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COVAXIN: भारत का पहला स्वदेशी COVID-19 वैक्सीन

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ब्रिएल कूपर-वीस्ज़ो द्वारा चित्रण

Gabrielle Cooper-Weisz का Covaxin: India's First Indigenous COVID-19 Vaccine

साल 2020 की शुरुआत में कोरोना वायरस महामारी ने दुनिया भर में डर और तनाव का माहौल पैदा कर दिया था. ऐसे में, भारत के वैज्ञानिकों ने उस दिशा में सोचना शुरू किया जहां से इस संक्रमण को धीमा करने में मदद मिल सकती थी- यह थी टीका तैयार करना.

साल 2020 की शुरुआत में कोरोना वायरस महामारी ने दुनिया भर में डर और तनाव का माहौल पैदा कर दिया था. ऐसे में, भारत के वैज्ञानिकों ने उस दिशा में सोचना शुरू किया जहां से इस संक्रमण को धीमा करने में मदद मिल सकती थी- यह थी टीका तैयार करना.

Gabrielle Cooper-Weisz का Covaxin: India's First Indigenous COVID-19 Vaccine

हालांंकि, भारत के लिए कहीं और बने टीके पर निर्भर रहना मुश्किल था. हर तिमाही में 30 करोड़ लोगों को, आयात किए गए टीके लगाने में कितनी परेशानी होती, इसका अंदाज़ा लगाना ज़्यादा कठिन नहीं है.

कुछ ऐसी मुश्किलें भी थीं, जिनका सामना सिर्फ़ भारत में ही करना पड़ता. ग्रामीण इलाकों में गर्मी के साथ, बार-बार बिजली जाने की समस्या भी होती है. ऐसे में किसी भी टीके को शून्य से नीचे के तापमान पर नहीं रखा जा सकता था. इसे सामान्य रेफ़्रिजरेटेड परिस्थितियों में ही रखना पड़ता.

Gabrielle Cooper-Weisz का Covaxin: India's First Indigenous COVID-19 Vaccine

इस मुसीबत के बीच, भारतीय बायोटेक्नोलॉजी कंपनी, Bharat Biotech आगे आई. इसे 1996 में डॉ॰ कृष्णा एम॰ ऐला और श्रीमती सुचित्रा ऐला ने हैदराबाद में शुरू किया था. कंपनी का मिशन, इनोवेटिव वैक्सीन और बायो-थैराप्यूटिक्स बनाना है.

कोरोना वायरस महामारी से पहले ही, Bharat Biotech के नाम 160 वैज्ञानिक पेटेंट थे. यह चिकनगुनिया और ज़ीका जैसी बीमारियों का टीका बनाने वाली पहली कंपनियों में से एक है.

Gabrielle Cooper-Weisz का Covaxin: India's First Indigenous COVID-19 Vaccine

जुलाई 2020 तक, Bharat Biotech के COVID-19 टीके को, इंसानों पर पहले और दूसरे चरण के क्लिनिकल ट्रायल के लिए, डीसीजीआई (ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ़ इंडिया) की अनुमति मिल गई थी. ऐसा तब किया गया था, जब टीके ने गैर-इंसानी प्राइमेट और हैमस्टर (चूहे जैसा जानवर) में मज़बूत रोगप्रतिरोधी क्षमता पैदा करके दिखा दी थी.

टीके को Bharat Biotech की बेहद नियंत्रित लैब में विकसित किया गया था. इसे COVAXIN नाम दिया गया. इसे ‘होल-वायरीऑन इनएक्टिवेटेड वेरो सेल-डिराइव्ड प्लैटफ़ॉर्म’ तकनीक का इस्तेमाल करके तैयार किया गया था.

Gabrielle Cooper-Weisz का Covaxin: India's First Indigenous COVID-19 Vaccine

आसान शब्दों में कहें, तो COVAXIN में मरा हुआ कोरोना वायरस होता है, जो लोगों को संक्रमित तो नहीं कर सकता, लेकिन शरीर के रोगप्रतिरोधी तंत्र को यह निर्देश दे सकता है कि वह संक्रमण के ख़िलाफ़ सुरक्षात्मक प्रतिक्रिया देना शुरू कर दे.

जिन मामलों में COVID-19 की पुष्टि की गई थी उनके मूल्यांकन में पाया गया कि लक्षण वाले मामलों में COVAXIN टीका 77.8% असरदार रहा. वहीं, बिना लक्षण वाले मामलों के ख़िलाफ़ इसका असर 63.6% रहा. भारत की खास ज़रूरतों के मुताबिक, COVAXIN को दो से आठ डिग्री सेल्सियस में रखा जा सकता है, जो कि सामान्य रेफ़्रिजरेशन से भी संभव है. साथ ही, COVAXIN उन विकल्पों से सस्ता है जिन्हें भारत को आयात करना पड़ता. उदाहरण के लिए, जहां COVAXIN की कीमत 295 रुपये है, वहीं Moderna के टीके की कीमत लगभग 2,700 रुपये है.

Gabrielle Cooper-Weisz का Covaxin: India's First Indigenous COVID-19 Vaccine

COVAXIN का फ़ायदा भारत से बाहर, दूसरे देशों को भी मिला है. मॉरीशस, पराग्वे, और अर्जेंटीना ने भी अपने नागरिकों के लिए COVAXIN टीका मंगवाया. यह भारतीय चिकित्सा विज्ञान की जीत है. Bharat Biotech के टीके ने न सिर्फ़ भारत में, बल्कि पूरी दुनिया में लाखों जानें बचाई हैं.

आभार: कहानी

ब्रिएल कूपर-वीस्ज़ो द्वारा चित्रण

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