6 जुल॰ 1942

एनी फ्रैंक

Anne Frank House

  उसका जीवन, उसकी डायरी और उसकी विरासत

एनी फ्रैंक द्वितीय विश्‍वयुद्ध के दौरान अत्‍याचार के शिकार हुए लाखों यहूदियों में से एक है।

एनी और उसका परिवार दो वर्षों तक अपने पिता की दुकान में ऊपरी भाग में छुपा रहा। वहीं उसने अपनी डायरी लिखी।

एनी फ्रैंक की मृत्‍यु एक यातना शिविर में हुई, उस समय वह 15 वर्ष की थी।

युद्ध के बाद उसकी डायरी बच गई। उसका अनुवाद सत्रह से भी अधिक भाषाओं में हुआ, जिसकी वजह से एनी दुनियाभर में मशहूर हो गई।

मूल डायरी एनी फ्रैंक हाउस में प्रदर्शित की गई है।

एनी फ्रैंक, एक दिन की है, अपनी मां एडिथ की गोद में। फ़्रैंकफुर्ट ए.एम. मेन, 13 जून, 1929।

बचपन जर्मनी में बीता

एनी फ्रैंक का जन्‍म 12 जून 1929 को फ़्रैंकफुर्ट ए.एम. मेन, जर्मनी में हुआ था। वह ओट्टो फ्रैंक और एडिथ फ्रैंक-हॉलैंडर की दूसरी और सबसे छोटी लड़की है। एनी की बहन मार्गट उससे तीन वर्ष बड़ी है। फ्रैंक परिवार यहूदी है।

ओट्टो फ्रैंक अपनी दोनों लड़कियों मार्गट एवं एनी के साथ, अगस्‍त 1931।

ओट्टो फ्रैंक एक पारिवारिक बैंक के लिए कार्य करते हैं। जर्मनी में भारी आर्थिक संकट की वजह से उनका कारोबार ठीक नहीं चल रहा है। ओट्टो और एडिथ फ्रैंक अपने भविष्‍य को लेकर बहुत चिंतित हैं। यहूदी विरोधवाद बढ़ रहा है। अधिक से अधिक लोग एडोल्‍फ हिटलर की यहूदी विरोधवादी पार्टी एन.एस.डी.ए.पी. का समर्थन कर रहे हैं, और सन् 1933 में हिटलर जर्मन सरकार के नेता बन जाते हैं।

ओट्टो को एम्‍स्टर्डम में ओपेक्‍टा की स्‍थानीय शाखा खोलने का एक मौका मिलता है। ओपेक्‍टा व्‍यापार में पेक्टिन की बिक्री की जाती है, यह एक जेली कारक होता है जिसका इस्‍तेमाल जैम बनाने के लिए किया जाता है।

ओट्टो और उसकी पत्‍नी नीदरलैंड जाने का निश्‍चय करते हैं।

एम्‍स्टर्डम में सुरक्षित

सन् 1933 में एनी फ्रैंक और उसका परिवार एम्‍स्टर्डम-जुइड में मेर्वेडेप्‍लीन में एक अपार्टमेंट में आ जाता है। यह ऐसा इलाका है जहां बहुत से यहूदी शरणार्थियों को मकान मिले हुए हैं।

एनी और मार्गट ने शीघ्र ही डच भाषा सीख ली और जल्द ही उन्हैं हॉलैंड में घर जैसा महसूस होता है। एनी एक चुलबुली, जिज्ञासु लड़की है जो सबके आकर्षण का केंद्र बने रहना चाहती है। मार्गट अपेक्षाकृत शांत और गंभीर है। वह हमेशा स्‍कूल में अच्‍छे अंक लाती है।

ओट्टो फ्रैंक ने एम्‍स्टर्डम के मध्‍य में अपना कारोबार स्‍थापित किया। वह कड़ी मेहनत करते हैं इसलिए उन्‍हें अक्‍सर अपने घर से बाहर रहना पड़ता है। एडिथ फ्रैंक के लिए कठिन दौर है अब उसे नीदरलैंड्स में नए जीवन का आदी होना पड़ रहा है। उसे घर की बड़ी याद आती है और वह जर्मनी में अपने परिवार को लेकर चिंतित रहती है।

एक युवा मिएप जिएस की अनूठी फिल्‍म का एक अंश

जर्मनी में हालात यहूदियों के लिए दिनों दिन जोखिम भरे होते जा रहे हैं।

नवंबर 1938 में एक बड़ा नरसंहार 'क्रिस्‍टालनैक्‍ट' होता है।

मार्च 1939 में एडिथ की माँ जर्मनी छोड़ देती है और फ्रैंक परिवार में चली आती है।

सन् 1939 में जर्मनी ने पोलैंड पर धावा बोल दिया जिससे इंग्‍लैंड और फ़्रांस ने जर्मनी से युद्ध की घोषणा कर दी।

वारसा में बमबारी होती है।

यहूदियों पर अत्‍याचार लगभग इसी समय प्रारंभ हो जाते हैं।

जर्मन का हॉलैंड आक्रमण

मई 1940 में जर्मनी ने हालैंड पर चढ़ाई कर दी, और रॉटरडैम में बमबारी के बाद डच सरकार ने घुटने टेक दिए। यहाँ जर्मन का कब्‍जा हो गया।

जनरल विंकलमैन जर्मन सेना के मुख्‍यालय में आते हैं और मई 15, 1940 में डच आत्‍मसमर्पण पर हस्‍ताक्षर करते हैं।

यूहदी विरोधी नियम

सन् 1940 के आक्रमण के ठीक बाद नाजियों ने यहूदी विरोधी नियम बनाने शुरू कर दिए। इससे यहूदियों का जीवन और कठिन बन जाता है। यहूदी लोक सेवकों को नौकरी से निकाल दिया जाता है। अब यहूदियों को पार्कों, सिनेमाघरों व तरणतालों में जाने की अनुमति नहीं है और यहूदी बच्‍चों को अलग यहूदी विद्यालयों में जाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

एनी फ्रैंक एम्‍स्‍टर्डम में अपने घर की खिड़की पर दिखाई देती है।

एनी की डायरी

12 जून 1942 को एनी फ्रैंक तेरह वर्ष की हो गई। उसके जन्‍मदिन के उपहारों में एक लाल और सफेद चौखानों वाली डायरी मिली है। उसने तुरंत उसमें लिखना चालू कर दिया। डायरी लिखना उसका सबसे पसंदीदा काम है। तीन सप्‍ताह बाद जब फ्रैंक परिवार छिपने गया तो एनी इसे अपने साथ लेती गई।

यहूदियों पर अत्‍याचार

जैसे-जैसे हॉलैंड में जर्मनों का कब्‍जा बढ़ता गया, वैसे-वैसे यहूदियों के लिए हालात खतरनाक होते गए। मई 1942 से सभी यहूदियों को अपने कपड़ों में एक पीला सितारा पहनना पड़ता है। इसी वर्ष जुलाई से यहूदियों को कार्य पर आने के लिए बुलाया गया है। बताया गया कि उन्‍हें जर्मनी के श्रमिक शिविरों में ले जाया जा रहा है। वास्‍तव में उन्‍हें कत्‍ल करने के लिए यातना शिविरों में ले जाया जा रहा है। 

जाने से बचने के लिए ओट्टो और एडिथ फ्रैंक ने ओट्टो की दुकान के ऊपरी भाग में पिछले भाग पर एक गुप्‍त छिपने का अड्डा बनाना शुरू कर दिया था। मार्गट फ्रैंक को 5 जुलाई 1942 को सर्वप्रथम एक श्रम शिविर में रिपोर्ट करने के लिए आदेश मिलता है। अगले दिन फ्रैंक परिवार प्रिंसेन्‍ग्रैच्‍ट स्थित गुप्‍त ठिकाने की ओर रवाना हो जाता है।

फ्रैंक परिवार ने इस छिपने वाले अड्डे में ओट्टो के व्‍यापारिक साझेदार हरमैन वान पेल्‍स, उनकी पत्‍नी ऑगस्‍टे और उनके पुत्र पीटर को भी रखा है। ओट्टो के कर्मचारी बेप वोस्‍कुइज्‍ल, विक्‍टर कुगलर, जोहैन्‍स क्‍लीमैन और मिएप जिएस और उसके पति जैन उन्‍हें भोजन पहुंचाते हैं।

दिन के समय छिपे हुए लोगों को बिल्कुल खामोश रहना पड़ता है। नीचे स्थित वेयरहाउस में कार्य कर रहे लोगों को बिल्कुल पता नहीं चलना चाहिए कि यहूदी गुप्‍त अड्डे में छिपे हैं। वे केवल रात और सप्‍ताहांतों में बिना फुसफुसाए बात कर सकते थे और शौचालय में फ़्लश चला सकते थे।

कुछ माह के बाद 16 नवंबर 1942 को गुप्‍त अड्डे में रहने के लिए आठवां व्‍यक्ति फ्रिट्ज़ फेप्‍फर आ जाता है। यह मिएप जिएस के दंतचिकित्‍सक हैं। उन्‍हें जगह देने के लिए मार्गट अपने माता-पिता के कमरे में चली जाती है, और एनी और फ्रिट्ज़ फेप्‍फर एक कमरे में रहने लगते हैं।

'हमारे अनेक यहूदी मित्र और परिचित लोगों को झुंडों में ले जाया जा रहा है। गेस्‍टापो उनसे बहुत खराब तरीके से पेश आ रही है (...) यदि हॉलैंड में इतना बुरा हाल है तो उन दूरदराज के और असभ्‍य इलाकों का क्‍या होगा जहाँ जर्मन इन्‍हें भेज रहे हैं? हमें लगता है कि इनमें से अधिकांश लोग कत्‍ल कर दिए जाते हैं। अंग्रेज़ी रेडियो कहता है कि इन्‍हें गैस में डाल दिया जा रहा है। शायद मरने का सबसे शीघ्र तरीका है।'

एनी फ्रैंक, 9 अक्‍टूबर 1942

एम्‍स्‍टर्डम में यहूदियों का बाड़ा, 26 मई, 1943
ऑस्‍चविट्ज़ से वेस्‍टरबॉर्क की ओर रवाना होती ट्रेन

'आपको तो बहुत पहले से पता है कि मेरी सबसे बड़ी इच्‍छा पत्रकार और उसके बाद एक प्रसिद्ध लेखिका बनने की है।'

एनी फ्रैंक, 11 मई 1944

'क्‍या यह एक लंबे इंतज़ार वाली आजादी की शुरूआत है ? (...) ओह किटी, हमले का सबसे अच्‍छा हिस्‍सा वह है जब मुझे लगे कि मेरे मित्र चल पड़े हैं।'

एनी फ्रैंक, 6 जून 1944

अड्डे में छिपे लोग नोरमैंडी के आक्रमण के समाचार को उत्‍साह और आशा की नज़रों से देख रहे हैं। ओट्टो फ्रैंक इस गुप्‍त अड्डे के पारिवारिक कक्ष की दीवार पर नक्‍शे में पिनों द्वारा मित्र सेनाओं के बढ़ने का चिह्न लगाते हैं।

एनी की मृत्‍यु

4 अगस्‍त 1944 को छिपे हुए लोग गिरफ्तार हो गए: इनके साथ धोखा हुआ है। इन्‍हें नीदरलैंड्स में वेस्‍टरबॉर्क यातना शिविर में ले जाया गया। 3 सितंबर को इन्‍हें जर्मन अधिकृत पोलैंड में ऑशविट्ज-बिरकेनॉ यातना शिविर के लिए रवाना किया गया। इसके बाद पुरुषों और स्त्रियों को अलग-अलग कर दिया गया। एनी अपने पिता को अंतिम बार देखती है। उसे मार्गट एवं एडिथ के साथ महिलाओं के बैरक में रखा गया है।

अक्‍टूबर के अंत तक एनी और मार्गट को जर्मनी की बर्गेन-बेलसन यातना शिविर में ले जाया गया। उनकी मां एडिथ ऑशविट्ज-बिरकेनॉ में रह गई और उसकी मृत्‍यु 6 जनवरी 1945 को हो गई। 

तीन दिनों की एक बेहद कष्‍टदायक ट्रेन यात्रा के बाद एनी और मार्गट जर्मनी में बर्गेन-बेलसन आ गए। यहाँ पहले से ही क्षमता से अधिक कैदी पटे पड़े हैं और उन्‍हें तंबुओं में रहना पड़ता है। जब भारी तूफान से तंबू उड़ जाते हैं, तो कैदियों को पहले से ही भीड़दार बैरकों में ठूँस दिया जाता है।

बर्गेन-बेलसन भयावह है। यहाँ खाने पीने को कुछ नहीं या बहुत कम है और साफ-सफाई का बुरा हाल है। कई कैदी बीमार हो गए और मर गए हैं। मार्गट और एनी फ्रैंक को कांट्रैक्‍ट टाइफस रोग हो गया। उनकी मृत्‍यु मार्च 1945 को होती है, जबकि इसके केवल दो सप्‍ताह बाद शिविर को छुड़ा लिया जाता है।

हनेली गोसलर और एनी फ्रैंक प्राथमिक कक्षा से ही एक दूसरे को जानती थीं। वे सन् 1942 में एनी के छिपने के लिए रवाना होने के बाद से नहीं मिल पाईं। बर्गेन-बेलसन में हनेली ने एनी को अंतिम बार देखा और बातें की।

जब रूसियों ने 27 जनवरी 1945 को ऑशविट्ज को छुड़ा लिया, और ऑट्टो फ्रैंक रिहा हो गए। वे युद्ध के दौरान इन छिपने वाले आठ लोगों में से जीवित बचने वाले इकलौते व्‍यक्ति हैं।

7 मई 1945 को जर्मन सेना ने पश्चिमी यूरोप में रीम्‍स, फ्रांस में आत्‍मसमर्पण कर दिया।

ओट्टो की वापसी

एक लंबी और कठिन यात्रा के बाद ओट्टो जून 1945 को वापस एम्‍स्‍टर्डम लौटते हैं। वे मिएप और जेन गिएस के पास जाते हैं। वह जानते हैं कि उनकी पत्‍नी एडिथ नहीं रहीं, पर अपनी बेटियों के बारे में कुछ नहीं जानते।

कुछ सप्‍ताह बाद उन्‍होंने सुना कि एनी और मार्गट दोनों मर चुकी हैं। इसके बाद मिएप ने उन्‍हें एनी की डायरी दी। उन्‍होंने इसे इस परिवार की गिरफ्तारी के बाद से ही संभालकर रखा है।

ओट्टो फ्रैंक और उनके चार मददगार, अगस्‍त 1945। पीछे : जोहैन्‍स क्‍लीमैन और विक्‍टर कुगलर। आगे :  मिएप गिएस, ओट्टो फ्रैंक और बेप वोस्‍कुइज्‍ल।

डायरी प्रकाशित हुई

बहुत विचार-विमर्श के बाद ओट्टो फ्रैंक ने एनी की डायरी को प्रकाशित करने का निश्‍चय किया। शुरूआत में एक प्रकाशक ढूँढना मुश्किल है। ओट्टो ने इस डायरी को अनेक लोगों को दिखाया। इनमें से एक इतिहासकार जैन रोमीन हैं।

उन्‍होंने इसके बारे में 3 अप्रैल 1946 को राष्‍ट्रीय समाचारपत्र 'हेट पैरूल' में एक आलेख लिखा। इस आलेख ने प्रकाशक कंपनी कांटैक्‍ट का ध्‍यान आकर्षित किया। इसने डायरी प्रकाशित करने का निर्णय किया। 25 जून 1947 को 'हेट आक्‍टेरुइस' प्रकाशित हुई। एनी का एक लेखिका बनने का सपना उसकी मृत्‍यु के बाद पूरा हुआ।

सन् 1952 में अंग्रेज़ी संस्‍करण 'एनी फ्रैंक: द डायरी ऑफ ए यंग गर्ल' के प्रकाशन ने एनी की डायरी को मशहूर बना दिया। सन् 1955 में दो अमेरिकी नाटककारों ने इसे थिएटर के लिए रूपांतरित किया। इस नाटक ने ब्रॉडवे में भारी सफलता हासिल की।

सन् 1959 में इस नाटक पर फिल्‍म बनी जिसमें मिली परकिंस ने एनी फ्रैंक की भूमिका निभाई।

छिपने का अड्डा से संग्रहालय तक\

डायरी की सफलता ने एनी फ्रैंक के छिपने वाले अड्डे के प्रति रुचि पैदा कर दी। जल्‍दी ही लोग इस गुप्‍त छिपने के ठिकाने को देखने के लिए आने लगे और उन्‍हें चारों ओर ओपेक्‍टा कर्मचारी यह दिखाते। सन् 1955 में कंपनी अन्‍यत्र चली गई। यह इमारत जीर्ण-शीर्ण अवस्‍था में थी इसलिए इसे गिराने की योजना बनी, पर एम्‍स्‍टर्डम के जागरुक नागरिकों का शुक्र है कि यह बच गई। ओट्टो फ्रैंक के साथ मिलकर इसे एनी फ्रैंक हाउस के रूप में स्‍थापित किया और इस संग्रहालय को जनता के लिए 3 मई 1960 को खोला गया।

स्‍कार्सडेल से आए अमेरिकी छात्रों का दल सन् 1961 में एनी फ्रैंक हाउस का भ्रमण करता है।

सन् 1953 में ओट्टो फ्रैंक ने फ्रिट्ज़ी मारकोविट्ज़ से शादी कर ली और वे स्विट्ज़रलैंड चले जाते हैं। उनकी बेटी की डायरी अभी भी उनके जीवन में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्‍हें दुनियाभर से पाठकों के हजारों पत्र मिलते हैं। फ्रिट्ज़ी और ओट्टो उनका जवाब देते हैं। ओट्टो की मृत्‍यु 1980 में होती है।

एनी फ्रैंक हाउस ने सन् 1960 में खुलने के साथ ही ढेर सारे आगंतुकों को आकर्षित किया। लोगों की बढ़ती रुचि को ध्‍यान में रखते हुए नब्‍बे के दशक के मध्‍य में प्रिंसेन्‍ग्रैच्‍ट और वेस्‍टरमार्क्ट के बीच में एक नई इमारत बनाई गई। आजकल यह संग्रहालय प्रति वर्ष दस लाख से भी अधिक दर्शकों को आकर्षित करता है।

नीचे मिएप गिएस के संग्रहालय में आखिरी चलते‍-फिरते चित्र दिए गए हैं: वह सन् 1999 के नए संग्रहालय के खुलने के ठीक पहले कुछ व्‍यक्तिगत दस्‍तावेज को संभाल रही हैं। 

मिएप गिएस छिपने वाले लोगों के मददगारों में एक हैं।

जो लोग एम्‍स्‍टर्डम में संग्रहालय देखने जाने में असमर्थ हैं, उनके लिए एनी फ्रैंक हाउस ने ऑनलाइन एक गुप्‍त छिपने का अड्डा बनाया है, यह युद्ध के समय छिपने वाले ठिकाने का एक 3डी संस्‍करण है।

एनी फ्रैंक हाउस एक स्‍वतंत्र संस्‍था है जो गुप्‍त ठिकाने की देखभाल के लिए निर्मित है। यह दुनियाभर के लोगों के सामने ऐनी की जीवन गाथा का बयान करती है तथा लोगों को यहूदी विरोधवाद, नस्‍लवाद और भेदभाव के खतरों से आगाह कराती है तथा आजादी, समानता, समान अधिकारों और लोकतंत्र के महत्‍व का बयान करती है।

इस प्रदर्शनी की पृष्ठभूमि में गुप्‍त ठिकाने में एनी फ्रैंक के कमरे की एक दीवार दिखाई दे रही है जिसमें उसने अनेक भिन्‍न-भिन्‍न चित्र चिपकाए हैं।

आभार: कहानी

This exhibit has been created by the Anne Frank House
in Amsterdam. — For more information, visit http://www.annefrank.org. 

Diary quotes Anne Frank: —
Anne Frank: The Diary of a Young Girl : the definitive edition. Ed. by Otto H. Frank and Mirjam Pressler; transl. by Susan Massotty. — Copyright © The Anne Frank - Fonds, Basle, Switzerland, 1991, 2001
English translation of the diary — Copyright © Doubleday, a division of Random House, Inc. 1995, 2001

क्रेडिट: सभी मीडिया
कुछ मामलों में ऐसा हो सकता है कि पेश की गई कहानी किसी स्वतंत्र तीसरे पक्ष ने बनाई हो और वह नीचे दिए गए उन संस्थानों की सोच से मेल न खाती हो, जिन्होंने यह सामग्री आप तक पहुंचाई है.
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