मोने: ला हाव्रा संग्रहालय

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लंदन की 'द नैशनल गैलरी' में मौजूद पेंटिंग की बारीकियां

Touch & Hold

मोने का बचपन ला हाव्रा शहर में बीता जो नॉर्मैंडी तट पर बसा हुआ है. जब वह यह पेंटिंग बना रहे थे, तब वह पेरिस के एक उपनगर अर्ज़ोंतेय में रहते थे. इस चहल-पहल भरे बंदरगाह जैसे नज़ारों की पेंटिंग बनाने के लिए, वह अक्सर अपने बचपन के शहर लौट आया करते थे.

इसी बंदरगाह में उन्होंने अपनी मशहूर पेंटिंग 'इम्प्रेशन: सनराइज़' (जो अब पेरिस के म्यूज़े मार्मोटन में है) तैयार की थी. 'इम्प्रेशनिज़्म' शब्द भी यहीं से आया है

बंदरगाह के अंदरूनी हिस्से से दिखने वाले इस नज़ारे में पानी के दूसरे किनारे पर 'म्यूज़े डी बूज़-आर्ट्स' दिखाई देता है. इस बेहतरीन इमारत को दूसरे विश्व युद्ध के दौरान नष्ट कर दिया गया था.

इम्प्रेशन के जानकार अक्सर विरोधी रंगों के ज़रिए नए प्रयोग किया करते थे (ये रंग कलर व्हील पर एक दूसरे के उलट होते हैं). यहां मोने ने नौकाओं को लाल और हरे रंग से रंगा है, जो एक-दूसरे से बिल्कुल अलग होते हैं और साथ इस्तेमाल करने पर उभर कर आते हैं.

समुद्र में तैरती नौकाओं की परछाई में भी आपको नारंगी और नीले जैसे विरोधी रंगों का इस्तेमाल दिखाई देगा.

मोने ने पानी में हो रही हलचल को दिखाने के लिए छोटे-छोटे ब्रशस्ट्रोक का सहारा लिया है जिन्हें दाईं से बाईं और बाईं से दाईं तरफ़ चलाया गया है.

मोने आस-पास के माहौल को काफ़ी तरजीह देते थे. यहां उन्होंने नॉर्मैंडी के अक्सर बदलते रहने वाले, बादलों भरे आसमान की झलक दिखाने के लिए स्कम्ब्लिंग (सूखे रंग पर आर-पार दिखनेवाला पेंट करने) की तकनीक को आज़माया है.

The Museum at Le Havre by Claude MonetThe National Gallery, London

क्रेडिट: सभी मीडिया
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