मोने: द गा सेंट-लज़ार

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लंदन की 'द नैशनल गैलरी' में मौजूद पेंटिंग की बारीकियां

Touch & Hold

मोने, पेरिस के सेंट लज़ार स्टेशन की पेंटिंग बनाने के लिए इतने उत्साहित थे कि उन्होंने स्टेशन के पास ही एक फ़्लैट किराये पर ले लिया. मोने ने इस स्टेशन की पेंटिंग कई बार बनाई. यह पेंटिंग, उन चार सही-सलामत बची पेंटिंग में से एक है जिनमें इस स्टेशन के अंदर का नज़ारा दिखाया गया है.

इस पेंटिंग में स्टेशन के अंदर का नज़ारा दिखाया गया है, लेकिन इसे लैंडस्केप की तरह बनाया गया है. इसमें ट्रेन के इंजन से निकलता हुआ धुआं बिल्कुल आसमान में दिख रहे बादलों जैसा लग रहा है.

मोने ने भाप के उड़ते हुए बादल दिखाने के लिए गीले पेंट का बहुत सफ़ाई से इस्तेमाल किया है.

धुएं से ठीक नीचे नज़र आ रही भीड़ काफ़ी हद तक बादलों जैसी लग रही है. तेज़ी से ब्रश चलाकर पेंट करने की वजह से भीड़ के सभी लोग एक ही जैसे लग रहे हैं. पेंटिंग में किसी का चेहरा साफ़ दिखाई नहीं दे रहा है.

रेखाओं का इस्तेमाल इतनी बारीकी के साथ किया गया है कि एक धुंधले नज़ारे के बीच भी छत और मेहराब के आकार संरचनाओं को बखूबी दिखा रहे हैं.

इसमें छत का काला रंग सबसे ज़्यादा उभर कर दिखाई दे रहा है, लेकिन वैज्ञानिक विश्लेषण से यह बात सामने आई है कि इसके लिए गहरा नीला और गहरा बैंगनी रंग इस्तेमाल किया गया है.

ट्रेन की चिमनी से निकलते धुएं में जिस हल्के नीले रंग (सेरुलियन ब्लू) का इस्तेमाल किया गया है, वह उस समय नया आया था. यह हल्का नीला रंग प्राकृतिक चीज़ों से नहीं बल्कि रासायनिक तरीके से बनाया गया था. पाउडर वाले रंगों से अलग और मोने के दूसरे रंगों की तरह, यह रंग एक ट्यूब में उपलब्ध था. इसकी वजह से इन रंगों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में आसानी होती थी.

The Gare St-Lazare by Claude MonetThe National Gallery, London

क्रेडिट: सभी मीडिया
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