सोवेटो दंगे

Africa Media Online

वह दिन जब हमारे बच्चों का विश्वास टूट गया

16 जून 1976 को जोहानेसबर्ग में सोवेटो शहर के स्कूलों के लगभग 20,000 बच्चों ने अफ़्रीकान को स्थानीय स्कूलों में पढ़ाने की भाषा बनाए जाने का विरोध करने के लिए सड़क पर निकलकर प्रदर्शन किया. अफ़्रीकान को कई लोगों द्वारा दमनकर्ताओं की भाषा के रूप में ‍देखा जाता था. 1974 के अफ़्रीकान माध्यम आदेश ने सभी काले स्कूलों को पढ़ाने की भाषा के लिए अफ़्रीकान और अंग्रेज़ी को 50-50 मिश्रित रूप से उपयोग करने पर बाध्य कर दिया.

16 जून को सोवेटो स्टूडेंट्स रिप्रेज़ें‍टेटिव काउंसिल (SSRC) की कार्यकारी समिति द्वारा आयोजित एक विरोध प्रदर्शन में ऑरलैंडो स्टेडियम में विद्यार्थी एकत्र हुए. यह प्रदर्शन शांतिपूर्वक किया जाना था और कार्यकारी समिति द्वारा अनुशासन पर ज़ोर दिए जाने पर कई अध्यापकों ने इसका समर्थन किया.

जब जुलूस शुरू हुआ, तो शिक्षार्थी "अफ़्रीकान मुर्दाबाद", "अज़ानिया ज़िंदाबाद" और "अगर हम अफ़्रीकान को अपनाते हैं, तो वोर्सटर को ज़ुलू अपनाना होगा" के नारे लेकर चल रहे थे. उन लोगों ने पाया कि उनके मार्गों को पुलिस द्वारा अवरूद्ध कर दिया गया था. कार्यकारी समिति के नेताओं ने जुलूस निकाल रहे लोगों से पुलिस को उकसाए बिना जुलूस को अन्य मार्ग पर जारी रखने के लिए कहा और अंततः ओरलैंडो हाई स्कूल के पास समाप्त किया गया.

पुलिस और शिक्षार्थियों की भिढ़ंत तब नियंत्रण से बाहर हो गई जब पुलिस ने भीड़ पर कुत्ते छोड़ दिए। भीड़ ने भी पत्थरबाज़ी से जवाब दिया और कुत्तों को मार डाला. तब पुलिस ने बच्चों पर गोलियां चलाना शुरू कर दी. उस दिन 176 से अधिक लोग मारे गए. यह विरोध तुरंत ही पूरे देश के शहरों में फैल गया.

हेक्टर पीटरसन (13) का चित्र, जो मबुइसा मखूबो द्वारा चलाए जा रहे सोवेटो आंदोलन के दौरान रंगभेदी पुलिस द्वारा मारे गए पहले बच्चों में से एक था, यह चित्र इस दिन से जुड़ा ऐतिहासिक चित्र बन गया. यह फ़ोटो न्यूज़ फ़ोटोग्राफ़र सैम नज़िमा द्वारा लिया गया था. 
सोवेटे में स्थि‍त हेक्टर पीटरसन संग्रहालय. सोवेटे दंगे या सोवेटो विद्रोह (अब इस नाम से जाना जाता है) ने दक्षिण अफ़्रीका के अंदर और बाहर दोनों ओर रंगभेद के विरुद्ध विरोध को प्रेरित किया. 16 जून को दक्षिण अफ़्रीका में राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है.
आभार: कहानी

Photographic Archive — Baileys African History Archive
Photographer — Graeme Williams / South Photographs
Photographer — David Goldblatt / South Photographs
Photographer — Motlhalefi Mahlabe / South Photographs
Text — Baileys African History Archive and Africa Media Online

क्रेडिट: सभी मीडिया
कुछ मामलों में ऐसा हो सकता है कि पेश की गई कहानी किसी स्वतंत्र तीसरे पक्ष ने बनाई हो और वह नीचे दिए गए उन संस्थानों की सोच से मेल न खाती हो, जिन्होंने यह सामग्री आप तक पहुंचाई है.
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