15वीं सालगिरह का जश्न!

दीपावली से जुड़ी प्रचलित कथाएं

दीपावली पांच दिनों तक मनाया जाने वाला त्योहार है. इस त्योहार से जुड़ी अलग-अलग कथाएं और स्थानीय परंपराएं प्रचलित हैं. आइए, इनमें से कुछ के बारे में जानें!

Google Arts & Culture से

तस्वीरें: अभिषेक मुखर्जी

Avishek Mukherjee की Diwali Celebrations (2020)

रोशनी का त्योहार 

दीपावली, हिंदुओं के सबसे लोकप्रिय त्योहारों में से एक है. इसे, हिन्दी कैलेंडर के हिसाब से कार्तिक महीने में मनाया जाता है, जो 15 अक्टूबर से 15 नवंबर के बीच पड़ता है। दीपावली संस्कृत भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ है दीपों की पंक्तियां। दीपावली, बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। हिंदू धर्म के लोग, इस दिन धन और समृद्धि की देवी, लक्ष्मी की पूजा करते हैं। दीपावली का त्योहार, सिख और जैन धर्म के लोग भी बहुत उत्साह के साथ मनाते हैं।  हिंदू धर्म में दीपावली से जुड़ी बहुत सी कथाएं प्रचलित हैं! आइए, इनमें से कुछ के बारे में जानें।

दीपावली, हिंदुओं के सबसे लोकप्रिय त्योहारों में से एक है. इसे, हिन्दी कैलेंडर के हिसाब से कार्तिक महीने में मनाया जाता है, जो 15 अक्टूबर से 15 नवंबर के बीच पड़ता है। दीपावली संस्कृत भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ है दीपों की पंक्तियां। दीपावली, बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। हिंदू धर्म के लोग, इस दिन धन और समृद्धि की देवी, लक्ष्मी की पूजा करते हैं। दीपावली का त्योहार, सिख और जैन धर्म के लोग भी बहुत उत्साह के साथ मनाते हैं।  हिंदू धर्म में दीपावली से जुड़ी बहुत सी कथाएं प्रचलित हैं! आइए, इनमें से कुछ के बारे में जानें।

Avishek Mukherjee की Lord Rama Returns to Ayodhya (2020)

रामायण में दीपावली का उल्लेख

दीपावली से जुड़ी सबसे लोकप्रिय कथा, हिंदू महाकाव्य रामायण में है। रामायण के हिसाब से, दीपावली के दिन भगवान राम, सीता, और लक्ष्मण 14 साल का वनवास पूरा करने के बाद, अयोध्या लौटे थे। 

Avishek Mukherjee की Vanvas - Rama, Sita and Laxmana Leaving for Exile (2020)

भगवान राम को उनके पिता, राजा दशरथ ने वनवास पर जाने का आदेश दिया था।  वनवास के दौरान, भगवान राम, उनकी पत्नी सीता, और भाई लक्ष्मण ने तमाम कठिनाइयों का सामना किया।

Avishek Mukherjee की Sita Haran - The Abduction of Sita (2020)

वनवास के दौरान, राक्षसों के शक्तिशाली राजा, रावण ने सीता का अपहरण कर लिया था। दिव्य पक्षी जटायु ने बहुत बहादुरी से रावण का सामना किया। हालांकि, रावण ने बेरहमी से उसके पंख काट दिए। रावण, सीता को अपने साम्राज्य लंका में ले गया, जो समुद्र के दूसरी तरफ़ बसा था।

Avishek Mukherjee की Ram Setu - Lord Ram Crosses the Sea (2020)

भगवान राम ने अपने भरोसेमंद सेनापति हनुमान और वानरों के राजा सुग्रीव की मदद से, लंका जाने के लिए समुद्र पर पत्थरों का एक पुल बनाया। पत्थरों को पानी पर तैरते रहने का वरदान दिया गया था।

Avishek Mukherjee की Ravana Wadh - The Slaying of Ravana (2020)

अच्छाई और बुराई की लड़ाई में, भगवान राम ने रावण का वध करके, सीता को छुड़ा लिया।

Avishek Mukherjee की Lord Rama Returns to Ayodhya (2020)

इस जीत के बाद, वे अयोध्या लौटे। उनके स्वागत में, अयोध्या के लोगों ने अपने घरों में साफ़-सफ़ाई की और रोशनी के लिए, उनके रास्ते में दीप जलाए। तब से लेकर आज तक, दीप जलाने की परंपरा, दीपावली के उत्सव का अहम हिस्सा है।

Avishek Mukherjee की The Pandava Brothers Return to Their Kingdom (2020)

महाभारत में दीपावली

दीपावली से जुड़ी अन्य कथाओं में से, वनवास की एक और कहानी भी काफ़ी प्रचलित है। पांडवों से जुड़ी इस कहानी का उल्लेख हिंदू महाकाव्य महाभारत में मिलता है। कपट भरे चौसर के खेल में, पांडव अपनी सारी संपत्ति धूर्त कौरवों से हार जाते हैं।

कई सालों तक अनगिनत कठिनाइयों का सामना करने के बाद, पांडव अपनी पत्नी द्रौपदी के साथ, कार्तिक महीने की अमावस्या को अपने राज्य वापस आए थे। प्रजा उनकी वापसी पर बहुत खुश हुई और उनके स्वागत के लिए ढेरों दीप जलाएं।

Avishek Mukherjee की The Spiritual Awakening of the Lord Mahavira (2020)

जैन धर्म में दीपावली

दीपावली, जैन धर्म के लोगों के लिए एक अहम त्योहार है। इसे, 24वें जैन तीर्थंकर भगवान महावीर के निर्वाण या आध्यात्मिक जागृति के रूप में मनाया जाता है। जैन धर्मग्रंथों में दीपावली को दीपलिकया कहा गया है, जिसका मतलब है शरीर से निकलने वाली रोशनी। भगवान महावीर की आध्यात्मिक जागृति के सम्मान में, हर जगह दीपों की सजावट की जाती है।

Avishek Mukherjee की Guru Hargobind Sahib Leaves Prison with 52 Princes (2020)

सिख धर्म में बंदी छोड़ दिवस

दीपावली का दिन सिख धर्म के लोगों के बीच काफ़ी अहमियत रखता है। इस दिन सिखों के छठे गुरु, गुरु हरगोबिंद साहिब और 52 अन्य कैदियों को रिहा किया गया था। इसलिए, वे लोग इसे बंदी छोड़ दिवस (आज़ादी का दिन) के रूप में मनाते हैं।

ऐतिहासिक दस्तावेज़ों के मुताबिक, बादशाह जहांगीर ने कई सालों की कैद के बाद, गुरु हरगोबिंद साहिब को रिहा किया था। हालांकि, गुरु ने कहा कि वह तब तक नहीं जाएंगे, जब तक उनके साथ कैद 52 अन्य राजकुमारों को भी रिहा नहीं किया जाता। बादशाह ने कहा कि निकलते समय जो लोग गुरु के लबादे को पकड़े रहेंगे, सिर्फ़ उन्हें रिहा किया जाएगा।

गुरु हरगोबिंद साहिब ने 52 झालरों वाला लबादा बनवाया, ताकि हर एक राजकुमार एक-एक झालर पकड़कर, उनके साथ जेल से बाहर आ सके. गुरु की आज़ादी का जश्न दीप जलाकर मनाया गया. यह परंपरा तब से आज तक चली आ रही है।

Avishek Mukherjee की Diwali Celebrations (2020)

दीपावली पांच दिनों का त्योहार है! 

दीपावली का उत्सव पूरे उत्साह के साथ पांच दिनों तक मनाया जाता है। इस त्योहार से जुड़े कई मिथक और कथाएं प्रचलित हैं। दीपावली के त्योहार पर लोग अपने दोस्तों और परिवारों से मिलते हैं. वे उपहार और मिठाइयां लेकर एक-दूसरे के घर जाते हैं।

पहला दिन

पांच दिनों तक चलने वाले दीपावली के उत्सव की शुरुआत धनतेरस से होती है। कई दिनों तक साफ़-सफ़ाई के बाद, लोग धन की देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं और उनसे आने वाले साल के लिए, सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगते हैं। साथ ही, धन के देवता कुबेर की भी पूजा की जाती है। इस दिन सोने के आभूषण और नए बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है।

दीपावली पर, लक्ष्मी के साथ-साथ गणेश देवता की भी पूजा की जाती है, जिन्हें शुभ शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। पूजा के बाद, लोग पटाखे फोड़ते हैं, पकवान परोसे जाते हैं, और उत्सव मनाया जाता है। हालांकि, दीपावली पर पटाखों की वजह से होने वाले शोर और वायु प्रदूषण के बारे में लोग जागरूक हो रहे हैं। अब पर्यावरण के लिए सुरक्षित और शांत दीपावली मनाने का चलन शुरू हो चुका है। 

दूसरा दिन

दूसरे दिन को तमिलनाडु, गोवा, और कर्नाटक में नरक चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के हिसाब से, इस दिन भगवान कृष्ण ने अत्याचारी राक्षस नरकासुर का वध किया था। लोग इस दिन, त्योहार के लिए खाने के सामान, खास तौर पर मिठाइयों की खरीदारी करते हैं। उत्तर भारत में यह दिन छोटी दीपावली के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन लोग नए कपड़े पहनते हैं, दोस्तों, रिश्तेदारों, और कारोबार से जुड़े लोगों से मिलते हैं और एक-दूसरे को उपहार देते हैं।

तीसरा दिन

तीसरा दिन त्योहार का मुख्य दिन होता है, जो कि चंद्र मास के कृष्ण पक्ष का अंतिम दिन होता है।दीपावली के दिन पकवान बनाए जाते हैं, घरों के मुख्य दरवाज़े के आगे रंग-बिरंगी रंगोली बनाई जाती है, और दरवाज़ों को तोरण से सजाया जाता है। रात को मिट्टी के दीप जलाए जाते हैं, जो इसे सही मायनों में रोशनी का त्योहार बनाता है।

दीपावली की रात को ताश खेलने की अनोखी परंपरा भी है। शायद, साल भर में यह अकेला ऐसा समय होता है जब शाही दरबारों में खेले जाने वाले गंजीफा ताश की बुरी आदत को सहजता से स्वीकार किया जाता है! ऐसी मान्यता है कि यह देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए खेला जाता है।यह, हमारे जीवन में धन के चंचल स्वभाव और इस सच्चाई को स्वीकार करने की ज़रूरत को दर्शाता है।

Avishek Mukherjee की Sister Applying a Tika to Her Brother's Forehead on Bhai Dooj (2020)

चौथा दिन

दीपावली के अगले दिन को उत्तर, पश्चिम, और मध्य क्षेत्रों के कुछ समुदाय गोवर्धन पूजा के रूप में मनाते हैं। यह दिन भगवान कृष्ण को समर्पित है, जिन्होंने भगवान इंद्र के क्रोध की वजह से हो रही लगातार बारिश और बाढ़ के प्रकोप से, चरवाहों और किसानों को बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत उठा लिया था। 

इस दिन अन्नकूट बनाया जाता है. इस खास पकवान को बनाने के लिए उपलब्ध सभी सब्ज़ियों और मसालों का इस्तेमाल किया जाता है। इसे दोस्तों और परिवार के लोगों में बांटा जाता है। ऐसा माना जाता है कि गोवर्धन के नीचे भगवान कृष्ण ने, सभी से खाने-पीने के जो भी सामान उपलब्ध हैं उन्हें एक-दूसरे के साथ बांटने के लिए कहा था। इससे, एक समुदाय के रूप में इकट्ठा हुए लोग भूख से लड़ने में सफल हुए और इस मुश्किल घड़ी का सामना किया।

पांचवां दिन

उत्सव का अंतिम दिन भाई दूज (भाई के दिन) के रूप में मनाया जाता है. इसे भाऊ बीज, भाई तिलक या भाई फोंटा के नाम से भी जाना जाता है। यह भाई और बहन के पवित्र रिश्ते को समर्पित होता है. बहन अपने भाई के माथे पर तिलक लगाती है। वहीं, भाई उसे उपहार देकर अपना प्यार जताता है।

इससे जुड़ी दो कथाएं प्रचलित हैं. कुछ लोगों के लिए यह त्योहार, यम की बहन यमुना का तिलक के साथ यम का स्वागत करने का प्रतीक है, जबकि कुछ लोग मानते हैं कि इस दिन नरकासुर का वध करके लौटे भगवान कृष्ण की बहन सुभद्रा ने उनका स्वागत किया था। 

आभार: कहानी

तस्वीरें: अभिषेक मुखर्जी

क्रेडिट: सभी मीडिया
कुछ मामलों में ऐसा हो सकता है कि पेश की गई कहानी किसी स्वतंत्र तीसरे पक्ष ने बनाई हो और वह नीचे दिए गए उन संस्थानों की सोच से मेल न खाती हो, जिन्होंने यह सामग्री आप तक पहुंचाई है.
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