़. क्रायनिका, 30 का दशक.
रोज़ा कोप्लोविच्ज़, अपनी मां के साथ. क्रायनिका, 1937.
रोज़ा कोप्लोविच्ज़ (दाईं ओर). पोलैंड, 30 का दशक.
रोज़ा कोप्लोविच्ज़. पोलैंड, 30 का दशक.
रोज़ा कोप्लोविच्ज़. क्रायनिका, 1937.
रोज़ा कोप्लोविच्ज़ का विवाह. बेड्ज़िन, 1943.

"मेरे चाचा एरॉन कोप्लोविच्ज़ के परिवार को घेटो की 'सफाई' के दौरान देश-निकाला दिया गया था. जिन लोगों को मैंने बाद में देखा वह केवल अपने पति और बच्चों के साथ जैलसिया थी. वे एक बंकर में छिप गए थे और मेरा ऑफ़्रौमंगस्कमांडो में काम करते हुए उनसे सामना हुआ. मुझे नहीं पता कि बाद में उनके साथ क्या हुआ. संभावित रूप से वही हुआ, जो दूसरों के साथ हुआ था. उन्हें ऑशविट्ज़ भेज दिया गया था." चाना कोप्लोविच्ज़ (ज़ुबरमैन से विवाहित), एक संबंधी.

हुपर्ट परिवार

हुपर्ट के बारे में जो भी ज्ञात है, वह यह कि फ़ोटोग्राफ़ और अभिवादनों तथा नोट के आधार पर जो कुछ भी पुनरुत्पादित करना संभव था, वह स्वामियों ने उन पर लिखा है. ऐसा कोई व्यक्ति नहीं मिला, जिसे वह परिवार याद है.

हुपर्ट सिस्ज़िन से आए थे, जो पोलिश-चेक की सीमा पर बसा एक शहर है. रोज़ा और जोसेफ़ के छः बच्चे थे: आर्थर, एडॉल्फ़, फ़र्डिनैंड, मिज़ी और एक अन्य बेटा और बेटी जिनके नाम अज्ञात रहे. वह एक रईस परिवार था और उनकी एक आकर्षक जीवनशैली थी. बीस के दशक की फ़ोटोग्राफ़ न केवल परिवार की जीवन के व्यक्तिगत दृश्य दिखाती हैं, बल्कि उनके पास का विशेष वातावरण भी व्यक्त करती हैं. आर्थर हुपर्ट और उनकी पत्नी ग्रीट का विवाह ओपावा में 9 जनवरी, 1938 में हुआ था. 1938 में उनके बेटे के जन्म के बाद, वे ओलोमोक में रहे. आर्थर नियमित रूप से अपने बच्चे की फ़ोटोग्राफ़ लेकर विस्तृत वर्णन के साथ उन्हें अपने अभिभावकों को भेजते थे.

आर्थर, ग्रीट और पीटर हुपर्ट की 1944 की गर्मियों में हत्या कर दी गई थी.

29 अप्रैल को, पूरे परिवार को थेरेसींसटैड से बैरानोविज़ ले जाया गया था, जहां उनकी मृत्यु हो गई थी.

रोज़ा और जोसेफ़ हुपर्ट अपने बच्चों के साथ (सामने वाले बच्चे का नाम अज्ञात है). पीछे की ओर अपने इन भाइयों के बीच में मिज़ी है: एडॉल्फ़, आर्थर, फ़र्डिनैंड, चौथे भाई का नाम अज्ञात है. सिस्ज़िन, 30 का दशक.
एडॉल्फ़ हुपर्ट. चेकोस्लोवाकिया, 30 का दशक.
आर्थर हुपर्ट. चेकोस्लोवाकिया, 1930 का दशक.
मिज़ी हुपर्ट. सिज़िन, 1933.
मिज़ी हुपर्ट का विवाह. चेकोस्लोवाकिया, 30 का दशक.
फ़र्डिनैंड और हिल्डा हुपर्ट के विवाह की फ़ोटो. चेकोस्लोवाकिया, 30 का दशक.
आर्थर और ग्रीट हुपर्ट का विवाह. ओपावा, 1938. फ़ोटोग्राफ़र: फ़ोटोग्राफ़र रॉबर्ट स्पर्नी, ओपावा
पीटर, आर्थर और ग्रीट हुपर्ट का बेटा. सिज़िन, 1939. फ़ोटोग्राफ़र: फ़ोटोग्राफ़र एल्सनर, सिज़िन.
आर्थर और पीटर हुपर्ट. ओलोमॉक (चेकोस्लोवाकिया), सिरका 1940.
आर्थर, पीटर, ग्रीट हुपर्ट. ओलोमॉक (चेकोस्लोवाकिया), 1940.
पीटर हुपर्ट. ओलोमॉक (चेकोस्लोवाकिया), 1940.
आभार: कहानी

Teksty zaczerpnięto z książki "Zanim odeszli... Fotografie odnalezione w Auschwitz" pod red. Kersten Brandt, Hanno Loewy, Krystyna Oleksy.
Curator — Dr Maria Martyniak
Curator — Agnieszka Juskowiak-Sawicka
Excerpts taken from the book "Zanim odeszli... Fotografie odnalezione w Auschwitz" ("Before they perished... Photographs found in Auschwitz") by Kersten Brandt, Hanno Loewy, Krystyna Oleksy.
Curator — Dr Maria Martyniak
Curator — Agnieszka Juskowiak-Sawicka

क्रेडिट: सभी मीडिया
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