30 अग॰ 1980

एकता और आयरन कर्टन का गिरना

Polish History Museum

"इस नए यूरोप के जन्म में पोलिश क्रांति सबसे पहली महान पहल थी. अगर यूरोपीय समाज का प्रारंभ पोलैंड के याल्टा में हुआ था तो वास्तव में इसके अंत का प्रारंभ भी पोलैंड के याल्टा में हुआ होगा. "
टिमोटी गार्टन ऐश, पोलिश क्रांति: सॉलिडैरिटी , 1999

नया यूरोपीय समाज

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सोवियत संघ ने मध्य और पूर्वी यूरोप में साम्यवादी तानाशाही का राज चलाया. पूर्वी समाज के देशों में सामाजिक, राजनैतिक और आर्थिक जीवन में समरूपता सोवियत के आदर्शों पर आधारित था. इस प्रक्रिया का प्रारंभ साम्यवादी दल के लिए राजनैतिक एकाधिकार का निर्माण, गुप्त पुलिस बल का गठन, सेंसरशिप का प्रारंभ और मीडिया पर नियंत्रण करके किया गया. यह मतप्रचार के उद्देश्य से बहुत महत्वपूर्ण था.

मतप्रचार का इश्तिहार. जिसपर लिखा है: ‘सोवियत सेना शांति का संरक्षक’
1970 से 1980 तक रहे, पोलिश यूनाइटेड वर्कर्स पार्टी (साम्यवादी PZPR) के पहले सचिव, एड्वार्ड गेरेक. गेरेक इस दल और राज्य के वास्तविक नेता थे. युद्ध की समाप्ति के बाद आए गहरे आर्थिक संकट पर रोक लगाते हुए उनके नेतृत्व में देश ने अभूतपूर्व आर्थिक उछाल देखा.
संस्कृति और विज्ञान महल के भविष्य-सूचक छायाचित्र में वर्कर परेड

वार्षिक मे डे परेड को सत्ताधारी साम्यवादी दल के प्रति सामूहिक समर्थन के लिए प्रदर्शित किया जाना था. विभिन्न कंपनियों और उत्पादन संयंत्रों, विद्यालयों, विश्वविद्यालयों, सामाजिक संगठनों और सेना का प्रतिनिधित्व कर रहे प्रमुख व्यक्तियों के साथ-साथ प्रसिद्ध फ़िल्म अभिनेताओं एवं संगीतकारों ने दल के उन प्रतिनिधियों के सामने मार्च किया और हाथ हिलाकर अभिनंदन किया जो मंच पर बैठकर उन्हें देख रहे थे. इस मार्च को टेलीवीज़न पर दिखाया गया. हालांकि, इस परेड में भाग नहीं लेने वाले लोगों को उनके कार्यस्थल में प्रताड़ित किए जाने की बात से उत्सव का माहौल इस बात से उत्सव का माहौल खराब था. 

ज़िलोना गोरा में सोवियत संगित उत्सव का आयोजन पैनेक में किया गया था. इस अवसर का उद्देश्य पोलिश-सोवियत मित्रता को मज़बूत करना था.
„Ręce do góry” (“हाथ ऊपर उठाओ”). जर्ज़ी स्कोलिमोस्क द्वारा 1967 में बनाई गई फ़िल्म जिसपर 1981 के बाद सेंसर द्वारा प्रतिबंध लगा दिया गया था
राइज़ार्ड बुगाजस्की द्वारा निर्दशित फ़िल्म „Przesłuchanie” (“इंटेरोगेशन”) में क्रिस्टीना जंडा

संस्कृति और सेंसरशिप

राजनैतिक या सैद्धांतिक वर्जित पहलुओं का उल्लंघन करने वाले कलाकारों को इस तथ्य से अवगत कराया जाता था कि उनके कार्य को देखने वाला केवल सेंसर होगा. कई लेखक और फ़िल्मकारों को देश से निकाल दिया गया: सेंसर द्वारा जर्ज़ी स्कोलिमोस्की की “Hands Up” पर प्रतिबंध लगाने के बाद पश्चिम भेज दिया गया और राइज़ार्ड बुगाजस्की को “Interrogation” के वितरण पर प्राधिकारियों द्वारा रोक लगाने के बाद भेज दिया गया.

साहित्य में नोबल पुरस्कार प्राप्त करते चेज़स्लो माइलोज़
राशन कूपन

अर्थव्यवस्था

साम्यवादी सरकार द्वारा प्रारंभ की गई केंद्र-नियोजित अर्थव्यवस्था उद्योग या सेवा क्षेत्र में निजी संपत्ति सहन नहीं कर सकती थी. सरकार की नीतियों के कारण लाभ और औद्योगिक नवपरिवर्तन में हानि होने लगी. इसके अलावा सेवाओं के स्तर और खाद्य सामग्री के वितरण में गिरावट आने लगी.

किराने की दुकान के सामने लगी कतार

हड़ताल और दंगे

कई दशकों तक पोलिश यूनाइटेड वर्कर पार्टी ने किसी भी प्रकार की राजनैतिक प्रतियोगिता या विश्वसनीय श्रमिक गतिविधियों में भाग लेने से मना किया. जून 1956 में श्रमिकों द्वारा किए गए हड़तालों और दंगों को पोज़नन में निर्दयता से कूचल दिया गया जिसमें 73 लोगों की जाने गईं और सौ से अधिक लोग घायल हो गए.

मार्च 1968. “रूसोफ़ोबिया” (रूस के प्रति भय और घृणा की भावना) पर आधारित 19 वी सदी में एडम मिकीविज़ की “Forefathers’ Eve” नाम के एक नाटक के प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगाने पर मार्च 1968 में छात्र विद्रोह भड़क उठा.

वर्ष 1970, बाल्टिक का समुद्र तट. खाद्य सामग्रियों की बढ़ती कीमतों के कारण भड़का श्रमिकों का विरोद्ध प्रदर्शन ग्डांस्क, ग्डानिया और शचेचीन जैसे पोलिश बंदरगाहों वाले शहरों में बहुत तेज़ी से पहुंच गया. विद्रोहियों को नागरिक सेना और सेन्य टुकड़ियों (कुल 61,000 नागरिक सेना के अधिकारी और टुकड़ियां शामिल थीं) द्वारा तितर बितर किया गया. इस संघर्ष में 45 लोग मारे गए और 1165 घायल हो गए.

जून 1956 पोज़नन
मार्च 1968 वारसॉ
दिसंबर 1970 ग्डानिया
रेडम में जून 1976

वर्कर डिफेंस कमिटी (KOR)

रेडम, प्वॉत्स और उर्सस में विद्रोह के परिणामस्वरूप हज़ारों श्रमिकों को नौकरी से निकाल दिया गया. उनकी सहायता के उद्देश्य से वर्कर डिफ़ेंस कमिटी (KOR) का गठन किया गया. यह संगठन प्राधिकारियों की अनुमति के बिना कार्य कर रहा था. इसकी स्थापना व्यवस्था का विरोध करने वाले प्रबुद्ध व्यक्तियों की अगुवाई कर रहे लोगों द्वारा की गई थी. KOR के गुप्तचर बहुत जल्द ही अधिकांश लोगों के पास वित्तीय और कानूनी सहायता सहित पहुंच गए जिन्हें इसकी आवश्यकता थी. KOR कार्यकर्ताओं पर प्राधिकारियों द्वारा रोक लगा दी गई: उनके फ़्लैट की जांच की गई, उन्हें गिरफ़्तार किया गया और कुछ को तो ‘अज्ञात अक्रमणकारियों’ द्वारा पिटा गया. वास्तव में ये हमलावर सुरक्षा सेवाओं के एजेंट थे.  जल्द ही कुछ अन्य विरोधी संगठनों का गठन किया गया, जैसे कि मूवमेंट फ़ॉर डिफ़ेंस ऑफ़ ह्यूमन एंड सिविक राइट (ROPCiO) और फ़्री ट्रेड यूनियन (वोल्ने ज़िवास्की ज़ावोडोव).

1979 में, क्राको में, जॉन पॉल द्वितीय

जॉन पॉल द्वितीय

16 अक्टूबर 1978 में क्राकूफ़ के प्रधान पादरी कैरोल वोयत्यावा को पादरी चुना गया. इस चयन समाचार को पोलैंड में अति-उत्साह के साथ और दशकों से हो रहे राष्ट्रीय अपमान और गिरिजाघर उत्पीड़न के विरूद्ध ऐतिहासिक विजय के रूप में लिया गया. जून 1979 में पोप अपनी नई भूमिका में पहली बार पोलैंड के दौरे पर आए. उन्होंने एक भव्य धार्मिक उत्सव में भाग लेने आए अपने लाखों पोलिश वासियों से भेंट की. पोलिश वासियों का उनसे मिलना केवल उनके विश्वास का प्रदर्शन नहीं था बल्कि यह एक स्वतंत्र देश में जीने की उनकी इच्छा प्रकट करने का अवसर भी था.

चेकोस्टोकोवा में जॉन पॉल द्वितीय
अपनी पीढ़ी को संबोधित करते हुए लेक वालेसा
14 अगस्त 1980: ग्डांस्क में वी. लेनिन शिपयार्ड पर हमला प्रारंभ हुआ

सॉलिडर्नोस्च

सॉलिडर्नोस्च का उदय अगस्त 1980 में देशव्यापी हड़ताल के कारण ग्डांस्क में वी. लेनिन शिपयार्ड पर हुआ. शिपयार्ड के दो कर्मचारी, एना वेलेंटीनोविच और लेख वालेसा को नौकरी से निकाले जाने के कारण शेष कर्मचारियों ने अपनी एकता प्रकट करने के लिए हड़ताल कर दी.

हड़ताल वाले शिपयार्ड पर धार्मिक समागम का उत्सव मनाया गया.
एना वेलेंटिनोविच हड़ताल करने वालों के परिजनों से बात करते हुए. वेलेंटिनोविच वर्कर राइट के कार्यकर्ता थे और 1979 में उन्होंने अवैध फ़्री ट्रेड यूनियन (WZZ) की स्थापना की.

21 मांगें

अन्य उत्पादन संयंत्रो ने हड़ताल में भाग लिया. ग्डांस्क के प्रतिनिधियों की एक समिति और पड़ोसी शहर बनाए गए.

हड़ताल करने वाले, इस विद्रोह को समाप्त करने की शर्तों पर साम्यवादी सरकार से बातचीत करना चाहते थे. इस समिति ने अपनी शर्तों में 21 मांगें की.

अंत में सरकार हड़ताल करने वालों से समझौता करने के लिए तैयार हो गई.

21 मांगें

17 अगस्त 1980 में, ग्डांस्क में व्लादमिर लेनिन शिपयार्ड की अंतर-उद्योग हड़ताल समिति की 21 मांगें

1. मुक्त व्यापार संघों के निर्माण अधिकारों से संबंधित अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन की 87 वी संविदा के अनुसार साम्यवादी दल और इसके उद्योगों से मुक्त व्यापार संघों की स्वतंत्रता को स्वीकार करना.

2. हड़ताल करने और हड़ताल करने वालों एवं इसे समर्थन देने वालों की सुरक्षा की गारंटी.

3. सांविधानिक गारंटी के अंतर्गत भाषण अधिकार, स्वतंत्र प्रकाशकों सहित प्रेस और प्रकाशन की स्वतंत्रता और सभी मान्यताओं के प्रतिनिधियों के लिए मीडिया की उपलब्धता.

4. इन्हें पुराने अधिकार लौटाएं:

a) 1970 और 1976 के बीच हुई हड़तालों में नौकरी से निकाले गए लोगों और अपने विचारों के कारण परिक्षा से बाहर निकाले गए विद्यार्थियों को पुराने अधिकार लौटाएं.(...)

5.अंतर-उद्योग हड़ताल समिति के गठन और इसकी मांगों की जानकारी मीडिया में उपलब्ध कराना.(...)

9. मूल्य वृद्धि और मूल आमदनी के आधार पर वेतन में स्वतः वृद्धि की गारंटी.

12. दल सदस्यता की बजाय योग्यता के आधार पर अनुशासन कार्मिकों का चयन किया जाएं. गुप्त पुलिस, सामान्य पुलिस और दल प्रणाली को मिलने वाली सुविधाएं रद्द की जाएं.

हड़ताल कर रहे उत्पादन संयंत्रों के प्रतिनिधि मध्यस्थों की बात सुनते हुए
वार्ता की रिकॉर्डिंग
21 मांगों पर सरकार की स्वीकृति दर्शाता हुआ अगस्त अनुबंध का हस्ताक्षर
31 अगस्त 1980 को हड़ताल समाप्त हुआ
सॉलिडेरिटी व्यापार संघ के पंजीकरण के बाद विजय के आनंद में वालेसा को उठाते हुए उनके समर्थक

मुक्त और स्वतंत्र व्यापार संघ के निर्माण हेतु श्रमिकों के अधिकार की अभिस्वीकृति, 21 मांगों में से एक थी. The इस आधार पर स्वतंत्र स्वायत्त व्यापार संघ ‘सॉलिडर्नोस्च’ (Niezależny Samorządny Związek Zawodowy Solidarność) का गठन किया गया. वास्तव में, यह संगठन मात्र एक व्यापार संघ नहीं रह गया. यह राष्ट्रीय एवं नागरिक अधिकार आंदोलन का परिणाम था जिसके सदस्य भिन्न सामाजिक समूहों और राजनैतिक अनुस्थापनों से संबंधित थे. वर्ष 1981 की समाप्ति तक लगभग एक लाख लोग इस संगठन के सदस्य बन गए.

मे डे 1981 के लिए बना सॉलिडेरिटी पोस्टर
1981 में किसानों की एकता की मांग करते प्रदर्शनकारी
1970 में बना शिपयार्ड के शहिद हुए कर्मचारियों का स्मारक – साम्यवादी शासन द्वारा पीड़ितों का पहला स्मारक
1947 के बाद पोलैंड में सबसे पहले स्वतंत्र समाचारपत्र „Tygodnik Solidarność” (सॉलिडार्रनोस्क साप्ताहिक), को उसके मुख्य संपादक तदेयोश मवोवेस्की प्रदर्शित करते हुए
1981, में ग्डांस्क में सॉलिडार्नोस्क की पहली महासभा

NSZZ ‘Solidarność’ के पहल कांग्रेस के प्रतिनिधियों द्वारा पूर्वी यूरोप के कार्यरत लोगों के लिए जारी किया गया संदेश

अल्बानिया, बुल्गारिया, चेकस्लोवाकिया, जर्मन लोकतांत्रिक गणराज्य, रोमानिया, हंगरी और सोवियत संघ के सभी देशों के कर्मचारियों का समर्थन करने के बारे में बात करने के लिए स्वतंत्र व्यापार संघ "एकीकरण" के प्रतिनिधियों की पहली कांग्रेस में गैडनेस्क में प्रतिनिधि जमा हुए. युद्ध के बाद के हमारे इतिहास में पहले स्वतंत्र व्यापार संघ होने के नाते हम अच्छी तरह जानते हैं कि हमारी किस्मत एक दूसरे के साथ जुड़ी हुई है. हम आपको सुनिश्चित करते हैं कि आपके देशों में फैल रहे झूंठ के विरोध में, हमने एक 10 मीलियन-सशक्त कर्मचारियों वाला एक संगठन बनाया है जो कि कर्मचारियों की हड़ताल का नतीजा है.हमारा मकसद सभी काम करने वाले लोगों के लिए बेहतर जीवन स्तरों के लिए लड़ना है. हम आप में से उन लोगों को समर्थन देते हैं जो मुक्त व्यापार आंदोलन के लिए मुश्किल लड़ाई के रास्ते में सम्मिलित होने का निर्णय लेते हैं. हमें विश्वास है कि आपके और हमारे प्रतिनिधि संघ-संबंधित अनुभव का आदान-प्रदान करने की दृष्टि से जल्द ही पूरा करने में सक्षम होंगे.

आंद्रेज वाजदा की ‘मैन ऑफ़ आयरन’ Solidarność के बारे में बनाई गई पहली फ़िल्म थी.  इसे कान फ़िल्म समारोह में पाम दी’ओर से नवाज़ा गया था
13 दिसंबर 1981:  जनरल ज़ारूजेल्सकी ने पोलैंड में सैनिक कानून की घोषणा कर दी

मार्शल लॉ

सत्ताधारी साम्यवादी पार्टी (पोलिस यूनाईटेड वर्कर्स पार्टी) ने धीरे-धीरे अपनी शक्ति को कम करने से इंकार कर दिया. देश में राजनैतिक स्थिति दिन-ब-दिन अधिक तनावपूर्ण हो रही थी. 1981 के बसंत में, रक्षा मंत्री, जर्नल वोज्शिएक जरुज़ेस्की, साम्यवादी पार्टी PZPR के पहले सचिव बने. 13 दिसंबर, 1981 को जरुज़ेस्की ने देश में मार्शल लॉ लगाया. राज्य परिषद ने एकीकरण की गतिविधियां जारी रखने के अधिकार सहित नागरिक अधिकार और स्वतंत्रता खत्म कर दी. रात भर में, पुलिस, सुरक्षा सेवाएं और एकीकरण के सभी मुख्यालय पर कब्ज़ा कर लिया और लेक वालेसा सहित, लगभग 10,000 विपक्षी कार्यकर्ताओं को नज़रबंद कर दिया. हड़ताल पर गए संयंत्र कर्मियों का क्रूर दमन किया गया. सिलेसिया में वूजे़क खान में नौ खनिक गोली से मार दिए गए थे. मार्शल लॉ औपचारिक रूप से 1983 तक लागू रहा, लेकिन एकीककरण ने इसे अवैध ठहरा दिया था विपक्ष का दमन जारी रहा.

कोयला खदान के सामने सैनिक बख़्तरबंद वाहन
Lubin में विपक्ष के प्रदर्शन पर 'नागरिक मिलिशिया हमले (ZOMO) की मोटरयुक्त भंडार के शिकार
1980 के दशक के तानाशाही के पीड़ितों में सॉलिडेरिटी पादरी, फादर ज़ेरजे पोपीलूज़्को भी शामिल थे, जिनकी 1984 की शरद ऋतु में हत्या कर दी गई थी
मे डे, 1982 पर सैनिक कानून के खिलाफ प्रदर्शन
नज़रबंद किए गए विपक्षी कार्यकर्ता जेल में घूमते हुए
पोलैंड के साथ एकजुटता
नज़रबंद लेक वालेसा का परिवार दीवार पर लगी उनके चित्र के साथ

लेक वालेसा के लिए शांति का नोबेल पुरस्कार

1983 में लेक वालेसा को शांति के नोबेल पुरस्कार दिए जाने को, लोकतांत्रिक विश्व द्वारा एकजुटता का समर्थन करने का मजबूत संकेत माना गया. कम्युनिस्ट सरकार ने लेक वालेसा को व्यक्तिगत रूप से पुरस्कार प्राप्त करने से रोकने के लिए पासपोर्ट जारी करने से मना कर दिया.  ओस्लो में उनकी ओर से पुरस्कार उनकी पत्नि और सबसे बड़े बेटे ने लिया.

"द्रुगी उबीग"

1970 के अंतिम दिनों में "द्रुगी उबीग" का आरंभ (जो समीजदात का पोलिस समतुल्य है). हालांकि, गुप्त रूप से मुद्रित कार्य का वितरण, जो विपक्ष की प्रेरक शक्ति बना, मार्शल लॉ के वर्ष (1981-1983) तक नहीं रहा. एकीकरण नेता जो कारावास से भाग निकले थे, उन्होंने मुद्रण की दुकानें और वितरण का गुप्त नेटवर्क बनाया. अधिकारी और पार्टी नियंत्रित मीडिया के अधिकार लेने के लिए कई प्रकार के प्रकाशन मुद्रित किए गए थे. किताबें, आवधिक पत्र-पत्रिकाएं, सूचना-पत्र और पोस्टर, यहां तक कि डाक टिकट और पोस्ट कार्ड मुद्रित किए गए थे और इनका व्यापक रूप से वितरण किया गया था.

नाइंटीन एटी-फ़ोर
डार्कनेस ऐट नून
दी कैप्टिव माइंड
सोलीडार्नोस्क जीवन!!!
1988 वारसॉ विश्वविद्यालय में छात्र हड़ताल
एकजुटता के पुनः वैधीकरण की मांग करने वाले शिपयार्ड कर्मियों की हड़ताल
दसवीं कम्युनिस्ट पार्टी कांग्रेस (PZPR) के दौरान जनरल जारूज़ेल्स्की के साथ मिखाइल गोर्बाचेव की वार्ता

गोलमेज

1989 में, बढ़ते आर्थिक संकट का सामना करते हुए और सोवियत संघ की तत्कालीन पेरेस्ट्रॉइक नीति के प्रभाव में आकर जनरल जेरूज़ेल्स्की ने विपक्ष के साथ बातचीत करने का निर्णय लिया.  गोलमेज वार्ताएं फ़रवरी में शुरू हुईं.  इन वार्ताओं के परिणामस्वरूप एकजुटता का पुनः वैधीकरण करने और स्वतंत्र चुनावों द्वारा सीनेट के लिए सदस्यों के चुनाव तथा सेज्म (पोलिश संसद) के लिए 35 प्रतिशत सदस्यों के चुनाव पर सहमति बनी.

1989 की गोलमेज वार्ता

राष्ट्रों का पतन

पोलैंड में गोलमेज वार्ताओं के आरंभ होने के कुछ समय बाद ही हंगरी ने स्वयं को बदलना प्रारंभ कर दिया. जून में, हंगरी-ऑस्ट्रिया की सीमा पर लगे कटीले तारों को हटा दिया गया.  अगस्त में 'राष्ट्रों का पतन' – कम्युनिस्ट तानाशाही के खिलाफ़ सामूहिक प्रदर्शनों की लहर – शेष पूर्वी राष्ट्रों में फ़ैल गया.  जर्मनी, चेक, स्लोवाकिया, बुल्गारिया, रोमानिया और सोवियत संघ के बाल्टिक गणतंत्र के राष्ट्र खुलकर स्वंत्रता की मांग करने लगे. बर्लिन की दीवार गिरी.  ‘वेलवेट क्रांति’ के परिणामस्वरूप, वैक्लाव हेवेल को चेकस्लोवाकिया गणतंत्र का राष्ट्रपति चुना गया.  रोमानिया में, सेना ने निकोल सिसेसू के खिलाफ़ विरोधियों का साथ दिया.  लोकतांत्रिक रूपांतरण मिखाइल गोर्बाचेव के एक निर्णय के कारण पूर्वी सोवियत राष्ट्र में लोकतांत्रिक रूपांतरण आसानी से हो गया जिन्होंने केंद्रीय और पूर्वी यूरोप के देशों में सेना के हस्तक्षेप को समाप्त कर दिया.

लेक वालेसा के साथ नागरिक समिति (Komitet Obywatelski) के उम्मीदवारों को दर्शाने वाले पोस्टर

4 जून को मतदान हुआ, जिसमें लेक वालेसा द्वारा संस्थापित नागरिक समिति और एकजुटता नेताओं ने सेज्म की सभी 35 % सीटों और सीनेट की 100 में से 99 सीटों पर जीत दर्ज की.

विपक्ष की भारी जीत के कारण 12 सितंबर 1989 को पूर्वी यूरोप में पहली गैर-कम्युनिस्ट सरकार का गठन हुआ जिसके मुखिया विपक्ष के नेता और एकजुटता के सलाहकार तदोज़ माज़ोवेस्की थे.

सोलिडार्नोस्क की चुनावी पोस्टर 1989
प्रधानमंत्री बनने के बाद तादोज़ माज़ोवेस्की का सेज्म का पहला दौरा

स्वतंत्र पोलैंड

जनवरी 1990 देश के परंपरागत नाम, पोलैंड गणराज्य (पोलिश जनवादी गणराज्य के स्थान पर) की वापसी और बालकेरोविज़ योजना के रूप में प्रचलित स्वतंत्र-बाजार सुधारों के कार्यान्वयन के साथ शुरू हुआ. मई में पोलैंड के लोगों ने अपने पहले स्वतंत्र और मुक्त स्थानीय चुनावों में मतदान किया. 1990 स्वतंत्र और स्वाधीन पोलैंड का पहला वर्ष था, लेकिन इसने एकता आंदोलन को उस स्वरूप में समाप्त कर दिया जोकि 1980 के दशक में था. नागरिक समीति विभाजित हो गई और शरद काल में लेक वालेसा, तादोज़ माज़ोवेस्की के खिलाफ राष्ट्रपति चुनावों में खड़े हुए.

माज़ोवेस्की को तीसरे उम्मीदवार ने पहले चरण में ही हरा दिया और वालेसा ने दूसरा चरण 75% मतों के साथ जीत लिया.

22 दिसंबर 1990:  राष्ट्रपति पद की शपथ लेते लेक वालेसा

“1980 की गर्मियों से लेकर 1990 की शरद ऋतु के बीच के दस वर्षों के दौरान, पोलैंड में भारी राजनैतिक उथल-पुथल रही, जैसे कि कुछ देशों में हमेशा होता है. दशक के प्रारंभ में उस पर कम्युनिस्ट तानाशाही और सोवियत राष्ट्रों का शासन था. अंत में, वह एक स्वतंत्र देश बन गया”.

नॉर्मन डेविस, "गॉड्स प्लेग्राउंड" ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, 2005
आभार: कहानी

Curation — Michał Zarychta, Polish History Museum
Translation —  Thomas Anessi, Barbara Kościa
IT — Artur Szymański

क्रेडिट: सभी मीडिया
कुछ मामलों में ऐसा हो सकता है कि पेश की गई कहानी किसी स्वतंत्र तीसरे पक्ष ने बनाई हो और वह नीचे दिए गए उन संस्थानों की सोच से मेल न खाती हो, जिन्होंने यह सामग्री आप तक पहुंचाई है.
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