Editorial Feature

क्लॉड मोने की कला का एक अनदेखा आयाम

मोने और आर्किटेक्चर प्रदर्शनी की कहानी, क्युरेटोरिअल फ़ेलो रॉज़लिंड मैककीवर की ज़ुबानी

नैशनल गैलरी में चल रही 'मोने और आर्किटेक्चर' की Credit Suisse प्रदर्शनी के ज़रिए, लोग क्लॉड मोने जैसे महान कलाकार की पेंटिंग को एक नई नज़र से देख पाएंगे. यह लंदन में पिछले 20 सालों में आयोजित की जाने वाली ऐसी पहली प्रदर्शनी है, जिसमें सिर्फ़ क्लॉड मोने की पेंटिंग दिखाई जाएंगी.

मोने इम्प्रेशनिज़्म के संस्थापकों में से एक थे – यह शब्द उन्हीं की एक पेंटिंग 'इम्प्रेशन, सोले लेवां' के शीर्षक से लिया गया है. उन्होंने इम्प्रेशनिज़्म के दौर में हल्के हाथों से ब्रश चलाकर और गहरे, विरोधी रंगों का इस्तेमाल किया. साथ ही, वह खुली जगह से पेंटिंग बनाना पसंद करते थे. इस तरह की पेंटिंग को "en plein air" पेंटिंग कहा जाता है. पेंटिंग करने के उनके ये खास तरीके, आगे चलकर इस दौर की खास पहचान बने. मोने को खास तौर पर लैंडस्केप, कुदरती नज़ारों और फ़्रांस के जिवर्नी में स्थित अपने घर के तालाब में खिल रहे कुमुद के फूलों की पेंटिंग बनाने के लिए जाना जाता है. फूलों की ये पेंटिंग काफ़ी मशहूर हैं.

हालांकि, मोने की कला सिर्फ़ इन्हीं तक ही सीमित नहीं थी. अपनी कला के एक अनोखे आयाम के रूप में, उन्होंने गांवों और छोटे-बड़े शहरों के आर्किटेक्चर को अपने कैनवस पर उतारा. नैशनल गैलरी की यह प्रदर्शनी, लोगों को मोने की आर्किटेक्चर से जुड़ी ये पेंटिंग दिखाने के लिए ही लगाई गई है. इस प्रदर्शनी में उनकी 75 से ज़्यादा पेंटिंग दिखाई जाएंगी.

'मोने और आर्किटेक्चर' प्रदर्शनी के लिए पिछले तीन सालों से तैयारी की जा रही है. इस प्रदर्शनी में मोने की वे पेंटिंग दिखाई जाएंगी जो उन्होंने 1860 के दशक से लेकर 1900 के दशक की शुरुआत में बनाई थी. इस प्रदर्शनी में हम नोर्मंडी से लेकर वेनिस तक, यूरोप के अलग-अलग शहरों की इमारतें देख पाएंगे. पेंटिंग करते समय मोने को इस बात से फ़र्क नहीं पड़ता था कि वह छोटे-छोटे घरों की पेंटिंग बना रहे थे या बड़ी-बड़ी इमारतों की. इमारतें चाहे कैसी भी हों, उनकी पेंटिंग बनाते समय मोने उनकी बनावट और रंगों को ध्यान से देखने की बाद ही उन्हें अपने कैनवस पर उतारते थे.

इस प्रदर्शनी के बारे में ज़्यादा जानने के लिए, हमने रॉज़लिंड मैककीवर से बात की. रॉज़लिंड, नैशनल गैलरी में हैरी एम. वाइनरीब क्युरेटोरिअल फ़ेलो हैं. वह हमें बताती हैं कि इस प्रदर्शनी में दिखाई जाने वाली पेंटिंग में हम मोने की कला के कौनसे आयाम देख पाएंगे और उनके बारे में क्या जान पाएंगे.

क्लॉड मोने की बनाई गई ‘द वाटर लिली पोंड’ पेंटिंग (द नैशनल गैलरी, लंदन के संग्रह से)

'मोने और आर्किटेक्चर' की Credit Suisse प्रदर्शनी किस बारे में हैं?

यह मोने की बनाई गई पेंटिंग की एक ऐसी प्रदर्शनी है जिसमें हम इस मशहूर कलाकार के कामों को देखने का एक नया नज़रिया दे रहे हैं. आम तौर पर हम मोने को कुदरत, खूबसूरत नज़ारों और पानी में खिलने वाले कुमुद के फूलों की पेंटिंग बनाने के लिए जानते हैं. हालांकि, इस प्रदर्शनी में हम देखेंगे कि उन्होंने अपनी पेंटिंग में इमारतों, पुलों और इस तरह की बाकी चीज़ों का किस तरह इस्तेमाल कैसे किया.

नैशनल गैलरी ने यह प्रदर्शनी अब क्यों आयोजित की है?

हम हमेशा कला के इतिहास को देखने के नए तरीके ढूंढते रहते हैं. ‘मोने और आर्किटेक्चर’ प्रदर्शनी का सुझाव हमें एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर रिचर्ड थॉमसन ने दिया था. इसे आयोजित करने के लिए हमें काफ़ी शोध करना पड़ा लेकिन मोने जैसे कलाकार के काम करने के तरीके को एक नई नज़र से देखने का यह एक बेहतरीन मौका था. इसके अलावा, लंदन में पिछले 20 सालों में सिर्फ़ मोने की पेंटिंग दिखाने के लिए कोई प्रदर्शनी आयोजित नहीं की गई है.

किसी आईडिया के प्रदर्शनी बनने तक के सफर में क्या-क्या शामिल होता है?

कला और उससे जुड़ा आईडिया तो बस इस सफर के शुरुआती पहलू हैं. इसके बाद, हमें प्रदर्शनी आयोजित करने से जुड़े कई ज़रूरी फ़ैसले लेने होते हैं. सबसे पहले, हम प्रदर्शनी में शामिल करने के लिए कलाकृतियां चुनते हैं, उनके मालिकों से संपर्क करते हैं और प्रदर्शनी के लिए कलाकृतियां इकठ्ठा करते हैं. इसके बाद, हम प्रदर्शनी की थीम के साथ-साथ दर्शकों को वे पेंटिंग दिखाने और उनके बारे में बताने का तरीका चुनते हैं.

इस प्रदर्शनी में कौन-कौनसे शहरों की पेंटिंग दिखाई जाएंगी?

मोने ने यूरोप के काफ़ी शहरों में पेंटिंग बनाई थी. उन्होंने पेंटिंग बनाना फ़्रांस के नोर्मंडी शहर में शुरू किया, जहां उनका बचपन गुज़रा था. इसके अलावा, उन्होंने पेरिस में भी कई पेंटिंग बनाईं. वह घूमने के काफ़ी शौक़ीन थे, इसलिए उन्होंने हॉलैंड के ज़ांदाम और एम्स्टर्डम शहरों में भी पेंटिंग बनाई, जहां वह 1870 के दशक में गए थे. साथ ही, उनके कामों में दक्षिणी फ़्रांस में आंटीब और इटैलियन रिविएरा की झलक भी दिखाई देती है. मोने वहां भूमध्यसागर की रोशनी को अपने कैनवस में कैद करने आए थे. वहां का आर्किटेक्चर काफ़ी अलग किस्म का है. इसके अलावा, इस प्रदर्शनी में हम दर्शकों को रुआं, लंदन और वेनिस, उन तीन महान शहरों की पेंटिंग भी दिखाएंगे जिन्हें मोने ने अपने करियर के आखिरी सालों में बनाया था.

आपने यह कैसे तय किया कि इस प्रदर्शनी में कौनसी पेंटिंग दिखाई जाएंगी?

हमने वे पेंटिंग चुनी जिनमें हम देख सकते हैं कि मोने आर्किटेक्चर की पेंटिंग बनाते हुए किन बातों की तरफ़ ध्यान देते थे. ऐसा करने के लिए हमने एक ही इमारत की वे सभी पेंटिंग ढूंढी जो उन्होंने अलग-अलग दिनों या दिन के अलग-अलग समय के हिसाब से बनाई थी. उदाहरण के लिए, अपने करियर के आखिरी सालों में वह सीरीज़ में पेंटिंग बनाते थे. इस समय की पेंटिंग चुनते समय हमने इस बात पर ध्यान दिया कि हम सिर्फ़ वे पेंटिंग चुनें जिनमें अलग-अलग रोशनी और मौसम के अलग-अलग रंग नज़र आते हैं.

क्लॉड मोने की बनाई गई 'द गार सेंट-लज़ार' पेंटिंग (द नैशनल गैलरी, लंदन के संग्रह से)

इन पेंटिंग के ज़रिए हमें मोने के बारे में ऐसी कौनसी नई जानकारी मिलेगी जो इससे पहले किसी प्रदर्शनी में नहीं देखी गई होगी?

सबसे पहली चीज़ जो मैंने इन पेंटिंग को ध्यान से देखने पर पाई, वो यह थी कि मोने रंगों से खेलने में तो माहिर थे ही, लेकिन वह इमारतों के ढाँचे कैनवस पर उतारने की कला भी अच्छे से जानते थे. आम तौर पर जब भी मोने के बारे में बात होती है तो हम उनके रंगों, पानी में खिलने वाले कुमुद के फूलों और कुदरती नज़ारों को याद करते हैं. हालांकि, इन पेंटिंग में उन्होंने पुलों जैसे पेचीदा ढांचों को भी बड़ी ही महारत से बनाया है. ऐसा करते समय उन्होंने इन ढांचों के कोणों और सीधी लकीरों को बड़ी ही सफ़ाई से अपने कैनवस पर उतारा है. यही नहीं, ये पेंटिंग देख कर आप यह भी बता सकते हैं कि उन्होंने ऐसा करने में ज़्यादा समय नहीं लिया होगा.

इस प्रदर्शनी को किस तरह से डिज़ाइन किया गया है? इसे तैयार करने में आपने कौनसी चीज़ों का ध्यान रखा है?

हमने इस प्रदर्शनी का डिज़ाइन सादा ही रखा है, ताकि लोग अपना सारा ध्यान मोने और उनके शानदार काम की तरफ़ लगाएं. प्रदर्शनी में लगभग सभी पेंटिंग उसी क्रम में दिखाई जाएंगी जिस क्रम में उन्हें बनाया गया था. इसे तीन हिस्सों में बाँटा गया है. पहले हिस्से में 'गांव और खूबसूरत नज़ाराें वाली शैली' दिखाई जाएगी, जिसमें नाेर्मंडी के गांवों और चट्टानों के साथ-साथ आंटीब के नज़ारे दिखाए जाएंगे. उसके बाद 'शहर और उसकी आधुनिकता' मेंपेरिस की गलियां, रेलवे स्टेशन और ला हावरा बंदरगाह की पेंटिंग दिखाई जाएंगी, ताकि दर्शक उस दौर की आधुनिकता का अंदाज़ा लगा सकें. शो के अंतिम हिस्से, 'इमारतें और उनके रहस्य' में रुआं, लंदन और वेनिस की पेंटिंग दिखाई जाएंगी. इससे दर्शक देख सकेंगे कि कैसे मोने इन शहरों की अलग-अलग इमारतों पर पड़ने वाली रोशनी को अपने कैनवस पर कैद करते थे.

इस प्रदर्शनी की तैयारी में आपको किन मुश्किलों का सामना करना पड़ा?

मोने की पेंटिंग इकठ्ठा करना हमारी सबसे बड़ी चुनौती रहा. ये पेंटिंग इतनी खूबसूरत हैं कि इनके मालिक ज़्यादा देर तक इनसे दूर नहीं रहना चाहते. हम जानते हैं कि इन पेंटिंग को हमें देना, चाहे कुछ समय के लिए ही, उनके लिए आसान नहीं रहा होगा लेकिन हमारी किस्मत शायद अच्छी थी कि संग्रहालय और कला के शौक़ीन लोगों ने हमें ये पेंटिंग अपनी प्रदर्शनी में दिखाने की मंज़ूरी दी. इससे हमारे दर्शक मोने के बेहतरीन कामों को अच्छे से देख और समझ पाएंगे, क्योंकि हम उन्हें इन पेंटिंग को देखने का एक नया नज़रिया दे रहे हैं.

आपके हिसाब से, क्या वजह रही होगी कि मोने की आर्किटेक्चर से जुड़ी पेंटिंग को आज तक सभी प्रदर्शनियों नज़रअंदाज़ किया जाता रहा?

मैं यह नहीं कह सकती कि आज से पहले उन्हें नज़रअंदाज़ किया गया था – रुआं कथीड्रल और लंदन में स्थित ब्रिटिश संसद की पेंटिंग पूरी दुनिया में मशहूर हैं. हालांकि, यह ज़रूर कहा जा सकता है कि उनकी आर्किटेक्चर से जुड़ी सभी पेंटिंग को एक जगह इकठ्ठा करके उनकी प्रदर्शनी कभी नहीं लगाई गई है. मोने खूबसूरत नज़ारों और पानी में खिलने वाले कुमुद के फूलों की पेंटिंग के लिए जाने जाते हैं. अगर आपको इन्हीं मशहूर पेंटिंग में उनके आर्किटेक्चर से जुड़ी बारीकियों पर या पेंटिंग में मौजूद इमारतों और दूसरे ढांचों पर ध्यान देने के लिए कहा जाए, तो आप हैरान रह जाएंगे. आप न सिर्फ़ इमारतों के ढांचे और उन्हें बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले रंग देखेंगे, बल्कि यह भी महसूस करेंगे कि मोने की हर पेंटिंग किसी जगह से जुड़ी आपकी कुछ यादें ताज़ा कर सकती है. पेंटिंग की ये बारीकियां दिखाती हैं कि मोने की बनाई हर खूबसूरत पेंटिंग में कुदरत के साथ-साथ इंसान का भी योगदान है. यह प्रदर्शनी, ये सारी बातें महसूस करने का एक अनोखा मौका है.

क्लॉड मोने की बनाई गई ‘द थेम्स बिलो वेस्टमिंस्टर’ पेंटिंग (द नैशनल गैलरी, लंदन के संग्रह से)

मोने एक इम्प्रेशनिस्ट पेंटर थे, उनकी यह शैली उनकी पेंटिंग में किस तरह दिखाई देती है?

एक इम्प्रेशनिस्ट पेंटर के रूप में, वह अक्सर खुली हवा में पेंटिंग किया करते थे. यही वजह है कि कई बार उनकी बनाई किसी खूबसूरत नज़ारे की पेंटिंग में भी इमारतें नज़र आती हैं. वह अपनी पेंटिंग में इन इमारतों के रंगों का भी इस्तेमाल करते थे. हर इम्प्रेशनिस्ट पेंटर की कोशिश रहती थी कि रंगों को कैनवस पर वैसे ही उतारा जाए जैसे कि वे दिखाई देते हैं. कभी-कभी किसी इमारत के ज़रिए मोने को अपनी पेंटिंग में एक विरोधी रंग भी मिल जाता था. उदाहरण के लिए, किसी हरियाली से भरपूर लैंडस्केप की पेंटिंग बनाने में अगर किसी इमारत की लाल रंग की छत शामिल कर ली जाए तो, उस पेंटिंग के रंगों को देखने का एक अलग ही मज़ा होगा.

इस प्रदर्शनी में कला और आर्किटेक्चर के आपसी रिश्ते को किस तरह दिखाया जाएगा?

मोने ने अलग-अलग तरह के आर्किटेक्चर की पेंटिंग बनाई थी. इनमें किसी चट्टान के कोने पर बने छोटे-छोटे घरों के साथ-साथ रुआं कथीड्रल और लंदन में स्थित ब्रिटिश संसद जैसी बड़ी-बड़ी इमारतें शामिल हैं. इन पेंटिंग में मुझे जो बात सबसे ज़्यादा आकर्षित करती है वो यह है कि मोने ने इन इमारतों का अपने हिसाब से इस्तेमाल किया है. इन पेंटिंग को देखकर महसूस होता है कि मोने इन इमारतों को सिर्फ़ आर्किटेक्चर नहीं समझते थे, बल्कि अपनी कला को निखारने के लिए इनका इस्तेमाल करते थे.

इस प्रदर्शनी में आपकी मनपसंद पेंटिंग कौनसी है?

'द वुडन ब्रिज, अर्जोंतेय' नाम की एक पेंटिंग है, जो इतनी खूबसूरत है कि जैसे ही उसे संग्रहालय की दीवार पर टांगा गया, मैं बस उसे देखती ही रह गई. इस पेंटिंग में एक पुल और पानी में पड़ने वाली उसकी परछाई को दिखाया गया है. पेंटिंग के ऊपरी हिस्से में सभी लकीरें सीधी हैं. जैसे ही आपका ध्यान परछाई वाले हिस्से की तरफ़ जाता है, आप देखते हैं कि कैसे वही सीधी लकीरें पानी में आड़ी-तिरछी दिखाई देती हैं. यह देखने लायक है.

आपके हिसाब से प्रदर्शनी के बाद दर्शक मोने को एक अलग नज़र से देख पाएंगे?

मुझे लगता है कि दर्शक यह समझ पाएंगे कि मोने एक ऐसे कलाकार थे जिनकी कला किसी एक तरीके या सिर्फ़ पानी में खिलने वाले फूल बनाने तक ही सीमित नहीं थी. साथ ही, मैं उम्मीद करती हूँ कि इस शो के बाद लोग हमारे संग्रह और बाकि सभी संग्रहों में रखी मोने की पेंटिंग को एक नई नज़र से देखें और इस बार, उनका ध्यान पेंटिंग में शामिल इमारतों पर हो.

क्लॉड मोने की बनाई गई ‘स्नो सीन एट अर्जोंतेय’ पेंटिंग (द नैशनल गैलरी, लंदन के संग्रह से)
क्लॉड मोने की बनाई गई ‘द म्यूज़ियम एट ला हावरा’ पेंटिंग (द नैशनल गैलरी, लंदन के संग्रह से)
क्रेडिट: सभी मीडिया
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