1936 - 1939

स्पेन का गृह युद्ध

"वह स्थान स्पेन था, जहां हमने यह सीखा कि एक सही व्यक्ति होने के बावजूद आपको हराया जा सकता है, शक्ति आत्मा को पराजित कर सकती है, कभी-कभी ऐसा समय भी आता है जब स्वयं साहस भी अपनी रक्षा करने में असमर्थ हो जाता है."
एल्बर्ट कैमस

स्पेन का गृह युद्ध 20 वी शताब्दी के निर्णायक क्षणों में से एक था. इस समय को विचारधाराओं और हथियारों की लड़ाई के रूप में जाना जाता है. यह एक निर्दयी युद्ध था जिसने एक राष्ट्र को तोड़कर रख दिया.

हालांकि यह लड़ाई जुलाई 1936 में प्रारंभ हुई थी लेकिन इसके बीज दशकों पहले बोए गए थे. जिस जनरल ने स्पेन के प्रजातांत्रिक रूप से चयनित सरकार के विरूद्ध विद्रोह किया था, उसका उद्देश्य वहां पुराने सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनैतिक समय को वापस लाना था. छोटी-मोटी लड़ाइयों ने एक भ्रातृहत्या संग्राम का रूप ले लिया जो तीन वर्षों तक चला. कई विवेचकों के अनुसार इस संग्राम के अंतर्राष्ट्रीयकरण ने इसे संपूर्ण यूरोप में फ़ासीवाद और लोकतंत्र के बीच की लड़ाई बना दी.

अमेरिकी राजदूत क्लॉड बोवर उस समय गलत नहीं थे जब उन्होंने यह दावा किया था कि वो द्वितीय विश्व युद्ध का 'पूर्वाभास' देख रहे हैं.  

राष्ट्रवादी विमानों के विरूद्ध लोकतांत्रिक समर्थकों की विमान-भेदी तोपें.

कभी समाप्त नहीं होने वाली कहानी

स्पेन के गृह युद्ध ने विश्वभर के इतिहासकारों, लेखकों, कवियों और फ़िल्मनिर्माताओं का ध्यान आकर्षित किया.

1975 में, फ़्रैंको की मृत्यु होने तक, विद्रोही समर्थक वर्णन वाला एकमात्र इतिहास शासन द्वारा लिखा गया था और विशेषकर ब्रिटिश और पूर्वी अमेरिकी इतिहासकारो जैसे विदेशियों का कार्य था.

आज, हालांकि, स्पेन के इतिहासकारों द्वारा एक बार फिर अपने राष्ट्र का इतिहास लिखा जा रहा है और दशकों तक उनके देश को आतंकित करने वाली लड़ाई के साथ समझौता करना पड़ रहा है.

एक निर्वासित राजा - Alfonso XIII

सभी स्पेनवासी कानून के समक्ष समान हैं.

गणतंत्र का संविधान

द्वितीय गणराज्य की उद्धोषणा

अप्रैल 1931 में, जनरल मिगेल प्रीमो द रिवेरा की सात वर्ष लंबी तानाशाही और किंग अल्फ़ोन्सो XIII की लड़ाई समाप्त होने के बाद स्पेन के पहले वास्तविक संविधान की उद्धोषणा हुई.

प्रजातंत्र वादी एवं समाजवादी नेताओं और हज़ारों ग्रामीण एवं शहरी कर्मचारियों के लिए नया शासन आधुनिकीकरण, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय का एक आशाजनक प्रतीक था. प्रजातंत्र-समाजवादी गुट ने बदलाव का महत्वाकांक्षी कार्यक्रम, श्रम और कृषि सुधार का प्रयास, गिरिजाघर एवं राज्य का अलगाव और सेना का अराजनैतिकरण प्रारंभ किया.

प्रचलित पक्ष

नवंबर 1933 में, एक दक्षिणपंथी गुट चयनित किया गया. यह पिछले दो वर्षों के सुधारों को बदल देता. अक्टूबर 1943 में, परा-फ़ासीवादी CEDA पार्टी के सत्ता में आने पर समाजवादियों ने हड़ताल कर दिया. ऑस्टूरियास में इसने एक सशस्त्र विद्रोह का रूप ले लिया. जनरल फ़्रैंको ने अफ़्रीकी सेना का उपयोग करके अत्यंत क्रूर्ता से विद्रोह को दबा दिया.

इसके बावजूद, वर्ष 1936 में 'प्रचलित पक्ष' कहे जाने वाले वामपंथियों और प्रजातंत्रवादियों के संघटन ने चुनाव जीता. मैनुअल अज़ाना के नेतृत्व में उन्होंने भावी सुधार लाने की प्रतिबद्धता दिखाई. अचानक से सब कुछ बदलने वाला था. 

प्रधानमंत्री मैनुअल अज़ाना

"(हम) लोकतंत्र को मज़बूत करेंगे."

मैनुअल अज़ाना

मैनुअल अज़ाना

मैनुअल अज़ाना 20 वी शताब्दी में स्पेन के सबसे प्रमुख राजनेताओं में से एक थे. द्वितीय लोकतंत्र के दौरान वे युद्ध मंत्री, दो बार प्रधानमंत्री और गृह युद्ध के दौरान राष्ट्रपति रहे. उन्होंने इज़्क्वेर्डा रिपब्लिकाना नामक राजनैतिक दल की स्थापना की और सैन्य एवं शैक्षिक सुधार के प्रति पूर्णतया प्रतिबद्धता दिखाई.  

जुलाई 1936 में, बारेस्लोना में, गली युद्ध के दौरान राष्ट्रवादी विद्रोहियों के विरुद्ध प्रजातांत्रिक सैनिक प्रतिरक्षा करते हुए
अज़ाना, फ़्रैंको और मोला के बीच युद्धरेखा खींची गई

आघात

फरवरी 1936 में चुनावों के बाद, वामपंथियों पर 'साम्यवादी विचारधारा' का प्रभाव देखकर दक्षिणपंथी नेता और उनके सेनापति डरने लगे. उन्होंने गोपनीय तरीके से विद्रोह की योजना बनानी प्रारंभ कर दी. फ़ैलेंज नाम से प्रचलित, बढ़ते हुए फ़ासीवादी आंदोलन के सदस्यों का वामपंथी कार्यकर्ताओं से गलियों में भिड़ंत होने लगा, राजनीति और समाज उथल-पुथल हो गया और राजनैतिक हिंसा बढ़ने लगी.

13 जुलाई को रिपब्लिकन असॉल्ट गार्ड द्वारा एक प्रमुख दक्षिणपंथी नेता जोस कैल्वो सोटेलो की हत्या कर दी गई. यह आक्रमण उनके साथी लेफ़्टिनेंट जोस कैस्टीलो की हत्या का बदला था. इस कांड ने एमीलियो मोला के नेतृत्व में सेनापतियों को आघात करने का बहाना मिल गया. 17 जुलाई को मोरोक्को में सैनिक मोर्चाबंदी की गई; तुरंत ही यह विद्रोह स्पेन के मुख्य राज्यों में फैल गया और देश को राजनैतिक, भौगोलिक एवं सैन्य दृष्टि से दो भागों में बांट दिया. 

अब पीछे हटना संभव नहीं: फ़्रैंको और मोला 
युद्धक्षेत्र में फ़्रैंको

एमीलियो मोला

1936 के आघात का मुख्य योजनाकर्ता और संचालक एमीलियो मोला था. उसने मोरोक्को युद्ध में भाग लिया था और 1930 में सुरक्षा मुख्य निदेशक के पद पर कार्य किया था. यह वही पद था जो प्रजातंत्रवादियों के साथ युद्ध का कारण बना. फ़्रैंको के साथ मिलकर उसने विद्रोही-अधिकृत स्पेन में क्रूर दमन में सहयोग की और इसके कार्यान्वयन की गुप्त योजना बनाई. जून 1837 में एक हवाई दुर्घटना में उसकी मृत्यु हो गई. 

“जिनकी विचारधारा हमसे नहीं मिलती है उन्हें बिना किसी नैतिक संकोच या झिझक के नष्ट कर, हमें उनमें भय पैदा करना चाहिए.”

जुलाई 1936 में एमिलीयो मोला

“फ़ासीवादियों की जीत नहीं होनी चाहिए! उनकी जीत नहीं होनी चाहिए!”

जुलाई 1936 में, साम्यवादी डालोरेस इब्रारूरी

युद्ध का अंतर्राष्ट्रीयकरण

इस आंतरिक युद्ध के भावनात्मक होने के बावजूद इस गृह युद्ध के निर्णय में अंतर्राष्ट्रीय सैन्य-बलों की महत्वपूर्ण भूमिका थी.

विश्व की प्रमुख शक्तियों के अहस्तक्षेप अनुबंध के अंतर्गत दोनों पक्षों को युद्ध सामग्री खरीदने और प्राप्त करना मना था.

हालांकि, इस अनुबंध का विशेषकर नाज़ी जर्मनी, इटली और सोवियत संघ द्वारा लगातार उल्लंघन किया गया. जहां एक ओर लोकतंत्रवादियों को सोवियत की सहायता के बावजूद युद्ध सामग्रियों और हथियारों को खरीदने में मुश्किलें आ रही थी वहीं दूसरी ओर राष्ट्रवादियों को फ़ासीवादियों द्वारा हथियारों का जखिरा लगातार प्राप्त हो रहा था. यह फ़्रैंको की विजय और लोकतंत्रवादियों के विनाश का मुख्य कारण था.

हिटलर और फ्रैंको

फ़ासीवादियों की एकता

युद्ध प्रांरभ होने पर हिटलर और मुसोलिनी ने मोरोक्को से स्पेन के मुख्य राज्यों की राष्ट्रवादी अफ़्रीकी सेना के स्थानांतरण के लिए हवाई जहाज़ भेजे. इस युद्ध में यह सर्वाधिक महत्वपूर्ण विदेशी हस्तक्षेप का उदाहरण था. इस हस्तक्षेप ने युद्ध के परिणाम पर बहुत बड़ा प्रभाव डाला. 

जर्मन कंडोर लीजन के सैनिक दस्ते को सलाम करते हुए हिटलर
अंतर्राष्ट्रीय ब्रिगेड के सदस्य

अंतर्राष्ट्रीय ब्रिगेड

अंतर्राष्ट्रीय ब्रिगेड वे स्वयंसेवक थे जो लोकतंत्र की रक्षा के लिए लडे़. उन्हें कोमिटर्न (अंतर्राष्ट्रीय साम्यवादी) द्वारा संगठित और भर्ती किया गया था. 35,000 से अधिक स्वयंसेवको ने ब्रिगेड और अंतर्राष्ट्रीय चिकित्सा सेवाओं में भाग लिया; इनमें से अधिकांश यूरोप के फ़ासीवादी तानाशाही से निर्वासित थे. फ़्रांस, जर्मनी, पोलैंड और इटली द्वारा निर्वासित होने के कारण भारी मात्रा में ऐसे कई सदस्य बने, हालांकि ब्रिटेन, अमेरिका और कैनडा से भी स्वयंसेवक आए.  

अब्राहम लिंकन ब्रिगेड में एक साथी सदस्य के साथ डग्लस रोच (दाएं) 

"तुम जीत जाओगे लेकिन हमें झुका नहीं पाओगे. तुम जीत जाओगे क्योंकि तुम्हारे पास बहुत बड़ी क्रूर सेना है; लेकिन तुम हमें विश्वास नहीं दिला पाओगे."

मिगल द उनामुनो

पिछली सहायक टुकड़ी में आतंक

इस विद्रोह ने दोनों हिस्सों में आतंक फैला दिया था. विद्रोहियों के राज्य में वामपंथ और लोकतंत्र से संबंधित लोगों को या तो गिरफ़्तार या मार डाला गया. इस 'शुद्धि' को सेना द्वारा अनुमोदित किया गया था जिनके अनुसार स्पेन को शुद्ध करने के लिए हिंसा अत्यंत आवश्यक थी.

लोकतांत्रिक राज्य में बड़े भू-स्वामियों, स्थानिय राजनैतिक नेताओं, उद्योगपतियों, सेना अधिकारियों, पादरियों और राजनैतिक अधिकार प्राप्त अन्य आघात के समर्थकों के विरुद्ध क्रांतिकारी हिंसा की लहर बह रही थी. 

मैड्रिड का युद्ध

1936 नवंबर तक विद्रोही सेनाएं मैड्रिड की सीमा तक प्रवेश कर चुकी थी. यह सोचकर कि शहर को बचाया नहीं जा सकेगा लोकतांत्रिक सरकार वैलेंसिया भाग गई. हालांकि, राष्ट्रवादियों की इस बढ़त को मैड्रिड को 'फ़ासीवादियों की कब्र' बनाने की दृढ़निश्चयता के साथ डटे भावुक नागरिकों और नागरिक सेनाओं द्वारा रोका गया. 8 नवंबर को 11 वी अंतर्राष्ट्रीय ब्रिगेड का मैड्रिडवासियो ने स्वागत किया. उनके आने से मैड्रिड के लोगों की चिंता दूर हुई. सोवियत द्वारा भेजी गई हथियारों की पहली सुपुर्दगी का भरपूर लाभ उठाते हुए, उन्होंने राजधानी को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. 

अपना घर खोने के बाद मैड्रिड की एक युवा लड़की गिरिजाघर में आश्रण लेते हुए

मलागा और गौडलजारा का पतन

1 फरवरी 1937 को मलागा के दक्षिणी शहर की सुरक्षा में कमी होने के कारण इतालवी और स्पेनी सेना ने उसपर कब्ज़ा कर लिया और साम्यवादियों को गिरफ़्तार कर उनकी बड़ी संख्या में हत्या कर दी.

इस सफलता से उत्तेजित मुसोलिनी ने फ़्रैंको को मैड्रिड के पूर्वी हिस्से पर दोहरा आक्रमण करने के लिए उकसाया. इतालवी सेना को जरामा से एलाका द हेनारेस की ओर जा रहे स्पेनी सेना की मदद से गौडलजारा पर हमला करना था.

हालांकि बहुत खराब मौसम और जोशपूर्ण लोकतांत्रिक प्रतिरोध के कारण इतालवी सेना जल्दी ही फंस गई.

फ़्रैंको द्वारा की गई 'शुद्धि' असफल होने पर क्रोधित मुलोलिनी आतंकित था क्योंकि उसकी गीली सेना आसानी से हार गई थी.

‘मिलिसियाना': लोकतांत्रिक क्षेत्र की महिलाएं

लोकतांत्रिक क्षेत्र की महिलाएं राजनैतिक रूप से बड़ै पैमाने पर युद्ध की तैयारी कर रही थीं, मौजूदा दलों, मजदूर संघों और सभी महिला राजनैतिक समूहों में भाग ले रही थीं.

महिलाओं ने भी हथियार उठा लिए थे. संपूर्ण नीले वस्त्र में सुसज्जित मिलिसियाना (महिला नागरिक सैनिक) की क्रांतिकारी और गैर-फ़ासीवादी प्रतिरोधक दल के रूप में एक मज़बूत छवि बन गई थी. लिंक को लेकर रूढ़िवादिता को समाप्त करने का यह निर्भीक कदम अधिक समय तक नहीं चल सका. जैसे-जैसे युद्ध आगे बढ़ता रहा वैसे-वैसे महिला घरों में वापस जाने लगीं, जहां से वे देखभाल, परिचर्या और औद्योगिक उत्पादन का काम संभालती थीं. 

वफ़ादर महिलाएं गलियों में गश्त लगाती हुई

उत्तर का युद्ध और ग्वेरनिका की बमबारी

कैथलिक धर्म को मानने के बावजूद देश का उत्तरी बास्क के क्षेत्र लोकतांत्रिको के प्रति वफ़ादार रहा. विद्रोहियों के बिल्बाव पहुंचने पर जर्मन कोंडोर ने

ग्वेरनिका नामक कस्बे पर ऐसी बमबारी की वह पूरी तरह नष्ट हो गया.

बास्क का मनोबल टूटने के बाद 1937 में बिलबाव का भी पतन हो गया. लोकतांत्रिको ने ब्रनेटे पर हमला करके दबाव को कम करने की कोशिश की

लेकिन राष्ट्रवादियों की अधिक संख्या होने के कारण उन्हें पीछे हटना पड़ा. विद्रोहियों ने अगस्त के अंत में सैंटाडर पर आक्रमण कर उनके उत्तरी क्षेत्र पर

हमला करना जारी रखा. लोकतांत्रिको ने ज़ारगोज़ा पर कब्ज़ा करने के उद्देश्य से ऐरेगॉन की ओर मोर्चा खोलकर जवाबी कार्रवाई की. अंतर्राष्ट्रीय ब्रिगेडरों ने क्युइंटो और बेलचिट को हथिया लिया लेकिन फिर भी सबसे बड़ी जीत अभी बाकी थी. अक्टूर तक बास्क और ऑस्टुरिया का क्षेत्र विद्रोहियों के कब्ज़े में आ चुका था. 

परेड करते हुए कोंडर लीजन
कोंडर लीजन के सिपाही
अपने सैन्य दस्ते को संबोधित करते हुए फ़्रैंको

फ़्रैंको

फ़्रांस्सिको फ़्रैंको बहामोंड का जन्म फ़ेरोल, ला कोरुना में, दिसंबर 1892 में हुआ था. वह एक सैनिक परिवार से था और एक युवा सैनिक तौर पर स्पेन अधिकृत मोरोक्को में उपनिवेशी युद्ध लड़ा था.

वह जुलाई 1936 में हुए सैन्य आघात के उन विद्रोही सेनापतियों के समूह से था जिन्होंने इसकी गुप्त रूप से योजना बनाई थी और इसे कार्यान्वित था, यह आघात बाद स्पेन के गृह युद्ध के रूप में परिवर्तित हो गया.

1 अक्टूबर 136 को फ़्रैंको को विद्रोही क्षेत्र में सैन्य बलों का सर्वश्रेष्ठ सेनापति और ‘राष्ट्रवादी’ राज्य का मुखिया बना दिया गया. 1 अप्रैल 1939 में सेना की जीत के बाद फ़्रैंको ने स्पेन पर एक तानाशाह के रूप में 1975 में उसकी मृत्यु होने तक शासन किया. 

एब्रो की सीमा पार करते हुए राष्ट्रवादी सैनिक दस्ते

सैन्य कार्रवाई: टेरूवल से एब्रो तक

लोकतांत्रिकों ने दिसंबर 1937 में टेरुवल पर अचानक हमला कर कब्ज़ा कर लिया लेकिन फ़्रैंको की सेना ने फरवरी 1938 वहां पुनः अपना कब्ज़ा जमा लिया. उसके बाद ऐरेगॉन में राष्ट्रवादी कार्रवाई की गई जिसने कतांत्रिक राज्यों के दो हिस्सो में विभाजित कर दिया. उसके बाद वेलेंसिया पर हमला किया गया. इस दबाव को कम करने के उद्देश्य से लोकतंत्रवादी और अंतर्राष्ट्रीय ब्रिगेडर एब्रो नदी की ओर कूच किया. यह युद्ध तीन महीनों तक चला जिसके बाद थकी हुई 'एब्रो की सेना' को नदी की दूसरी ओर खदेड़ दिया गया. 

अंतर्राष्ट्रीय ब्रिगेड का पीछे हटना

अंतर्राष्ट्रीय हस्तक्षेप ने इस युद्ध के परिणाम बहुत हद तक प्रभावित किया और इसका अंत भी तय किया.

सितंबर 1938 में म्युनिक सम्मेलन के दौरान ब्रिटेन और फ़्रांस ने चेकोस्लोवाकिया को हिटलर के सामने पूरी तरह आत्मसमर्पित कर दिया. स्पेन का भविष्य भी प्रसादन के अधीन था.

लोकतंत्रवादियों के पास जनतंत्रवादियों से सहायता मिलने की कोई आशा नहीं थी लेकिन फ़्रैंको द्वारा जर्मन और इतालवी सेनाएं हटाने लेने की उम्मीद के साथ प्रधानमंत्री जॉन नेग्रिन अंतर्राष्ट्रीय ब्रिगेड से अलग हो गए.

अंतिम समय में इस धोखे के प्रयास का अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा. 1938 की सर्दी में, फ़्रैंको ने कैटलोनिया को हथियाना चाहा और उसकी सेना 1939 में बैरिसलोना में प्रवेश कर गई. 

“आप गर्व के साथ जा सकते हैं. आप इतिहास हैं. आप महान है. आप लोकतंत्र की एकता और वैश्विकता के साहसिक उदाहरण हैं... हम आपको नहीं भूलेंगे और जब शांति के पेड़ पर पत्तियां खिलेंगी तब साहस से सुसज्जित स्पेन गणतंत्र की जीत वापस आएगी!” 

1938 अक्टूबर में अंतर्राष्ट्रीय ब्रिगेड को डोलोरस इब्रारूरी का अंतिम विदाई

शरणार्थी

फरवरी 1939 में कैटलुना के पतन के बाद फ़्रांस में सीमा में शरणार्थियों की भारी भीड़ ने प्रवेश किया. पांच लाख से अधिक लोकतांत्रिक नागरिक, सैनिक और फ़्रैंको की आगे बढ़ रही सेनाओं से भागे हुए अंतर्राष्ट्रीय ब्रिगेडर ने इस अपरिवर्तनीय यात्रा बना दिया.

सीमा की दूसरी ओर इन थके और डरे हुए लोगों को फ़्रांसीसी प्राधिकारियों ने नज़रबंदी शिविरों में कैद कर लिया. इनको दयनीय परिस्थितियों को सहना पड़ा; कई बिमारी और भूख से मर गए. इस शरणार्थियों में सबसे प्रसिद्ध एंटोनियो मचाडो था जो सीमा पार करने के कुछ ही दिनों बाद मर गया और उसे कोलियोर के समुद्र के पास दफ़ना दिया गया. उसकी सर्वाधिक प्रचलित कविताओं में से एक‘Caminante no hay Camio’(वहां चलना जहां रास्ता नहीं) शरणार्थियों की हानि, बहादुरी और बेघर होने की मार्मिक गथा का वर्णन करती थी.

शरणार्थी परिवार
फ्रांस में स्पेनिश शरणार्थी

हमने वह राह दिखी है जिसपर दोबारा चला नहीं जा सकता है

राही यहां कोई राह नहीं है केवल सागर की लहरें हैं.

 एंटोनियो मचाडो
राष्ट्रवादी विजय परेड

कसाडो आघात और युद्ध की समाप्ति

मार्च 1939 में लोकतांत्रिक सेना के कमांडर कर्नल कसाडो ने अपनी सरकार के विरूद्ध एक अव्यवस्थित विद्रोह किया. निरंतर प्रतिरोध की नीति से असंतुष्ट होने के कारण उसने सोचा कि वह बिना जवाबी कार्रवाई के शांति की बातचित कर सकता है.   उसकी इस पहल को फ़्रैंको द्वारा अस्वीकार कर दिया गया और उसे आत्मसमर्पण के लिए बाध्य किया गया. 27 मार्च को विद्रोही मैड्रिड में प्रवेश कर गए. चार दिनों बाद पूरा स्पेन उनकी मुठ्ठी में था. अगले दिन फ़्रैंको ने युद्धसमाप्ति की घोषणा कर दी.

गृह युद्ध समाप्त हो गया लेकिन हज़ारों भगौड़े शरणार्थियों और डरे हुए लोकतांत्रिक नागरिकों के लिए आतंक अब शुरू हुआ था. 

राष्ट्रवादियों की जीत का परेड देख रही महिलाएं
अंतिम खड़ा व्यक्ति: फ़्रैंको ने 30 वर्षों से अधिक वर्षों तक शासन किया
आभार: कहानी

Dr Maria Thomas, Author & Postdoctoral Researcher
Mike Lewis, CEO & Founder, Historvius.com

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