जड़ी-बूटी विज्ञान

The British Library

जड़ी-बूटी विज्ञान में पौधों के बारे में पढ़ा जाता है. आम तौर पर, वनस्पतिशास्त्री जादुई काढ़े और दवाइयां बनाने के लिए अलग-अलग जाति के पौधों को पहचानते हैं और उन्हें इकट्ठा करते हैं. इन पौधों को 'जड़ी-बूटी' कहते हैं. इनमें से कुछ ज़रूरी ज़ड़ी-बूटियों की किताबें लंदन की ब्रिटिश लाइब्रेरी में रखी हुई हैं, जिनमें एलिज़ाबेथ ब्लैकवेल की क्यूरियस हर्बल (लगाव के लिए बनाई गई) और लाजवाब टेंपल ऑफ़ फ़्लोरा भी शामिल हैं.

‘हफ़्ते में तीन बार वे महल के पीछे वाले ग्रीनहाउस में जड़ी-बूटियों के बारे में सीखने जाते थे...यहां वे सीखते थे कि किस तरह विचित्र पौधों और फफूंदियों की देखरेख की जाए और किस तरह उनका इस्तेमाल किया जाए.’
हैरी पॉटर और पारस पत्थर

कल्पेपर्स हर्बल
निकोलस कल्पेपर बिना लाइसेंस दवा बनाते और बेचते थे. वह एक 'रक्षक-जादूगर' थे जिन्हें पेशेवर चिकित्सा करने वाले जादूगर पसंद नहीं करते थे. सन् 1642 में, जादू का इस्तेमाल करने के लिए एक बार उन पर मुकदमा भी चला था, लेकिन बाद में उन्हें छोड़ दिया गया. मूल रूप से दी इंग्लिश फ़िज़िशियन, के नाम से प्रकाशित हुए ‘कल्पेपर्स हर्बल’ में दवाओं के रूप में इस्तेमाल की जाने वाली जड़ी-बूटियों की एक लंबी सूची है जिसमें उन्हें इस तरह लेने के तरीके बताए गए हैं जिनसे उनका असर सबसे ज़्यादा हो.

जे के रोलिंग ने निकोलस कल्पेपर के जड़ी-बूटी संग्रह से प्रेरणा लेकर अपनी जड़ी-बूटियों और जादुई काढ़ों के नाम रखे हैं.

द प्लान्ट कलेक्टर
गहरार्डो सिबो एक इतालवी प्रकृति विज्ञानी थे, जिन्होंने अपनी पौधे इकट्ठा करने वाली यात्राओं की यह तस्वीरों वाली डायरी बनाई. दूसरे कलाकारों से काम करवाने वाले वनस्पतिशास्त्रियों से अलग, उन्होंने खुद ये तस्वीरें बनाईं. खास तौर पर, सिबो ने जड़ी-बूटी इकट्ठा करने की जगह, दिन और घंटे भी नोट किए.

इस पेज पर दो व्यक्तियों (जिनमें से एक सिबो खुद हैं) को एक कुल्हाड़ी, एक हंसिया और एक बोरी के साथ किसी इतालवी पहाड़ी पर नमूने इकट्ठे करते हुए दिखाया गया है.

बागवानी के जादुई औज़ार
हड्डी और सींग से बने ये औज़ार, खास तौर पर बुवाई और कटाई के लिए इस्तेमाल किए जाते थे. कई पौधों को न सिर्फ़ दवाई के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए बल्कि उनकी अलौकिक शक्तियों के लिए उगाया जाता है, इसीलिए उन्हें इकट्ठा करने के लिए इस्तेमाल होने वाली रीतियां भी बहुत ज़रूरी होती हैं.

माना जाता है कि सींगों से बनाए गए औज़ार धरती को देवलोक से जोड़ते हैं. क्योंकि सींग हर साल गिरते और उगते हैं, इसलिए उन्हें पुनर्जन्म और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है.

एवलिन
जॉन एवलिन को आज सबसे मशहूर डायरी लिखने वाला माना जाता है, लेकिन वे एक नौसिखिया वनस्पतिशास्त्री भी थे. उनकी ज़्यादातर ज़िंदगी बागवानी के एन्साइक्लोपीडिया का इतिहास लिखने में चली गई. हालांकि, वह इतिहास कभी प्रकाशित नहीं हो पाया. सन् 1645 में, उन्होंने यूरोप के सबसे पुराने वनस्पति बाग से पौधों के नमूने लिए और उन्हें सुखाकर यह एल्बम बनाया.

'हैरी को गीली मिट्टी और खाद की खुशबू आई, जो छत से लटके कुछ बड़े, छाते के आकार के फूलों की तेज़ खुशबू से मिल गई.'
- हैरी पॉटर और रहस्यमयी तहखाना

शैतान की जीभ
पारंपरिक रूप से, चीन में ज़ड़ी-बूटी वाली दवाई का इस्तेमाल पौराणिक सम्राट शेन नोंग (दैवीय किसान) के साथ शुरु हुआ था. तस्वीरों से भरी इस किताब में ज़हरीले और दवाई के तौर पर इस्तेमाल होने वाले पौधों के बारे में बताया गया है.

यह शैतान की जीभ है, जिसे कोन्जैक, जादुई लिली और शैतान का पंजा भी कहा जाता है. आज, शैतान की जीभ का इस्तेमाल वज़न घटाने की दवाइयों और चेहरे की मालिश के उत्पादों को बनाने में किया जाता है. यह टाइटन अरम की ही प्रजाति का सदस्य है, जो धरती पर सबसे बुरी गंध वाला पौधा है. इसकी महक सड़े हुए मांस की तरह होती है.

सांप काटने के इलाज

सांप काटना
'सेंटॉरी' नाम के एक पौधे से सांप काटने का इलाज किया जाता है. जड़ी-बूटी विज्ञान की इस किताब के मुताबिक, दो पौधों सेंटॉरिया मेजर और सेंटॉरिया माइनर का नाम सबसे महान सेंटॉर 'चिरॉन' के नाम पर रखा गया है. वह एक चिकित्सक और ज्योतिषी के रूप में जाने जाते थे.

इस तस्वीर में, चिरॉन इन पौधों को चिकित्सा के देवता 'एस्क्लेपियस' को देते हुए दिखाई देते हैं. एक सांप उनके पैरों के नीचे रेंग रहा है.

सांप के काटने का इलाज करने वाला पौधा
इस शानदार रूप से सजाई गई जड़ी-बूटियों की किताब को सन् 1440 के करीब उत्तरी इटली के लोम्बार्डी में बनाया गया था. इसके हर पेज पर कई तरह के पौधों की ऐसी तस्वीरें बनाई गई हैं, जो देखने में बिल्कुल असली लगती हैं. इन तस्वीरों के साथ छोटे-छोटे नोट भी लिखे गए हैं, जिनमें पौधों के नाम का मतलब समझाया गया है. यहां एक सांप के काटने का इलाज करने वाला पौधा दिखाया गया है, जिसे, ड्रैगनटी, सर्पेंटेरिया और विपेरिना के नाम से भी जाता है. ये सब नाम इसकी उस खूबी की तरफ़ इशारा करते हैं, जिससे सांप के काटने का इलाज होता है.

'जड़ों के बजाय ज़मीन से एक छोटा, कीचड़ में सना, बहुत ही बदसूरत बच्चा बाहर निकला. उसके सिर पर पत्तियां उग रही थीं. उसकी चमड़ी हरी थी और उस पर चकत्ते पड़े हुए थे. वह पूरा ज़ोर लगाकर चिल्ला रहा था.’
<i>हैरी पॉटर और रहस्यमयी तहखाना</i>

मंत्र कवच पौधे को उगाना
मध्य युग की एक कहानी के मुताबिक, मंत्र कवच पौधे सिरदर्द, कान दर्द और पागलपन ठीक कर सकते हैं. लेकिन, उनकी जड़ें इंसानी रूप में बढ़ती हैं और वे खींच कर निकालने पर चीखते हैं.

15वीं सदी के इस लेख में इस पौधे को उगाने का सबसे सुरक्षित तरीका बताया गया है, जिसमें रस्सी के एक सिरे को पौधे से और दूसरे सिरे को कुत्ते से बांधा जाता है. कुत्ते को भोंपू बजाकर या मांस से ललचाकर मंत्र कवच पौधे को घसीटते हुए आगे बढ़ने के लिए उकसाया जाता है. मंत्र कवच के तने से निकले हुए कटे-फटे हाथ, शरीर के अंग काटते समय बेहोशी की दवा के तौर पर इसके इस्तेमाल की तरफ़ इशारा करते हैं.

The dog would be encouraged to move forward by sounding a horn or by enticing it with meat, dragging the mandrake with it.

The severed hands on the mandrake’s stems denote its use as an anaesthetic during amputations.

नर और मादा मंत्र कवच
जानकारी से भरे इस लेख में, रोमन सेना के एक डॉक्टर 'पेडानियस डायोस्कोराइड' की रचनाओं का अरबी अनुवाद है. डायोस्कोराइड नर और मादा मंत्र कवचों के बीच अंतर करने वाले पहले लोगों में से थे. कुदरत पर भरोसा रखने वाले हम जैसे लोगों के लिए यह अफ़सोस की बात है कि आधुनिक विज्ञान इस पहचान को नकारता है. एक ही पौधे के दो अलग-अलग लिंगों के बजाय भूमध्यसागरीय पौधों की एक से ज़्यादा प्रजातियां हैं.

मंत्र कवचों पर 'जिम के' का अध्ययन
इस शुरुआती स्केच में 'जिम के' ने एक शिशु मंत्र कवच पौधे के साथ एक व्यस्क मंत्र कवच पौधा दिखाया है. ऐसा लगता है जैसे यह स्केच असल ज़िन्दगी में देखे किसी पौधे से प्रेरणा लेकर बनाया गया हो: 'जिम के' पहले वनस्पतियों के शाही बगीचे 'क्यू' में क्यूरेटर थे.

पौधे की जड़ें बड़ी आसानी से बड़े मंत्र कवच पौधे का शरीर बनाती हैं, जिसके सिर से पत्तियां निकल रही हैं.

जिम के' के मुताबिक, जड़ से शिशु मंत्र कवच की रीढ़ की हड्डी बनती है.

मशहूर जड़ी-बूटियां

जेरार्ड्स हर्बल
जॉन जेरार्ड एक जानेमाने जड़ी-बूटी शास्त्री थे, जिनका सबसे मशहूर लेख द हर्बल या जनरल हिस्टरी ऑफ़ प्लांट्स है. लंदन के होलबर्न में जेरार्ड का खुद का बगीचा था. उन्होंने वहां हर तरीके के पौधे उगाए जिनमें आलू जैसे विदेशी पौधों के नमूने भी शामिल थे. उनके लेख हर्बल में 1800 से ज़्यादा लकड़ी पर तराश कर बनाए गए नमूने हैं, जिनमें से ज़्यादातर कुछ वक्त पहले जर्मनी में छपी एक किताब से (बिना बताए) लिए गए थे.

द गार्डन ऑफ़ आइक्स्टेट
यह वनस्पतिशास्त्र की बहुत ही मशहूर किताब है. पौधों के बारे में लिखी गई यह अपने ज़माने (1613) की सबसे बड़ी और सबसे ज़्यादा जानकारी वाली किताब थी. इसमें आइक्स्टेट (बवेरिया) के राजकुमार बिशप के महल के अंदर बने बगीचे में उगे हुए पौधों के बारे में बताया है. इसमें हाथ से रंगी हुई 367 नक्काशियां दिखाई गई हैं, जिसमें हेलेबोरस नाइजर (काला हेलेबोर) भी शामिल है.

‘“मूनस्टोन का चूर्ण मिलाओ, तीन बार घड़ी की उल्टी दिशा में घुमाओ, सात मिनट तक धीमी आंच पर उबालो, फिर हेलेबोर के रस की दो बूंदें मिलाओ.”’

हैरी पॉटर, हैरी पॉटर और मायापंछी का समूह

अ क्यूरियस हर्बल
अ क्यूरियस हर्बल/1} से जुड़ी एक अद्भुत कहानी है. एलिज़ाबेथ ब्लैकवेल ने इस किताब में अपने हाथों से तस्वीरें उकेरी और उन्हें रंंगा ताकि वह अपने पति अलेक्ज़ेंडर को 'कर्ज़ में डूबे हुए लोगों की जेल' से रिहा करवाने के लिए पैसे इकट्ठा कर सकें. जब तक कि अलेक्ज़ेंडर को कर्ज़ से छुटकारा नहीं मिल गया, उन्होंने अपनी पत्नी की उन पौधों को पहचानने में मदद की जिनकी तस्वीर उन्होंने लंदन के चेल्सी फ़िज़िक गार्डन में बनाई थी. रिहा होने के बाद, अपनी पत्नी के एहसान का बदला चुकाने के लिए वो स्वीडन चले गए और राजा फ़्रेडरिक प्रथम के दरबार में नौकरी करने लगे. जहां राजनीतिक साज़िश में हाथ होने की वजह से उन्हें सूली पर चढ़ा दिया गया.

अ क्यूरियस हर्बल की दिल छू जाने वाली इस कॉपी को एलिज़ाबेथ ब्लैकवेल ने अपने हाथों से लिखा है.

द टेंपल ऑफ़ फ़्लोरा
जानकारियों से भरी इस किताब ने इसके लेखक रॉबर्ट जॉन थॉर्न्टन को लगभग कंगाल कर दिया. 'द न्यू इलस्ट्रेशन ऑफ़ द सेक्शुअल सिस्टम ऑफ़ लिन्नेयस' इस किताब का असली नाम था, लेकिन यह द टेंपल ऑफ़ फ़्लोरा के नाम से ज़्यादा मशहूर हुई.थॉर्न्टन ने दुनियाभर के पौधों की 28 पेंटिंग फिर से बनाने के लिए नक्काशी करने वालों और तस्वीरों में रंग भरने वालों की एक टीम तैयार की. ड्रैगन अरम, जिसे कभी-कभार बदबूदार लिली भी कहा जाता है, मक्खियों को आकर्षित करने के लिए सड़े हुए मांस की गंध फैलाता है ताकि, वे आएं और उसके पराग फैला दें.

आभार: कहानी
क्रेडिट: सभी मीडिया
कुछ मामलों में ऐसा हो सकता है कि पेश की गई कहानी किसी स्वतंत्र तीसरे पक्ष ने बनाई हो और वह नीचे दिए गए उन संस्थानों की सोच से मेल न खाती हो, जिन्होंने यह सामग्री आप तक पहुंचाई है.
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