मोने: द थेम्स बिलो वेस्टमिंस्टर

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लंदन की 'द नैशनल गैलरी' में मौजूद पेंटिंग की बारीकियां

Touch & Hold

1870 में पतझड़ के समय फ़्रांस और प्रशिया (फ्रांस और जर्मनी क उत्तरी हिस्से के देशों) के बीच युद्ध चल रहा था, जिसकी वजह से पेरिस की घेराबंदी हुई थी. इसी समय मोने अपने छोटे-छोटे बच्चों और परिवार के साथ फ़्रांस छोड़कर चले गए. वह लंदन में बस गए, जहां उन्होंने वसंत का मौसम आने पर कोहरे से ढकी थेम्स नदी की यह पेंटिंग बनाई.

मोने ने लंदन में पेंटिंग बनाने के लिए नई इमारतें ढूंढीं. संसद भवन देखने में गॉथिक अंदाज़ में बना ज़रूर लगता है, लेकिन यह उन्हीं दिनों दोबारा बनाया गया था. दरअसल, 1834 में आग लगने की वजह से संसद भवन को काफ़ी नुकसान पहुंचा था.

पेंटिंग में दाईं ओर दिख रहा 'विक्टोरिया एम्बैंकमेंट' भी उसी वक्त नया बना था.

अगर आप पेंटिंग को ध्यान से देखेंगे, तो आपको घाट पर मज़दूर निर्माण का काम पूरा करते हुए दिखाई देंगे.

घाट की आधी-अधूरी परछाई दिखाने के लिए, मोने ने नदी की सतह का इस्तेमाल किया है. उन्होंने जिस तरह से टेढ़ा-मेढ़ा ब्रश चलाकर छोटी-छोटी लकीरें बनाई हैं, वह बहते हुए पानी जैसी लग रही हैं.

मोने को लंदन का कोहरा और धुंध बहुत पसंद थे. यहां उन्होंने धुंधला आसमान दिखाया है जिसकी परछाई पानी में दिखाई देती है. इसके अलावा इमारतों और नावों की परछाई भी नज़र आती हैं.

ज़ाहिर है, इस नज़ारे ने मोने का ध्यान अपनी तरफ़ खींचा. कई सालों बाद जब वह लंदन वापस आए, तो उन्होंने कई बार संसद भवन और वॉटरलू ब्रिज की पेंटिंग बनाई. इन पेंटिंग में संसद भवन और वॉटरलू ब्रिज, दिन के अलग-अलग समय में और अलग-अलग मौसम में कैसे लगते हैं, यह दिखाया गया है.

The Thames below Westminster by Claude MonetThe National Gallery, London

क्रेडिट: सभी मीडिया
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