जनवरी 1200

कुतुब मीनार परिसर: दिल्ली के सात शहरों में से एक

अतुल्य भारत!

भारत की राजधानी नई दिल्ली में मौजूद कुतुब परिसर में भारतीय-इस्लामी संस्कृति की रचनाओं के साथ-साथ बहुत पुरानी सभ्यता के अवशेष आज भी मौजूद हैं. इसका बीच में कुतुब मीनार स्थित है, यह इमारत देखने में बेहद खूबसूरत दिखाई देती है, इसे 12वीं शताब्दी के आसपास बनाया गया था. इस परिसर में दो मस्जिदें भी हैं, इसमें से एक कुव्वत उल इस्लाम मस्जिद उत्तर भारत की सबसे पुरानी मस्जिद है.

कुतुब मीनार की ऊंचाई 72.5 मीटर है. इसे बनाने का काम 12वीं सदी की शुरुआत में कुतुबुद्दीन ऐबक के आदेश से शुरू किया गया था. गौरतलब है कि उस समय कुतुबुद्दीन दिल्ली सल्तनत के सुल्तान थे.

कुतुब मीनार परिसर को घूमने के लिए छवि को चारों ओर ले जाएं

कुतुबुद्दीन ऐबक के उत्तराधिकारी इल्तुतमिश ने इस खूबसूरत मीनार का काम पूरा करवाया था. वैसे आगे आने वाली शताब्दियों में यह इमारत कई बार टूटी-फूटी, इसकी फिर से मरम्मत करवाई गई साथ ही इसका विस्तार भी किया गया.

इस इमारत को बलुआ पत्थर का इस्तेमाल करके बनाया गया है साथ ही इसकी दीवारों पर मार्बल का इस्तेमाल किया गया है. इसकी सजावट के लिए धर्म ग्रंथ कुरान में बताए गए ज्यामितिय पैटर्न और शिलालिखों का इस्तेमाल किया गया है. सभी मीनारों की तरह कुतुब मीनार में भी इबादत करने के लिए काफ़ी ऊंचाई में एक जगह बनाई गई है. यह मीनार इन सालों में कई बार नए राजवंशों की जीत की गवाह बनी है और उन राजवंशों की ताकत का प्रतीक रही है.

कुतुब मीनार इन सालों में दिल्ली सल्तनत के सुल्तानों के विश्वास को तो दर्शाती ही है बल्कि उस समय के कारीगरों ने किस तरह से अपनी कारीगिरी को पत्थरों में उकेरा उसे भी अनूठे रूप में पेश करती है. कुतुब परिसर में कुछ ऐसे नक्काशीदार पत्थरों के अवशेष मौजूद हैं जो इमारत और मस्जिद के बनने के पहले के हैं.

कुतुब मीनार की पहली मंज़िल से बाहर झांकने का नज़ारा

भारतीय-इस्लामिक संस्कृति की बेहतरीन रचना का दूसरा उदाहरण है, अलाई-दरवाज़ा. इस गुंबददार इमारत को सफ़ेद मार्बल और लाल पत्थर के इस्तेमाल से बनाया गया है. साथ ही इसे भीतर से नक्काशीदार चित्रों से सजाया गया है, जो इसकी खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं. इस इमारत को अलाउद्दीन खिलजी ने बनवाया गया था. अलाई दरवाज़ा 1311 में बनकर पूरा हो गया था.


अलाउद्दीन खिलजी, खिलजी वंश के पहले सुल्तान थे. वह महत्वाकांक्षी थे और उन्हें अपनी ताकत दो दर्शाने का शौैक था. इसी वजह से उन्होंने इमारत बनाने का सिलसिला शुरू किया, उनका मकसद था कि वह एक ऐसी इमारत बनवाएं जिसकी ऊंचाई कुतुब मीनार से भी ज़्यादा हो। वैसे साल 1316 में उनकी मृत्यु हो गई और उनकी यह योजना धरी की धरी रह गई।

अलाई दरवाज़ा कुव्वत उल इस्लाम मस्जिद के क्षेत्र में है, यह मस्जिद उत्तर भारत की सबसे पुरानी मस्जिद है. कुछ स्तंभों में अभी भी पुराने समय में बनाई गईं कलाकृतियों के निशान हैं.

कुतुब परिसर यूनेस्को की ओर से मान्यता प्राप्त धरोहर स्थल है, इसे देखने के लिए दुनियाभर से लोग आते हैं. वे इस मीनार की हैरान करने वाली ऊंचाई देखने और सबसे पुरानी मस्जिद में नमाज़ अदा करने आते हैं. इस परिसर में एक मदरसा (धार्मिक स्कूल), कब्र, दीवारों के खंडहरों समेत अन्य कई ढांचे हैं.

कुतुब मीनार की चौथी मंज़िल से बाहर झांकने का नज़ारा

कुतुब परिसर सदियों से पवित्र स्थान रहा है. यहां का माहौल रहस्यमयी, शांत और आध्यात्मिक है.

कुतुब मीनार और जिन प्राचीन पत्थरों ने इस परिसर को घेर रखा है, वे कई धर्मों और संस्कृति की गवाही पेश करते हैं. साथ ही ये भारतीय संस्कृति की खूबसूरती को भी अनूठे अंदाज़ में बयां करते हैं.

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क्रेडिट: सभी मीडिया
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