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स्वर्ण मंदिर, अमृतसर

अतुल्य भारत!

भारत में कई धर्मों के मानने वाले रहते हैं. इनमें से एक है सिख धर्म, जिसके ज़्यादातर मानने वाले भारत के उत्तरी राज्य पंजाब में बसते हैं. सिख धर्म मानने वाले सिर्फ़ एक भगवान को मानते हैं और 10 पवित्र गुरुओं के बताए रास्ते पर चलते हैं. अमृतसर शहर दुनिया भर में बसे 2 करोड़ सिख लोगों के लिए धार्मिक और प्रशासनिक दोनों तरह की ज़िम्मेदारियां निभाती हैं.

अमृतसर के सबसे बड़ो आकर्षणों में से एक है श्री हरमंदिर साहिब, जो स्वर्ण मंदिर के नाम से मशहूर है. अमृतसर एक आध्यात्मिक केंद्र भी है. यह सिख आस्था का सबसे पवित्र गुरुद्वारा है.

10 सिख गुरुओं में से चौथे गुरु रामदास साहिब ने 15वीं सदी में यह गुरुद्वारा और सरोवर बनवाया था, जहां सभी लोग प्रार्थना कर सकें.

गुरुद्वारे की इमारत में कई बार नई-नई चीज़ें जोड़ी गईं, जिसमें फ़र्श पर संगमरमर लगाया जाना शामिल है. भारत के सिख साम्राज्य (1799-1849) के संस्थापक, महाराजा रणजीत सिंह ने गुरुद्वारे का ऊपरी फ़्लोर 750 किलो शुद्ध सोने से मढ़वाया था.

अास्था रखने वाले लोग पक्के रास्ते या सरोवर के एक सिरे से दूसरे सिरे तक जाने वाले रास्ते से गुरुद्वारे के बीच वाले हिस्से में जाते हैं. सरोवर का पानी शुद्ध करने वाला माना जाता है. सिख लोग सरोवर के बाहर बने प्लैटफ़ॉर्म पर बैठकर नहा सकते हैं. मंदिर के कर्मचारी बाल्टी से भक्तों पर पानी डालते देखे जा सकते हैं.

स्वर्ण मंदिर के पवित्र सरोवर में नहाते हुए भक्त. गुरुद्वारे में आने वालों को नंगे पैर रहना होता है और अंदर जाने से पहले पैर धोने के लिए अलग से बने पूल से गुज़रना पड़ता है.

गुरुद्वारे के कर्मचारी सरोवर का पानी श्रद्धालुओं में बाँटते हैं. इस पानी को पवित्र माना जाता है और यहां आने वाले शुद्धी और सेहत के लिए बोतलों में पानी ले जाते हैं

सिख धर्म शांति, विनम्रता और बराबरी के लिए समर्पित है. सिख धर्म मानने वाले इन मूल्यों के प्रतीक पहनते हैं, जिसमें पगड़ी, केश, कड़ा और कटार शामिल हैं.

सिख धर्म के संस्थापक गुरुओं ने 15वीं और 16वीं सदी में एकदम साफ़ कर दिया था कि ईश्वर के सामने औरत मर्द में कोई फ़र्क नहीं है.

सिख लोग यहां आने वालों के लिए चपाती बनाते हैं.

यहां आने वालों को गुरुद्वारे की रसोई में मुफ़्त में खाना खिलाया जाता है, चाहे अमीर हो या गरीब. सभी साथ मिलकर फ़र्श पर बैठकर खाना खाते हैं. सभी गुरुद्वारों में एक रसोई होती है जहां बिना किसी भेदभाव के सभी को खाना खिलाया जाता है. स्वर्ण मंदिर की रसोई, सबसे बड़ी रसोइयों में से एक है जहां रोज़ 100,000 लोगों को खाना परोसा जाता है. गुरुद्वारों में शाकाहारी खाना परोसा जाता है ताकि यहां आने बिना खाए न जाएं.

ऊपर: लंगर का एक दृश्य - स्वर्ण मंदिर की रसोई

सिख धर्मग्रंथ, गुरु ग्रंथ साहिब स्वर्ण मंदिर में ही रखा गया है. सिख लोग इस पवित्र किताब को “अाखिरी गुरु” मानते हैं, यह यहां होने वाले समारोहों का हिस्सा होती है.

शाम को धर्म ग्रंथ को तख्त पर सुखासन यानी “आराम” दिया जाता है. सुबह इसे वापस पवित्र जगह पर ले जाया जाता है और कोई भी पेज खोला जाता है, उसी पेज के हिसाब से उस दिन की प्रार्थना की जाती है.

हरमंदिर साहिब गुरुद्वारे के बड़े से कॉम्पलेक्स का हिस्सा है. यहां कि एक और बड़ी इमारत है सफ़ेद संगरमर से बनी अकाल तख्त, यहां से गुरुद्वारे की देख-रेख, राजनीति और सिखों के लिए न्याय जैसी बातें के लिए एक बड़ा केंद्र है. धर्म के लीडर या जत्थेदार, दुनिया के 5 सबसे बड़े लीडरों में सबसे ऊंची पदवी है.

इमेज: स्वर्ण मंदिर के पास हेरिटेज स्ट्रीट का दृश्य.

अतुल्य भारत!
क्रेडिट: सभी मीडिया
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