1336 - 1565

हम्पी: कथाओं, इतिहास और आश्चर्य का शहर

अतुल्य भारत!

हम्पी, दक्षिणी भारत के एक पुराने शहर विजयनगर में स्थित एक छोटा सा गांव है. संस्कृत में, विजयनगर का मतलब "जीत का नगर" होता है. 1336 से 1565 तक, यह शहर विजयनगर साम्राज्य की राजधानी था. उस समय, विजयनगर साम्राज्य दक्षिणी भारत के ज़्यादातर हिस्सों पर राज करता था. 1565 में, डेक्कन महासंघ ने इस शहर पर जीत हासिल की और कई महीनों तक इसकी संपत्ति को लूटा. इस शहर की खुदाई करने पर पुरातत्त्ववेत्ताओं को कई भव्य महल और मंदिर, पानी की शानदार व्यवस्था और कई दूसरे बुनियादी ढांचे मिले. इसके बाद, 1986 में इस प्राचीन शहर को यूनेस्को विश्व विरासत स्थल घोषित कर दिया गया.

साम्राज्य की राजधानी बनने से कई सालों पहले भी विजयनगर एक पवित्र और ज़रूरी शहर माना जाता था. तुंगभद्रा नदी के किनारे कई मंदिर हुआ करते थे. इस शहर को पवित्र इसलिए भी माना जाता था क्योंकि कुदरत ने इसे अनोखी और असाधारण खूबसूरती से नवाज़ा था.

दूर-दूर तक फ़ैली वादी में बड़े-बड़े पत्थरों के साथ 1,600 से ज़्यादा मंदिरों, महलों और दूसरी पुरानी इमारतों के अवशेष पाए जाते हैं. विरुपाक्ष मंदिर की स्थापना 7वीं सदी में की गई थी. तभी से यह मंदिर, बिना किसी रुकावट के, एक पूजा की जगह के रूप में प्रसिद्ध रहा है.

हम्पी के आसपास मौजूद ग्रेनाइट पहाड़ियों की गिनती दुनिया के सबसे पुराने पत्थरों में की जाती है. करोड़ों सालों में ग्रेनाइट के बड़े-बड़े पत्थरों ने घिस-घिस कर छोटी पहाड़ियों का रूप ले लिया है. इनमें से कई पहाड़ियां, एक के ऊपर एक पड़े पत्थरों से बनी हैं. इस मंदिर के अवशेष हेमकूट पहाड़ी की चोटी पर पाए जाते हैं.

हेमकूट पहाड़ी के आसपास की जगह देखने के लिए छवि को चारों ओर ले जाएं. यहां से विरुपाक्ष मंदिर भी देखा जा सकता है.

हिन्दू पौराणिक कथाओं के मुताबिक, इस जगह पर पहले एक वानर साम्राज्य होता था. उन पौराणिक पूर्वजों के वंशज आज भी इन ग्रेनाइट पहाड़ियों पर उछल-कूद मचाते हुए देखे जाते हैं.

आज की तारीख में, चट्टान चढ़ने का शौक रखने वाले लोगों के लिए इन पहाड़ियों पर चढ़ना एक बहुत बड़ी चुनौती माना जाता है.

इस इलाके में 500 से ज़्यादा मंदिर मौजूद हैं. उन सब में से, विट्ठल मंदिर की बनावट सबसे खूबसूरत है. यह द्रविड़ वास्तुकला का एक अद्भुत नमूना है, जिसमें बड़े-बड़े पत्थरों पर बारीक नक्काशी की गई है. इस प्रांगण में दरवाज़े, मंदिर, मीनारें और सुनसान पड़े प्रांगण शामिल हैं.

विट्ठल मंदिर प्रांगण के आस-पास की जगह देखने के लिए छवि को चारों ओर ले जाएं.

हम्पी की सबसे मशहूर जगह, पत्थर का बना एक बड़ा सा मंदिर है, जो देखने में एक रथ की तरह लगता है. यह मंदिर विष्णु भगवान के वाहन गरुड़ को समर्पित है. वह पक्षियों के राजा माने जाते थे.

कहा जाता है कि किसी समय में इस मंदिर के ऊपर गरुड़ की मूर्ती हुआ करती थी, जिनका रूप पक्षी जैसा था. यह भी कहा जाता है कि ग्रेनाइट के ये पहिये किसी समय में घूमा करते थे.

पत्थर से बने रथ को हर तरफ़ से देखने के लिए छवि को चारों ओर ले जाएं.

विट्ठल मंदिर में लगभग हर जगह भगवान और पौराणिक लोगों से जुड़ी बातें और उनकी मूर्तियां पत्थरों पर उकेरी गई हैं.

विट्ठल मंदिर के प्रांगण में एक अंदरूनी बरामदा और तीन दरवाज़े शामिल हैं, जिनके साथ लोगों के चलने के लिए बने गलियारे आज सुनसान पड़े हैं. हम्पी में मौजूद ज़्यादातर इमारतों की तरह, ये गलियारे भी ग्रेनाइट से बने हैं और इन पर बारीक नक्काशी का काम किया गया है.

रंगमंडप के अंदर एक मंच होता है, जिस पर बैठकर पूजा-पाठ जैसे धार्मिक काम किए जाते हैं. 56 खम्बों वाला यह रंगमंडप, विट्ठल मंदिर में मौजूद है.

विट्ठल मंदिर के प्रांगण की और तस्वीरें देखने के लिए छवि को चारों ओर ले जाएं.

विजयनगर के इन प्राचीन अवशेषों में भारतीय इतिहास के एक सुनहरे युग की झलक मिलती है. इन शानदार इमारतों को अच्छे से देखने, उनका इतिहास समझने और उनका पूरा अनुभव लेने का समय, सिर्फ़ कुछ ही पर्यटकों के पास होता है. हालांकि, आम पर्यटकों को भी हम्पी के इन अवशेषों को देखने के बाद भारत के विशाल इतिहास पर गर्व होता है. वे इन इमारतों को बनाने के लिए इस्तेमाल किए गए नए तरीकों और सैकड़ों सालों से चले आ रही हमारी संस्कृति से प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाते.

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क्रेडिट: सभी मीडिया
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