संस्कृत के प्राचीन दर्शन के अनुसार, कला केवल देखने की वस्तु नहीं है; इसका ‘रसास्वादन’ किया जाता है जो मानवीय अनुभवों का भावनात्मक सार है।
‘संस्कृत लेंस’, गूगल आर्ट्स एंड कल्चर लैब कलाकार हर्षित अग्रवाल और गूगल आर्ट्स एंड कल्चर लैब का एक साझा प्रयास है। यह नाट्यशास्त्र के 2,000 साल पुराने सिद्धांतों को Google AI/ML की आधुनिक तकनीक से जोड़ता है।
MediaPipe Pose और Imagen जैसी तकनीकें आपकी भावनाओं को एक नया आकार देती हैं। यह टूल आपको आमंत्रित करता है कि आप अपनी देह-मुद्राओं से भावनाओं को साकार करें और एबस्ट्रैक्ट डिजिटल आर्ट का हिस्सा बनें।
अग्रवाल के शब्दों में: अगर आज की टेक्नोलॉजी प्राचीन काल में होती, तो भरत मुनि ‘रस’ की शिक्षा कैसे देते? ‘संस्कृत लेंस’ के माध्यम से संस्कृत भाषा से परे भी संस्कृत को जानें उसकी कला और विचारों से, भारतीय विरासत और उभरती टेक्नोलॉजी का एक शानदार मेल।
इस प्रोजेक्ट को हर्षित अग्रवाल ने तैयार किया है, जिसमें गूगल आर्ट्स एंड कल्चर लैब के रेज़िडेंट कलाकार मेलानी फॉन्टेन और साइमन डूरी का विशेष योगदान रहा है।