The National Gallery, Londonपेश करते हैं

मोने: द वॉटर लिली पॉन्ड

लंदन की 'द नैशनल गैलरी' में मौजूद पेंटिंग की बारीकियां

Touch & Hold

मोने अपनी किसी पेंटिंग को नहीं, बल्कि एक खूबसूरत बगीचे को अपनी 'कला का बेहतरीन नमूना' मानते थे. यह बगीचा उत्तरी फ़्रांस के एक गांव, जिवर्नी के अपने घर में उन्होंने अपने हाथों से बनाया था. अपनी ज़िंदगी के आख़िरी सालों में, वह सिर्फ़ अपने बगीचे की ही पेंटिंग बनाते थे.

इस पेंटिंग में मौजूद पुल मोने ने खुद डिज़ाइन किया था. इस पुल को देखकर उनके काम में जापानी कला का असर नज़र आता है. यह पेंटिंग उन 18 पेंटिंग में से एक है, जिनमें मोने ने अलग-अलग तरह की रोशनी में एक ही दृश्य को दिखाया है. 1899 की गर्मियों में उन्होंने ये पेंटिंग बनानी शुरू की थीं. इसी साल उन्होंने वॉटरलू और चेरिंग क्रॉस पुल की पेंटिंग भी बनानी शुरू की थीं.

दिन डूबने से कुछ देर पहले सूरज की किरणें पुल पर गिरती हुई देखी जा सकती हैं. इन किरणों से पुल का दायां हिस्सा रोशन होकर हल्का हरा हो जाता है जो गहरे नीले-हरे रंग के बाकी हिस्से से बिल्कुल अलग नज़र आता है.

गहरे रंग के पुल और बेंत के लंबे-लंबे पौधों में कुछ इस तरह रंग भरे गए हैं कि नीचे पानी में खिल रहे कुमुद के फूलों पर पहली बार में ही नज़र ठहर जाती है.

मोने के कुमुद मिली-जुली नस्ल के थे जो गुलाबी, पीले और सफ़ेद रंगों में दिख रहे हैं.

कुमुद के अंदर के हिस्से लाल रंग के हैं जिस रंग से मोने ने इस पेंटिंग पर हस्ताक्षर किया था. वहीं, दूसरी तरफ़ लाल का विरोधी हरा रंग इस पेंटिंग में हर तरफ छाया हुआ है; इससे मोने की 'पूरक रंगों' में दिलचस्पी के बारे में पता चलता है.

ढेर सारे कुमुद के फूलों के बीच, आप तालाब के पानी में विलो के पेड़ों की परछाई भी देख सकते हैं.

The Water-Lily Pond by Claude MonetThe National Gallery, London

क्रेडिट: सभी मीडिया
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