बुखारेस्ट, जीत का शहर

TVR, The Romanian Public Broadcaster

"चाउसेस्कु के लिए, वो बालकनी और वो चौराहा बहुत लंबे समय से उनकी निरपेक्ष, निर्विवाद शक्ति का प्रतीक रहा था. प्रदर्शनकारियों द्वारा अपनी निंदा होते हुए देखकर वह बिल्कुल स्तब्ध रह गए और वह इस पर कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दे सका."
मिहाइल एम. आंद्रेस्कु, इयॉन बुकर, "Revoluţia Română în București" [बुखारेस्ट में रोमानिया की क्रांति]
लोगों से दोस्ती करती रोमानिया की सेना

तिमिसोआरा की घटनाओं के कारण, 21 दिसंबर, 1989 को, निकोलाइ चाउसेस्कु ने एक जन सभा का आयोजन किया जिसमें भाग लेने के लिए बुखारेस्ट की फ़ैक्टरी और कारखानों के कर्मचारियों को आमंत्रित किया गया. दोपहर 12 बजे, तिमिसोआरा के विरोध प्रदर्शनों की निंदा करने वाली और तानाशाह तथा रोमेनियन कम्युनिस्ट पार्टी का समर्थन करने वाली तख्तियां अपने हाथों में लिए लगभग 100,000 लोग, चाउसेस्कु का भाषण सुन रहे थे. उसने न्यूनतम मजदूरी में बहुत थोड़ी सी राशि बढ़ाने और बाल लाभों में थोड़ी वृद्धि करने के अपने निर्णय की घोषणा की. उन्होंने प्रदर्शन के आयोजकों का भी धन्यवाद किया.

कर्मचारियों के एक प्रतिनिधि ने लोगों की भीड़ के सामने, कर्मचारियों की एकता पर एक भाषण दिया, जिसमें उसने तिमिसोआरा के विरोध प्रदर्शनों के प्रति चाउसेस्कु के रवैये को सही ठहराया.

अंतिम "जन सभा"

25 सालों में पहली बार, अचानक लोगों के गरजने की आवाज़ सुनाई दी. चाउसेस्कु दंग रह गया और उसे समझ नहीं आया की वहां आखिर हो क्या रहा था. उसने कई बार "हैलो-हैलो!" कहा और इस दौरान टीवी का प्रसारण बंद हो गया.

चाउसेस्कु ने प्रदर्शनकारियों से कहा: "कॉमरेड, शांति से अपनी जगह पर बैठ जाइये", लेकिन लोग बस उनकी निंदा किए जा रहे थे. एथेनियम के प्रदर्शनकारी स्क्वेयर को छोड़कर जाने लगे. इस सब का एहसास बहुत भयानक था.

रोमेनियन कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के सामने, पैलेस स्क्वेयर के बाहर प्रदर्शनकारियों की भीड़

राष्ट्रपति निकोलाइ का कथित रूप से समर्थन करने वाली भीड़ ने उनके विरोधियों का गंभीर रूप धारण कर लिया और कुछ प्रतिभागी राजधानी के केंद्रीय भाग में कई स्थानों पर फिर से जमा हुए. दोपहर 1:30 से 2 बजे के बीच 150 से अधिक प्रदर्शनकारियों को बंदी बना लिया गया. बुखारेस्ट की क्रांति का पहला शिकार वह आदमी बना जिसे निगोइ होटल के सामने गोली मार दी गई. नागरिक सेना के एक मेजर ने अपनी रिवॉल्वर से एक प्रदर्शनकारी की हत्या कर दी. दोपहर 2:50 बजे, राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय से बख़्तरबंद वाहन और सेना के जवान यूनिवर्सिटी स्क्वेयर पर पहुंचे, लेकिन भीड़ को रोकने का पहला स्पष्ट आदेश रक्षा मंत्री, जनरल वासिल मिलिआ से 4:37 बजे आया. उसने आदेश दिया की रोमाना स्क्वेयर, इंटरकॉन्टिनेंटल होटल और यूनिरी स्क्वेयर से प्रदर्शनकारियों को तितर बितर कर दिया जाए.

लगभग 200 लोग 3 बजे यूनिवर्सिटी स्क्वेयर पर इकट्ठे हुए और अपने घुटनों पर बैठकर प्रार्थना करनी शुरू कर दी. तिमिसोआरा के पीड़ितों के लिए कुछ देर का मौन भी रखा गया. क्रांतिकारी दुमित्रु दिनका और डैन लोसिफ ने, यूनिवर्सिटी स्क्वेयर पर प्रदर्शन के शुरुआती कुछ घंटों में बने संयुक्त कर्मचारी फ़्रंट नाम के समूह के बारे में बताया.

शाम 4:30 बजे के आसपास, एक ऐसी घटना घटी जिसके कारण उस माहौल में और तनाव फैल गया. एक नागरिक द्वारा फेंकी गई ईंट, सेना की लॉरी के चालक के सिर पे जाकर लगी. चालक, जो कि सेना का ही सदस्य था, अपना होश और वाहन पर अपना नियंत्रण खो बैठा. वाहन लगातार अनियंत्रित होकर चलता रहा, जिससे प्रदर्शनकारियों और सेना, दोनों के ही कई लोग दुर्घटनाग्रस्त हो गए. इसमें सात लोगों की मृत्यु हुई और आठ घायल हुए. संध्या 5 बजे, बिल्डिंग, टैंक और रैंक के भीतर से प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाई गईं.

इंटरकॉन्टिनेंटल होटल की मोर्चाबंदी

शाम 6:20 बजे के आसपास, प्रदर्शनकारियों ने वाहनों, ट्रकों और डनेरिया (डान्यूब) रेस्टोरेंट के फ़र्नीचर से मोर्चाबंदी कर दी. डैन लोफिस, रोमियो रायकु, राडू सिलागी ने भीड़ को घर नहीं जाने की सलाह दी. दुमित्रु दिनका और डैन लोफिस उन लोगों में से थे जो नेता के रूप में सामने आए. ये वही लोग थे जिन्होंने भीड़ को प्रेरणादायक भाषण दिए.

"इंटरकॉन्टिनेंटल होटल की मोर्चाबंदी और तिमिसोआरा ओपेरा हाउस की बालकनी, 1989 की रोमानिया की क्रांति के सबसे प्रमुख प्रतीक थे और हमेशा बने रहे,"

मिहाइल एम. आंद्रेस्कु, इयॉन बुकर, "Revoluţia Română în București" [बुखारेस्ट में रोमानिया की क्रांति]

रात 11:30 बजे और आधी रात के बीच मोर्चाबंदी के विरुद्ध कार्रवाई हुई. बख़्तरबंद वाहनों ने डनेरिया रेस्टोरेंट के आसपास प्रदर्शनकारियों पर हमला कर दिया. आंसू गैस के गोलों का उपयोग किया गया और मोर्चाबंदी में लगे ट्रकों को आग लगा दी गई. 11:50 बजे ऑटोमेटिक मशीनगन से गोली बारी की गई और USLA (विशेष आतंकरोधी कॉम्बेट यूनिट) के लड़ाकों को मौके पर बुला लिया गया. आधी रात को, 800 लोग मोर्चाबंदी के पीछे बचे हुए थे और सेना के जवानों ने बख़्तरबंद वाहनों से मोर्चाबंदी को तोड़ने का प्रयास किया. एक दूसरा टैंक और ज्यादा लोगों को घायल करता हुआ मोर्चाबंदी से होकर गुजरा. क्रांतिकारियों पर चार टैंकों से हमला किया जा रहा था. चार टैंकों, जिनमें से दो मगेरू बुलेवार, एक किकलोप और एक सेना के केंद्रीय भवन की तरफ से आ रहा था, ने घेराबंदी को तोड़ दिया. देशभक्त सैनिकों ने प्रदर्शनकारियों पर हमला करना शुरु कर दिया. सैन्य अभियोजन कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, गोलीबारी में 148 लोग मारे गए या घायल हुए. इंटरकॉन्टिनेंटल और डेल्स हॉल के बीच के क्षेत्रों में 48 लोग मारे गए, जिनमें से 8 कारों से टकरा गए थे, 39 को गोली मारी गई थी और एक आदमी को पीट-पीट कर मार दिया गया था.

"आज़ादी!"

दिसंबर 22

 

सुबह 7 बजे के आसपास, प्रदर्शनकारियों ने यूनिवर्सिटी स्क्वेयर पर दोबारा जमा होना शुरू कर दिया. जिन समूहों ने रात में लड़ाई लड़ी थी, वे प्रदर्शनकारियों के बड़े समूहों को जुटाने में सफल रहे. बुखारेस्ट के औद्योगिक प्लेटफ़ॉर्म पर, कर्मचारियों की कतारें लग गईं और वे सिटी सेंटर की ओर चल पड़े. 23 अगस्त की घटना से संबंधित प्रमुख समूह, मिलीट्री, ग्रिविटा, बरसेनी, पिपेरा, मेकानिका फ़िन और पेंटेलीमोन औद्योगिक क्षेत्रों के थे. प्रदर्शनकारियों के समूह, बुखारेस्ट के औद्योगिक स्थल की ओर बढ़ रहे थे और चिल्ला रहे थे: "तानाशाह गद्दी छोड़ो!", "जल्लाद गद्दी छोड़ो", "चाउसेस्कु गद्दी छोड़ो!", "हम मर जाएंगे और आज़ाद होंगे!", "हम जनता हैं!", "आज़ादी, न्याय!" , आदि.

चाउसेस्कु ने राजधानी छोड़ दी

बालकनी पर क्रांतिकारी

22 दिसंबर को अंतिम बार तानाशाह लोगों के सामने आया. उसने केंद्रीय समिति की बालकनी से भीड़ को संबोधित करने का प्रयास किया.

दोपहर 12:06 बजे, चाउसेस्कु अपने तीन वफ़ादारों और दो अंगरक्षकों के साथ, केंद्रीय समिति की बिल्डिंग से हेलीकॉप्टर में बैठकर उड़ गया. उनके जाने के बाद, प्रदर्शनकारी केंद्रीय समिति में घुस गए और पहली बार एक क्रांतिकारी झंडा लहराता हुआ बालकनी में दिखाई दिया, उस झंडे से समाजवादी गणराज्य रोमानिया के राज्य-चिह्न को हटा दिया गया था.

लोगों के साथ दोस्ती हो जाने के बाद, सेना के टैंकों को झंडों से सजा दिया गया, जिनसे समाजादी गणराज्य रोमानिया के राज्य-चिह्न को हटा दिया गया था
आभार: कहानी

Editor contributor — Lina Vdovîi
Editor contributor — Alina Conţeanu
Editor contributor — Monica Paula Coman
Editor contributor — George Gurescu
Editor arhive — Mihai Ciobanu
Operator film 16 mm — Carmen Draghici
Documentare foto — Irina Bartolomeu
Editor foto/video — Silviu Panaite
Coordonator de proiect — Dorian Stoica

क्रेडिट: सभी मीडिया
कुछ मामलों में ऐसा हो सकता है कि पेश की गई कहानी किसी स्वतंत्र तीसरे पक्ष ने बनाई हो और वह नीचे दिए गए उन संस्थानों की सोच से मेल न खाती हो, जिन्होंने यह सामग्री आप तक पहुंचाई है.
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