1955 - 1965

डोल्स वीटा का युग

Istituto Luce Cinecittà

"यह वह समाज है जो हर जगह से समृद्ध होता है, शीत युद्ध का भय अब अतीत हो गया है और शायद इसकी समृद्धि का कारण यही है."
एनीयो फ़्लायानो

इटली में समृद्धि पचास के दशक में आई. यह समृद्धि अचनाक से नहीं आई थी, बल्कि यह कई वर्षों की कड़ी मेहनत का फलस्वरूप प्राप्त जीत थी. फ़ासीवाद और युद्ध के नैतिक तथा भौतिक विनाश के बाद इटली के लोगों ने कमर कस ली और उद्योग, कला एवं मनोरंजन के क्षेत्र में विश्व को अपनी दृढ़ता और रचनात्मक प्रतिभा से अवगत कराया. 1960 ने इस संपूर्ण अवधि के महत्वपूर्ण क्षणों का प्रतिनिधित्व किया, वह वर्ष जब फ़ेडेरिको फ़ेलिनी की फ़िल्म "ला डोल्स वीटा" रिलीज़ हुई थी. इसके बावजूद क्या इटली वासियों का जीवन सुखमय था?

आर्थिक तेज़ी के चरम पर होने पर निर्वाह-व्यय क्या था?

जब पहली बार इटली वासियों का आधुनिकता से सामना हुआ तो वे चकित हो गए. रोम का पहला सुपर-बाज़ार 1956 में खुला...

अपार्टमेंट बिल्डिंग, क्रियाशील लेकिन फिर भी अनाम थीं और सस्ती कारें, पुनर्निर्माण तथा आर्थिक तेज़ी के बीच की अवधि में सामान्य थीं.

95 किमी प्रति घंटे की अधिकतम रफ़तार से चलने वाली Fiat 600 फ़ैमिली कार पहली बार 9 मार्च 1955 को आम लोगों के लिए बाज़ार में उतारी गई थी, जिसमें 4 या कभी-कभी 5 सीटें हुआ करती थीं.

Fiat 500, 1957 में उन इटली वासियों के लिए लॉन्च की गई, जो 600 जितनी सस्ती कीमत वहन नहीं कर सकते थे.

इन वर्षों में, इटली को पुराने और नए युग के एक अनूठे मिश्रण के रूप में वर्णित किया जा सकता है. हालांकि, श्रमिक, उद्यमी, महिलाएं और युवा समान सभी प्रगति की खोज कर रहे थे.

रोमन अभिनेता अल्बर्तो सोर्डी ने इतालवी हास्य फ़िल्म शैली में इटली में आर्थिक तेज़ी के कारण आई वैभवता और विपदा दोनों को बेहतरीन रूप से दर्शाया है.

पचास के दशक में, उत्तरी और दक्षिणी भागों में इन क्षेत्रों की भिन्नता स्पष्ट होने के बावजूद, इटली में निरक्षरता में लगभग 10% की गिरावट हुई.

इन वर्षों के उभरते इतालवी टेलीविज़न कार्यक्रम विशेषतः पेचीदा होते थे.

श्रम और खपत दोनों साथ-साथ चल रही थी और सभी को समान रूप से प्रभावित कर रही प्रतीत हो रही थी, लेकिन फिर भी एक बहुत बड़ा असंतुलन बना रहा; जबकि कई इटली वासी अभी भी अपना भाग्य दूसरे स्थानों पर आज़मा रहे थे, सार्वजनिक उद्यमी अर्थव्यवस्था विश्वभर में व्यवसाय करने में लगी हुई थी और मध्यम वर्ग बड़े पैमाने पर उपभोक्तावाद से परिचित हो रहा था. 

कई लोगों के लिए, संवृद्धि एक सपना ही था, जिसे घर से दूर जाकर ही पूरा किया जा सकता था.

इटलीवासी मुख्यतः कैथोलिक होते हैं, इसलिए उन्होंने एक प्रभावशाली धार्मिक अनुस्थापन पक्ष, इसाई लोकतंत्रवादियों द्वारा शासित होने का निर्णय लिया; लेकिन समाज आधुनिकीकरण द्वारा थोपी गई धर्म-निरपेक्षता की राह पर चलता रहा और इन वर्षों में वैटिकन भी अपनी विचारधाराओं में परिवर्तन के लिए सहमत था. 

1962 में पोप जॉन XXIII द्वारा उद्घाटन किए गए वैटिकन सार्वदेशिक परिषद ने कैथोलिक गिरिजाघर और धर्मनिरपेक्ष दुनिया के बीच मौलिक बातचीत प्रारंभ किया.

इन वर्षों में, इटली के समाज ने सांस्कृतिक और मानविकीय रूप से अभूतपूर्व परिवर्तन देखा. इन परिवर्तनों के अंतर्गत कार्य-स्थानों में महिलाओं की भूमिका और संभोग के प्रति इटलीवासियों का नया दृष्टिकोण उल्लेखनीय था, जिसके कारण कुछ ही वर्षों में, कामोत्तेजक फ़िल्मों और पत्रिकाओं की अपार लोकप्रियता के साथ, इटली संपूर्ण यूरोप में अद्वितीय देश बना दिया.

एक महिला के कामकाजी जीवन के एक दिन का वृत्तांत

अपनी उद्यमिता और रचनात्मकता के कारण एक "मनोरंजक समाज" के रूप निर्मित किए जाने के लिए इटली सबसे उचित स्थान और अमेरिकी सभ्यता की तुलना में प्रतिस्पर्धात्मक तथा विपरीत प्रतीत हो रहा था. यह केवल निर्भय निर्माताओं और स्थानीय कलाकारों की दुनिया को ही नहीं बल्कि असामान्य प्रतिभा वाले कलाकारों, जिनके लिए 'Hollywood sul Tevere' नाम दिया गया था, और साथ ही उन वास्तविक तथा अद्वितीय इतालवी सभ्यता की दुनिया को भी संदर्भित करता है, जिनको व्यक्त करने का माध्यम केवल उन सिनेमा या फ़ैशन तक ही सीमित नहीं था, जहां आने वाले दशकों में कई मूल रिकॉर्ड देखे गए थे.

इतालवी फ़िल्म उद्योग का घर कहे जाने वाले, सिनेसिटा को तीस के दशक में फ़ासीवाद के युग में बनाया गया था, लेकिन इसने अपना सुनहरा समय पचास की दशक में देखा. यहां तक कि अमेरिकियों ने भी “को वडिस?” या "बेन हर" जैसी अपनी अत्यंत सफल फ़िल्मों की शूटिंग रोम में करना पसंद किया.

रोम में वाया वेनेटो पर अमेरिकी और इतालवी फ़िल्म कलाकारों की रात्रि जीवन की गतिविधियां निःसंदेह 'paparazzo' को आमंत्रित करती थी, एक अविवेकी और अक्सर हस्तक्षेप करने वाले फ़ोटोग्राफ़र, जैसा कि फ़ेलिनी ने स्वयं "La Dolce Vita" में उसे परिभाषित किया है.

इस फ़िल्म को तुरंत ही एक प्रतिष्ठित फ़िल्म का दर्जा मिल गया और यह इतालवी समाज पर आधुनिकीकरण के प्रभाव की कटू और कड़ी आलोचना करने वाली फ़िल्मों में से एक बनी रही.

आभार: कहानी

Curator — Roland Sejko
Curator — Gabriele D'Autilia

क्रेडिट: सभी मीडिया
कुछ मामलों में ऐसा हो सकता है कि पेश की गई कहानी किसी स्वतंत्र तीसरे पक्ष ने बनाई हो और वह नीचे दिए गए उन संस्थानों की सोच से मेल न खाती हो, जिन्होंने यह सामग्री आप तक पहुंचाई है.
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