6 जून 1944

निर्णायक-दिन

Imperial War Museums

6 जून 1944 को, अब तक का सबसे बड़ा संयुक्त नौसेना, सेना और वायु सेना ऑपरेशन. कोड-नाम 'ओवरलॉर्ड', नोर्मांडी के तट पर महत्वपूर्ण दिन की लैंडिंग ने वह अभियान प्रारंभ किया जिसके कारण मई 1945 में यूरोप में मित्र देशों की जीत हुई.

1940 में डनकर्क से मित्र राष्ट्रों के सैन्य दस्तों के रिक्तीकरण के ठीक बाद पश्चिमी यूरोप की मुक्ति के लिए तैयारियां जल्द आरंभ हो गया.

1941 के अंत तक, हिटलर के विरुद्ध 'महा संधि' में सोवियत संघ और संयुक्त राज्य के साथ ब्रिटेन शामिल हुआ. 1943 में, मित्र राष्ट्रों ने अपनी रणनीति बनाने के लिए तेहरान में मिले.

यह प्रदर्शनी उस योजना को व्यक्त करता है जिसकी ऑपरेशन 'ओवरलॉर्ड' और साथ ही निर्णायक दिन हई घटनाओं की सफलता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यकता थी.

स्वॉर्ड बीच की ओर जाना, 6 जून 1944

1943 नवंबर में मित्र राष्ट्र रणनीति बनाने के लिए तेहरान में मुलाकात की. ब्रिटेन और अमेरिका आने वाले वसंत ऋतु के समय पार-चैनल हमला शुरू करने के लिए सहमत हुए. सोवियत संघ जुलाई 1941 के बाद से पश्चिम में 'दूसरे फ़्रंट' की मांग कर रहे थे. 

तेहरान में 'महान तीन', 1943

दिसंबर 1943 में, होने वाले आक्रमण के लिए मित्र राष्ट्रों की वायु, समुद्र और थल सेना की योजना बनाने और नेतृत्व करने के लिए एक कमांड टीम बनाई गई थी. जनरल ड्वाइट डी. ईसेनहोवर को प्रमुख कमांडर, मित्र राष्ट्र अभियान सेना नियुक्त किया गया.

डी-डे में 'डी' का अर्थ दिन होता है. शब्द डी-डे और एच-आर का सेना नियोजकों द्वारा उन होने वाले ऑपरेशन के दिन और घंटे निर्धारित करने के लिए उपयोग किए जाते थे, जहां सटीक तिथि और समय की अभी भी पुष्टि किया जाना शेष था या गुप्त थे.

कमांड दल, 1944
जनरल ड्वाइट डी. एइसेन्होवेर

एयर चीफ़ मार्शल सर आर्थुर टेडर उप सुप्रीम कमांडर बने.

एडमिरल सर बर्ट्राम रामसे एलाइड नौसेना के कमांडर-इन-चीफ़ नियुक्त किए गए. 

फ़्रेडरिक मॉर्गन प्रमुख एलाइड कमांडर के स्टाफ़ चीफ़ थे. 

सर आर्थुर टेडर
श्रीमान बर्ट्राम रामसे
फ़्रेडरिक मॉर्गन

जनरल सर बर्नार्ड मांटगोमेरी को, कमांडर-इन-चीफ़ 21वां सैन्य समूह के रूप में, नोर्मांडी के हमला चरण के दौरान सभी मित्र राष्ट्रों की थल सेना को आदेश देना था. 

एयर चीफ़ मार्शल सर ट्रैफ़ोर्ड लीघ मैलौरी मित्र राष्ट्र अभियान वायु सेना के कमांडर-इन-चीफ़ बनें. 

सर बर्नार्ड मोंटगोमरी
सर ट्रैफ़ोर्ड लीघ मैलौरी

निर्णायक दिन ऑपरेशन की सफलता, सावधान तैयारी पर निर्भर थी. जबकि ब्रिटेन में फ़ेक्ट्री आक्रमण बलों के लिए आवश्यक हथियार, गोला बारूद और उपकरण भारी मात्राओं मे बनाने के लिए चौबिसों घंटे कार्य कर रहे थे, वहीं विस्तृत विविधता के विशेषज्ञों ने अपने अद्वितीय कौशल और ज्ञान का योगदान दिया.

जर्मन सुरक्षा, इलाके और मौसम की स्थिति के बारे में विस्तृत जानकारी संकलित की गई. वैज्ञानिक और इंजीनियर ने नोर्मांडी में बलों के सुरक्षा लैंड के लिए विशेष उपकरण तैयार किया है.

जर्मन का ध्यान वास्तविक आक्रमण स्थल से दूर आकर्षित करने के लिए गलत जानकारी दी गई. 

निर्णायक दिन की तैयारियां, रिचर्ड यूरिक द्वारा
नकली लैंडिंग क्राफ़्ट 
समूह कपतान जे एस स्टैग,RAF मुख्य विज्ञान अधिकारी 
संयुक्त ऑपरेशन मार्गदर्शन पक्षों के सदस्य द्वारा पहना गया सुरक्षा सूट
WRNS सेनसरिंग मेल, थोमस हेनेल द्वारा 

कई विशेष जहाज निर्णायक दिन के लिए बनाए गए. साथ ही टैंक लैंडिंग क्राफ़्ट, वहां छोटे आक्रमण लैंडिंग क्राफ़्ट और विशाल लैंडिंग जहाज थे. 

फ़्रंट लाइन कार्य से RAF कर्मियों को मुक्त करने के लिए महिला सहायक वायु सेना (WAAF) जून 1939 में स्थापित की गई थी. 1943 तक, WAAF 182.000 के सदस्य थे.

टैंक लैंडिग क्राफ़्ट
चर्चिल AVRE
नोर्मांडी आक्रमण के दौरान उपयोग के लिए WAAF के सदस्य पैराशूट पैक करते हुए

मित्र राष्ट्र एक क्षतिरहित बंदरगाह पर कब्जा करने पर भरोसा नहीं कर सकते, इसलिए दो कृत्रिम बंदरगाह नियोजित किए गए, एक ब्रिटिश क्षेत्र में और एक अमेरिकी में. प्रत्येक 400 पूर्वनिर्मित वर्गों से एकत्रित किया गया था. 

प्रत्यके मलबेरी घटक को एक कोड-नाम दिया गया था. पियर हेड (व्हेल) और समुद्र किनारों पर समंजनीय पायों (स्पड्स) पर उनके सड़क लहर के साथ ऊपर और नीचे आ जाते थे. डूबे हुए कंक्रीट केसन (फ़ीनिक्स), तैरते स्पात के टैंक (बोंबार्डन्स) और डुबे हुए ब्लॉकशिप (कॉर्नकॉब्स), जिसने एक बाहरी सुरक्षा तैयार किया (गूज़बेरी), ने पियर की रक्षा की. 

अरोमांचेस में नकली 'मलबेरी बंदरगाह'
'मलबेरी बंदरगाह' वर्ग का मॉडल

फरवरी 1944 के बाद मित्र राष्ट्रों के बमवर्षक विमान, हमले के क्षेत्र को खाली करवाने और जर्मन सहायक सेनाओं और हथियारों की तीव्र गतिविधि को रोकना के लिए फ़्रांसीसी सड़कों और रेल नेटवर्क पर हमले कर रहे थे.

इस बात को छिपाने के लिए कि नौर्मैंडी पर हमला किया जाएगा, उत्तरी फ्रांस के कई अन्य जगहों पर भी हमले किए गए थे. 5 जून की शाम को आर.ए.एफ. बमवर्षक विमानों ने धातु के नुकीले टुकड़ों के कई बंडलों को गिराना शुरू किया और चैनल पर इसका कोड नाम 'विंडो' बताया गया था ताकि जर्मन रैडार ऑपरेटर स्क्रीन पर भ्रम की स्थिति पैदा की जाए.

इस महत्वपूर्ण दिन को मित्र राष्ट्रों की वायु सेना ने 14,000 विमानों को थल सेना की सहायता के लिए भेजा, जिन्हें लफ्टवाफे में रोकने वाला कोई नहीं था. 6 जून की सुबह, मित्र राष्ट्र की वायुयान के तीन दस्ते पैराशूट के सहारे बिना शोर किए उतरे और समुद्रतटों पर कब्ज़ा करने और उन्हें सुरक्षित करने के लिए धावा बोला. 

विमान बलवृद्धि तैयार की जा रही हैं
धातु फ़ॉइल स्ट्रीप, कोड-नाम ‘विंडो’
आक्रमण विवरण
एस आर वेरियर के निजी कागज़

संभावित मित्र राष्ट्रों के आक्रमण के विरुद्ध तटीय क्षेत्रों की रक्षा करने के लिए, जर्मन ने विशाल दुर्ग बनाए जिसे अटलांटिक वॉल कहा जाता था. जिनमें ठोस पिल बॉक्स, बंकर और गन स्थितियां शामिल थीं.

जब 1944 में शुरुआत में, फ़ील्ड मार्शल अर्विन रोमेल ने नीदरलैंड से लोइर नदी तक जर्मन बलों की कमान संभावी, सुरक्षा मज़बूत हो गई थी, विशेषकर इंग्लिश चैनल की ओर वाले क्षेत्रों में.

एक पिल-बॉक्स, सी एक रसल द्वारा
अटलांटिक वॉल का निरीक्षण

1944 के मध्य-मई तक, लगभग 6,500,000 माइन लगा दी गई थीं और 500,000 से अधिक तट बाधाएं स्थापित की गई थीं. नोर्मांडी क्षेत्र में, सुरक्षा मुख्य रूप से जर्मन 716वां पैदल सेना वर्ग द्वारा की गई थी, जिसमें भर्ती हुए लोगों में कई पोलिश और रूस में जन्मे थे.

हालांकि, ओमाहा तट के आस-पास, युद्ध से कठोर बना जर्मन 352वां इन्फैंट्री डिवीजन 6 जून 1944 को आक्रमण-विरोधी प्रशिक्षण में व्यस्त था.

तट बचाव
सीन खाड़ी में माइन

एडमिरल सर बर्ट्राम रामसे के अंतर्गत ऑपरेशन 'ओवरलॉर्ड' का नौसेना तत्व का कोड-नाम ऑपरेशन 'नेपच्यून' था.

जून 1944 तक, लगभग 7,000 युद्धपोत, लैंडिंग क्राफ़्ट और अन्य जहाज दक्षिणी इंग्लैंड के बंदरगाहों में एकत्रित हुए थे. माइनस्वीपर ने चैनल में रास्ते साफ कर दिए. निर्णायक दिन पर, साथ ही तटीय सुरक्षा पर गोलाबारी करते समय, नोर्मांडी तटों पर दो नौसैनिक कार्य बल, दो ब्रिटिश, एक कनाडाई और दो अमेरिकी टुकड़ियां उतरी.

नौसेना बलों ने सेनाओं के लिए गोलाबारी कर सहायता प्रदान की और सुनिश्चित किया कि चौकी हेतु आपूर्तियां बनी रहें. कई लैंडिंग क्राफ़्ट डूब गए थे या क्षतिग्रस्त हो गए थे, लेकिन रात तक मित्र सेना ने 132,000 सैन्य दस्ते तट पर तैनात कर दिए थे.

नोर्मांडी लैंडिंग की अमेरिकी द्वारा व्यक्त की गई जानकारी से फ़ुटेज

एडमिरल सर बर्ट्राम रामसे, मित्र राष्ट्र नौसेना कमांडर-इन-चीफ़, से यह संदेश सभी सैनिकों के लिए उनके आक्रमण तटों के लिए जाने से ठीक पहले पढ़ा गया.

 

जूनो बीच पर कनाडा के तीसरे डिवीज़न द्वारा हमला किया गया था. उसका स्थापन और विकट समुद्र तट बाधाओं से बहुत बचाव किया गया था. समुद्र की खराब हालत के कारण लैंडिंग में विलंब हुआ. जर्मन ने कनाडा की पैदल सेना की लैंडिंग के समय गोलियां चलानी शुरि कर दी और पहले दल को भारी क्षति का सामना करना पड़ा.

एडनिरल सर बर्ट्राम रामसे से संदेश
जूनो तट पर अनुमति जारी की गई
जूनो तट पर कनेडियाई सैन्य दस्ता
जिग तट
उटाह तट के अमेरिकी सैन्य दस्ता
लेफ्टिनेंट (टोरपेडो) अधिकारी आर मैकनैब द्वारा लिखित पत्र 
ब्रिटिश सेना निर्माण बैज 
सेंट गेब्रियल के निकट सैन्य दस्ता अंतर्देशीय
गोल्ड तट की ओर जाना
नोर्मांडी लैंडिंग की अमेरिकी द्वारा व्यक्त की गई जानकारी से फ़ुटेज
स्वॉर्ड बीच की ओर जाना
HMS बेलफ़ास्ट अधिकारी की पोशाक जैकेट 
HMS बेलफ़ास्ट पर सवार योग्य नाविक ऐ जोन्स से पत्र  
HMS बेलफ़ास्ट जर्मन की सेनाओं पर फायर करते हुए, वेर-सुर-मेर
नोर्मांडी लैंडिंग की अमेरिकी द्वारा व्यक्त की गई जानकारी से फ़ुटेज

निर्णायक दिन को उतरी पहली टुकड़ी में हताहतों का इलाज सेना के चिकित्सा कर्मियों द्वारा किया गया था जो हमले के दलों के साथ उतरे थे. घायल सैनिकों का इलाज किया गया और लैंडिंग जहाजों में चैनल पार वापस ले लिया गया. ब्रिटेन के आसपास के सैन्य अस्पतालों घायलों की जांच करने के लिए तैयार थे.

नोर्मांडी में चौकी सुरक्षित कर लिए जाने के बाद, फ़ील्ड अस्पताल स्थापित किए गए थे और महिला नर्सिंग सेवाएं हताहतों की देखभाल करने के लिए चैनल पार करके पहुंची.

कुमारी एस ई लिटलबॉय के निजी कागज़, निर्णायक दिन पर हुई लैंडिंग के दौरान आइल ऑफ़ वाइट की एक एंबुलेंस ड्राइवर 
एक घायल सैनिक का इलाज किया जाना

निर्णायक दिन की आधी रात से पहले गोल्ड, जूनो और स्वॉर्ड तटों पर 75,000 सैनिक उतरे थे, जिनमें से लगभग 3,000 सैनिक मारे गए, घायल हुए या लापता हो गए. उटाह तट पर 23,250 सैनिक उतरे थे जिनमें से 250 मारे गए. ओमाहा तट , जहां जर्मन प्रतिरोध सबसे मज़बूत था, पर उतरे 34,000 सैन्य दस्तों में से, लगभग 2000 सैनिक मारे गए थे - जो निर्णायक दिन पर कुल मित्र राष्ट्रों की हानि का उच्च अनुपात था.

नोर्मांडी लैंडिंग की अमेरिकी द्वारा व्यक्त की गई जानकारी से फ़ुटेज

कुल मिलाकर, मित्र राष्ट्रों की 6 जून को हताहतों की संख्या लगभग 10,200 थी. यह आंकड़ा योजनाकारों और कमांडरों की उम्मीद से कम था, लेकिन प्रत्येक मृत्यु परिवारों और साथियों के लिए एक दुःखद हानि थी.

ओमाहा तट के निकट अमेरिकी कब्रिस्तान
आभार: कहानी

Project Lead — Carolyn Royston
Technical Manager — Jeremy Ottevanger
Exhibition Curator — Amanda Mason
Exhibition Content Developer — Jesse Alter

क्रेडिट: सभी मीडिया
कुछ मामलों में ऐसा हो सकता है कि पेश की गई कहानी किसी स्वतंत्र तीसरे पक्ष ने बनाई हो और वह नीचे दिए गए उन संस्थानों की सोच से मेल न खाती हो, जिन्होंने यह सामग्री आप तक पहुंचाई है.
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