15वीं सालगिरह का जश्न!

कांचीपुरम: मंदिरों और सिल्क का शहर

कांचीपुरम शहर, उसके मंदिरों और सिल्क की बुनाई पर मंदिरों के असर को जानें

Dastkari Haat Samiti

दस्तकारी हाट समिति

Kanjivaram Weaving: Varadaraja Perumal Temple (2017-08)Dastkari Haat Samiti

मंदिरों और सिल्क का शहर

ज़िला मुख्यालय और भारत के एक चहल-पहल वाले आधुनिक शहर, कांचीपुरम का इतिहास तीसरी सदी पुराना है. तीसरी से लेकर 17वीं ईसवी के बीच कांचीपुरम, पल्लव, चोल, और विजयनगर साम्राज्य के लिए सत्ता का केंद्र रहा. उनके शासन काल में यह शहर कारोबार और पढ़ाई-लिखाई के केंद्र के रूप में फला- फूला. हर एक राजवंश, मंदिरों के रूप में अपनी शानदार वास्तुकला की विरासत देता गया जिसकी वजह से कांचीपुरम एक अहम तीर्थ स्थल बन गया.

आज भी, कांचीपुरम को हज़ारों मंदिरों के शहर के तौर पर जाना जाता है. यह हिन्दू धर्म के सात सबसे अहम तीर्थ केंद्रों में से एक है. यह शहर देवांग और पट्टू सालियर समुदाय के 45,000 माहिर बुनकरों का घर है. ये समुदाय, बुनाई की कला में महारत रखने के लिए जाने जाते थे. 15वीं सदी में दोनों समुदायों के लोग बड़े पैमाने में आंध्र प्रदेश से कांचीपुरम आकर बस गए. इन समुदायों ने कांचीपुरम को कारोबार के खास केंद्र के तौर पर उभरने में मदद की.

Kanjivaram Weaving: Varadaraja Perumal Temple (2017-08)Dastkari Haat Samiti

कांचीपुरम के मंदिर, श्रद्धा और भक्ति का जीता-जागता उदाहरण हैं. यहां पूरे साल तीर्थ के लिए आने वाले हजारों लोगों का तांता लगा रहता है.

Kanjivaram Weaving: Varadaraja Perumal Temple (2017-08)Dastkari Haat Samiti

दीवार पर बनी इस तस्वीर में देवी-देवताओं और भक्तों को दिखाया गया है.

पुराने ज़माने में अपनी बेमिसाल संस्कृति के लिए मशहूर रहा कांचीपुरम, आज भी कला और शिल्प के बेजोड़ नमूनों से मिसाल पेश करता है जो कि ज़्यादातर धर्म से जुड़े होते हैं.

Kanjivaram Weaving: Kanjivaram Sari (Contemporary)Dastkari Haat Samiti

कांचीपुरम शहर, आज भी हाथ की कारीगरी (जिसमें हाथ से कपड़ा बुना जाता है) से जुड़े उद्योग के लिए मशहूर है. भारतीय संस्कृति के रीति-रिवाज़ों और धार्मिक मान्यताओं में सिल्क के कपड़े की महत्वपूर्ण जगह है. इस बात से इस जगह पर बने कपड़ों की अहमियत का पता चलता है.

Kanjivaram Weaving: Pilgrims visiting the Kamakshi Amman Temple (2017-08)Dastkari Haat Samiti

कांचीपुरम का मशहूर सिल्क, भक्तों के लिए पहले भी अहम था और आगे भी रहेगा.

Kanjivaram Weaving: Varadaraja Perumal Temple (2017-08)Dastkari Haat Samiti

कई मंदिरों के पुजारी कांचीपुरम सिल्क का इस्तेमाल देवी-देवताओं को सजाने के लिए करते हैं.

Kanjivaram Sari (2017-08)Dastkari Haat Samiti

आपस में एक-दूसरे के करीब होने की वजह से, मंदिर के वास्तुकला और डिज़ाइन कांचीपुरम के बुनकरों को हमेशा से प्रेरणा देते रहे हैं.

पारंपरिक बारीक डिज़ाइन, जैसे कि मंदिर का गोपुरम (मंदिर में आने-जाने का मुख्य दरवाज़ा) और मोर, सुनहरे सिल्क के धागे यानी ज़री से बुने जाते हैं.

Kanjivaram Weaving (2017-08)Dastkari Haat Samiti

कांजीवरम साड़ी की डिज़ाइन, दक्षिण भारत के मंदिरों के डिज़ाइन या पक्षी, पत्ते और बाकी प्राकृतिक चीज़ों से प्रेरित हुआ करती थीं.

Kanjivaram Weaving: Ekambareswarar Temple (2017-08)Dastkari Haat Samiti

कांचीपुरम साड़ी के बॉर्डर (किनारे या किनारी) के सबसे मशहूर पैटर्न में से एक ‘रुद्राक्षम’ है. इसमें साड़ी की किनारी पर पवित्र रुद्राक्ष के मनके का डिज़ाइन बनाया जाता है.

Kanjivaram Weaving: Ekambareswarar Temple (2017-08)Dastkari Haat Samiti

साड़ी के पैटर्न के लिए मंदिर के ‘गोपुरम’, ‘मयिलकन’ या मोर की आंख और ‘कुयिलकन’ या बुलबुल की आंख से प्रेरणा ली जाती है.

Kanjivaram Weaving: Ekambareswarar Temple (2017-08)Dastkari Haat Samiti

कभी-कभी कांजीवरम साड़ी के ताने-बाने में, कांचीपुरम के मंदिर की दीवारों और खंभों के पैटर्न उकेरे जाते हैं.

Kanjivaram Weaving: Ekambareswarar Temple (2017-08)Dastkari Haat Samiti

साड़ी के ताने-बाने में बुनी जाने वाली कई पारंपरिक आकृतियों को देखकर ही पता चल जाता है कि वे सीधे तौर पर मंदिर के कई तरह के डिज़ाइन से प्रेरित हैं.

Kanjivaram Weaving: Kanjivaram Sari (Contemporary)Dastkari Haat Samiti

कांजीवरम साड़ी की बुनाई के बारे में यहां ज़्यादा पढ़ें:

- कांजीवरम साड़ियां
- कांजीवरम की बुनाई में इस्तेमाल होने वाली बुनियादी संरचना और तकनीक
- कांजीवरम साड़ियों का बाज़ार

आभार: कहानी

क्रेडिट: कहानी
टेक्स्ट: आलोका हिरेमथ और जया जेटली
फ़ोटोग्राफ़ी: चिरोदीप चौधरी
कारीगर: केसवन, कृष्णमूर्ति, वेलु, लक्ष्मी डाई हाउस, और समुदाय के कारीगर
ग्राउंड फ़ैसिलिटेटर: शालिनी शशि
क्यूरेटर: रुचिरा वर्मा

क्रेडिट: सभी मीडिया
कुछ मामलों में ऐसा हो सकता है कि पेश की गई कहानी किसी स्वतंत्र तीसरे पक्ष ने बनाई हो और वह नीचे दिए गए उन संस्थानों की सोच से मेल न खाती हो, जिन्होंने यह सामग्री आप तक पहुंचाई है.
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